गोवा

20 दिनों से बारिश न होने से सत्तरी के किसान परेशान

Tara Tandi
28 Sept 2026 5:49 PM IST
20 दिनों से बारिश न होने से सत्तरी के किसान परेशान
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वाल्पोई: लगभग 20 दिनों से बारिश न होने के कारण सत्तारी इलाके की नदियों, झरनों, बांधों और पानी के प्राकृतिक स्रोतों में जल स्तर कम हो गया है। अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो सिंचाई का संकट पैदा होने का डर है।
हालांकि पिछले दो दिनों में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई है, लेकिन इससे नदियों के बहाव, पानी के भंडारण या भूजल के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि लंबे समय तक सूखे के कारण गेंदे की खेती और काजू के नए बागों पर असर पड़ना शुरू हो गया है।
नदियों और बांधों पर दबाव
वेलुस, रागाडा, वाल्वंती और म्हादेई जैसी प्रमुख नदियों में जल स्तर गिर गया है, जिससे खेती और बागवानी के लिए स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर किसान चिंतित हैं। बांध, जो बाद में इस्तेमाल के लिए मॉनसून के पानी को जमा करते हैं और कुओं व झरनों को रिचार्ज करने में मदद करते हैं, उन पर भी दबाव है।
फसलों पर असर
गेंदे की खेती करने वालों ने बताया है कि नमी की कमी के कारण पौधे सूख रहे हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में काजू के नए पौधों में पानी की कमी के लक्षण दिख रहे हैं, जिससे भविष्य में पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
किसानों ने जल संसाधन विभाग (WRD) से आग्रह किया है कि वे तुरंत स्थिति का आकलन करें और मॉनसून खत्म होने से पहले उपयुक्त बांधों में उपलब्ध पानी को रोककर रखें। उनका कहना है कि जहां भी तकनीकी रूप से संभव हो, पानी जमा करने से खेतों, बागों और भूजल रिचार्ज में मदद मिलेगी।
सिंचाई को लेकर चिंता
सत्तारी में खेती काफी हद तक बारिश और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर है। अगर सूखा जारी रहता है, तो सब्जियों, गेंदे, काजू और नारियल जैसी फसलों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि भूजल रिचार्ज में कमी से खुले कुओं, बोरवेल और प्राकृतिक झरनों पर असर पड़ सकता है, जबकि नदियों का गिरता जल स्तर इन स्रोतों पर निर्भर पीने के पानी की परियोजनाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
IMD के पूर्वानुमान से अनिश्चितता बढ़ी
उनकी चिंता को और बढ़ाते हुए, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के कोंकण और गोवा के लिए 26 सितंबर को जारी पूर्वानुमान में 26 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई, जिससे अच्छी बारिश की संभावना को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
वैज्ञानिक आकलन की मांग
कुछ किसानों ने कर्नाटक की कालसा-भंडुरा परियोजना पर भी चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि म्हादेई नदी के पानी का डायवर्जन गोवा में पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उन्होंने माना कि वैज्ञानिक जांच के बिना नदी के जलस्तर में मौजूदा गिरावट के लिए सिर्फ़ इस प्रोजेक्ट को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बारिश के पैटर्न, कैचमेंट की स्थिति, भूजल के फिर से भरने (रीचार्ज), स्थानीय स्तर पर पानी निकालने और जल प्रबंधन की भी जांच की जानी चाहिए।
महादेई विवाद गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच का अंतर-राज्यीय मुद्दा बना हुआ है, और गोवा नदी बेसिन से पानी के डायवर्जन का विरोध कर रहा है।
तुरंत कार्रवाई की मांग
किसानों ने मांग की है कि WRD (जल संसाधन विभाग) सत्तारी इलाके की प्रमुख नदियों, बांधों (बंधारों) और सिंचाई के ढांचों का तुरंत निरीक्षण करे। इसका मकसद पानी की उपलब्धता, भूजल स्तर, सिंचाई की ज़रूरतों, पीने के पानी की ज़रूरतों और संरक्षण के उपायों का आकलन करना है। उन्होंने जहां भी संभव हो, बांधों में शटर लगाने, कुओं और झरनों को सुरक्षित करने और पानी की आपूर्ति के लिए पहले से योजना बनाने की भी मांग की है।
उनका मानना ​​है कि अगर सूखा लंबा खिंचता है, तो समय रहते कदम उठाकर किसी बड़े संकट को रोका जा सकता है।
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