गोवा
Indian नौसेना को मिलेगी नई ताकत, अगली पीढ़ी के गश्ती पोतों से बढ़ेगी सुरक्षा क्षमता
Ratna Netam
27 Oct 2026 6:32 PM IST

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पणजी : 27 अक्टूबर 2026। भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों (Next Generation Offshore Patrol Vessels-NGOPV) का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, गोवा शिपयार्ड द्वारा 'INS सृष्टि' नाम के किसी पोत को लॉन्च किए जाने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हुई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, गोवा शिपयार्ड में इस परियोजना के पहले पोत 'शची' को 31 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया था।
भारतीय नौसेना के लिए तैयार हो रहे 11 आधुनिक गश्ती पोत
रक्षा मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए कुल 11 अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत तैयार किए जा रहे हैं।इनमें सात पोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और चार का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया जा रहा है।यह परियोजना नौसेना के मौजूदा अपतटीय गश्ती पोतों की क्षमता बढ़ाने और समुद्र में लंबी अवधि तक निगरानी अभियानों को संचालित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
गोवा में लॉन्च हुआ पहला पोत 'शची'
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने 31 मार्च 2026 को यार्ड 1280 के तहत निर्मित 'शची' नामक पहले गश्ती पोत को लॉन्च किया था।इस समारोह में नौसेना के उपप्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती उपस्थित रहे। पोत का जलावतरण शगुन सोबती ने किया था।समारोह भारतीय नौसेना की परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया गया। इसमें रक्षा मंत्रालय, नौसेना और शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।'शची' का नाम भारतीय पौराणिक परंपरा से लिया गया है, जिसका अर्थ सहायता प्रदान करने वाली शक्ति से जुड़ा है।
समुद्री निगरानी और समुद्री डकैती रोकने में मिलेगी मदद
अगली पीढ़ी के ये गश्ती पोत कई प्रकार के समुद्री अभियानों के लिए तैयार किए जा रहे हैं।इनका प्रमुख उद्देश्य समुद्री निगरानी, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान तथा समुद्री डकैती विरोधी गतिविधियों में भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाना है।इसके अतिरिक्त प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और राहत पहुंचाने में भी इन पोतों का उपयोग किया जा सकेगा।समुद्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी में भी ऐसे गश्ती पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कोलकाता में भी लॉन्च हुए आधुनिक पोत
इस परियोजना के अंतर्गत कोलकाता स्थित जीआरएसई ने भी कई गश्ती पोत लॉन्च किए हैं।11 अगस्त 2026 को 'श्रुति' नामक अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत का जलावतरण किया गया था।इसके बाद 10 अक्टूबर को 'श्रेयस' नामक पोत लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम में नौसेना उपप्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर उपस्थित थे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'श्रेयस' का अर्थ सर्वश्रेष्ठ या अत्यंत उत्कृष्ट होता है। यह पोत भी भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।गोवा शिपयार्ड और जीआरएसई में इन आधुनिक पोतों का निर्माण 'मेक इन इंडिया' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप किया जा रहा है।इससे भारतीय रक्षा उद्योग में जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग, तकनीकी विकास और सहायक उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।घरेलू शिपयार्ड में आधुनिक नौसैनिक पोतों का निर्माण विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
भारत की लंबी समुद्री सीमा और विशाल समुद्री आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में अपतटीय गश्ती पोतों की अहम भूमिका है।अगली पीढ़ी के पोतों के निर्माण से भारतीय नौसेना की निगरानी, राहत और समुद्री सुरक्षा संबंधी क्षमताओं में विस्तार होने की उम्मीद है।हालांकि, किसी पोत का जलावतरण और उसका नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। लॉन्चिंग के बाद पोत को परीक्षण तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना होता है।गोवा और कोलकाता में चल रही यह परियोजना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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