गोवा

गोवा विधानसभा का मानसून सत्र 30 दिन का करने की मांग, गिरीश चोडणकर बोले- तीन दिन पर्याप्त नहीं

Saba Naaz
31 July 2026 6:24 PM IST
गोवा विधानसभा का मानसून सत्र 30 दिन का करने की मांग, गिरीश चोडणकर बोले- तीन दिन पर्याप्त नहीं
x

गोवा प्रदेश: कांग्रेस कमेटी (GPCC) के अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने राज्य सरकार से विधानसभा के मानसून सत्र की अवधि बढ़ाकर 30 दिन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल तीन दिनों का विधानसभा सत्र राज्य के महत्वपूर्ण जन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। चोडणकर ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने और जनता से जुड़े सवालों से बचने की कोशिश कर रही है।

गिरीश चोडणकर ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से अपील की कि वे विधानसभा सत्र को लंबा करें, ताकि विपक्ष को जनता की समस्याओं को सदन में उठाने का उचित अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा केवल कानून बनाने की जगह नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों पर खुली बहस और सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे बड़ा मंच है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि गोवा में कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जिन पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। इनमें बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियां, पर्यावरण संरक्षण, भूमि विवाद, बुनियादी सुविधाओं की कमी और आम लोगों से जुड़े अन्य विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में इन सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा संभव नहीं हो सकती।

चोडणकर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर छोटे सत्र आयोजित कर रही है ताकि विपक्ष को सवाल पूछने और सरकार से जवाब मांगने का पर्याप्त समय न मिल सके। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं को सामने लाना है। इसके लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विधानसभा की गरिमा को बनाए रखने के लिए सत्र की अवधि बढ़ाएं। चोडणकर ने कहा कि लंबा सत्र होने से सभी विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाब लेने का मौका मिलेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गोवा जैसे छोटे राज्य में भी कई नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में चर्चा के बिना लिए गए फैसले जनता के हितों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिक समय देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सरकार का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि जनता के हितों की रक्षा के लिए सवाल उठाता है। यदि सरकार अपनी योजनाओं और फैसलों को लेकर आश्वस्त है तो उसे विधानसभा में चर्चा से बचना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि खुली बहस से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।

गौरतलब है कि गोवा विधानसभा का मानसून सत्र राज्य की राजनीति में अहम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान विभिन्न विभागों के कामकाज, सरकारी योजनाओं और जन समस्याओं पर चर्चा होती है। विपक्ष अक्सर इसी मंच के जरिए सरकार को घेरता है और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाता है।

गिरीश चोडणकर की मांग के बाद अब नजर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और राज्य सरकार के रुख पर है। यदि सरकार सत्र की अवधि बढ़ाने का फैसला करती है तो विपक्ष को अधिक समय मिलेगा, वहीं यदि तीन दिन का ही सत्र जारी रहता है तो कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इसे लेकर सरकार पर हमला जारी रख सकते हैं।

Next Story