गोवा

AI हब गोवा: 50,000 लोगों के कौशल विकास का लक्ष्य

Tara Tandi
17 Oct 2026 7:21 PM IST
AI हब गोवा: 50,000 लोगों के कौशल विकास का लक्ष्य
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पणजी: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रोहन खौंटे ने शनिवार को कहा कि गोवा का लक्ष्य खुद को भारत की 'क्रिएटिव राजधानी' (रचनात्मक राजधानी) के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही, 2030 तक 50,000 से अधिक लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रशिक्षित और प्रमाणित करने की योजना है।
राज्य के पहले 'गोवा AI टेक कॉन्क्लेव 2026' की घोषणा करते हुए, खौंटे ने कहा कि इस पहल से गोवा न केवल पर्यटन के लिए, बल्कि तकनीक, नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकेगा। यह दो दिवसीय कॉन्क्लेव 22 और 23 अक्टूबर को पणजी के INOX कोर्टयार्ड में आयोजित किया जाएगा।
खौंटे ने कहा, "AI भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान है।" उन्होंने बताया कि यह तकनीक शासन, उद्यमिता, उद्योग और रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रही है। उन्होंने कहा कि गोवा पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, सांस्कृतिक विरासत और क्रिएटिव उद्योगों में अपनी खूबियों को तकनीक के साथ जोड़ना चाहता है। इससे व्यवसायों को विकसित होने, स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने और नए विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य गोवा को भारत की क्रिएटिव राजधानी बनाना है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य व्यापक उपयोग के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित करना चाहता है।
खौंटे ने बताया कि प्रस्तावित 'गोवा AI नीति 2026' पांच मुख्य स्तंभों पर केंद्रित होगी: कौशल (स्किल्स), स्टार्टअप्स, कंपनियां, पूंजी और बुनियादी ढांचा, तथा शासन। कौशल विकास एक प्रमुख प्राथमिकता होगी, जिसमें सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50,000 से अधिक लोगों को AI में प्रशिक्षित और प्रमाणित करना है। उन्होंने कहा कि यह पहल गोवा के लोगों को बदलते रोजगार परिदृश्य के लिए तैयार करेगी, क्योंकि AI अब विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से शामिल हो रहा है।
AI के कारण नौकरियां जाने की चिंताओं पर खौंटे ने कहा कि अगर लोग नए कौशल सीखने पर ध्यान नहीं देते हैं, तो बेरोजगारी एक चुनौती बन सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी प्रगति को रोका नहीं जा सकता, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल कैसे हो, इस पर इंसानों का नियंत्रण बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "तकनीकी प्रगति को रोका नहीं जा सकता। इंसानों को नियंत्रण अपने पास रखना चाहिए और तय करना चाहिए कि इसका इस्तेमाल कहां और कैसे करना है।" उन्होंने आगे कहा कि चैटजीपीटी (ChatGPT) और जेमिनी (Gemini) जैसे टूल्स को लोगों की मदद करनी चाहिए, न कि उन पर हावी होना चाहिए। इस सम्मेलन में 'गोवा AI नीति 2026' लॉन्च की जाएगी, 'गोवा AI हैकाथॉन' आयोजित होगा और 'लिविंग लाइब्रेरी ऑफ गोवा रूरल AI रिपोर्ट' पेश की जाएगी। इस हैकाथॉन में छात्रों, कंपनियों और इनोवेटर्स को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे सरकारी विभागों द्वारा पहचानी गई समस्याओं के समाधान विकसित कर सकें।
सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग के निदेशक कबीर शिरगांवकर ने कहा कि यह कार्यक्रम सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों को एक साथ लाएगा, ताकि AI के व्यावहारिक उपयोगों पर चर्चा की जा सके। शिरगांवकर ने कहा, "हमारा लक्ष्य इसे सिर्फ एक सम्मेलन से कहीं बढ़कर बनाना है। हम चाहते हैं कि यह विचारों, साझेदारियों और समाधानों का एक ऐसा केंद्र बने, जहाँ बातचीत से सहयोग बढ़े और इनोवेशन वास्तविक दुनिया में लागू हो सके।"
इस कार्यक्रम में जिम्मेदार और समावेशी AI, उद्योगों में इसे अपनाना, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), और AI-आधारित पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी जैसे विषयों पर चर्चा होगी। प्रतिभागी नई उभरती तकनीकों, स्टार्टअप इनोवेशन और उनके प्रदर्शन (डेमो) को भी देख सकेंगे। यहाँ छात्रों, युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स और तकनीक के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं के लिए विशेष गतिविधियाँ होंगी, जहाँ वे अपने विचारों को सबके सामने रख सकेंगी।
खांटे ने कहा कि तकनीक सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बना सकती है। उन्होंने 'गोवा ऑनलाइन' पोर्टल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे AI-आधारित सहायता सरकारी सेवाओं को और अधिक प्रभावी और त्वरित बना सकती है। उन्होंने 'भाषिणी' (Bhashini) भाषा मॉडल पहल के जरिए AI इकोसिस्टम में कोंकणी भाषा को शामिल करने के प्रस्ताव पर भी जोर दिया। खांटे ने बताया कि 'भाषिणी LLM' (जो अभी विकसित हो रहा है और जल्द ही लॉन्च होने वाला है) में कोंकणी भाषा को भी शामिल किया जाएगा। इससे डिजिटल भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी और यह गोवा की भाषाई व सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाएगा।
उन्होंने कहा कि AI पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बना सकता है, मैन्युफैक्चरिंग में उत्पादकता बढ़ा सकता है और शासन-प्रशासन (गवर्नेंस) को और अधिक सुदृढ़ कर सकता है। यह दृष्टिकोण 'सॉवरेन AI' (Sovereign AI) के अनुरूप है, जहाँ स्थानीय जरूरतों, भाषाओं और विशिष्ट क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार किए जाते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस सम्मेलन की वेबसाइट लॉन्च की गई और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। खांटे ने देश भर की टेक्नोलॉजी कंपनियों, उद्योग जगत के दिग्गजों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, छात्रों और इनोवेटर्स को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
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