
पणजी। गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर भारतीय नौसेना के फाइटर जेट और एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्री विमान के बीच टक्कर होने की गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। 3 अप्रैल 2026 की सुबह हुई इस घटना में 171 लोग सवार थे। नौसेना का लड़ाकू विमान रनवे से उड़ान भरने के लिए दौड़ना शुरू कर चुका था, तभी एयर इंडिया एक्सप्रेस का बोइंग 737-8 (मैक्स) विमान भी उसी सक्रिय रनवे पर प्रवेश कर गया। गनीमत रही कि नौसेना के फाइटर जेट ने समय रहते उड़ान भर ली और एक बड़ा हादसा टल गया। अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की अंतिम जांच रिपोर्ट में इस गंभीर घटना के पीछे पायलटों की गलतफहमी, एटीसी के निर्देशों का अधूरा पालन और कंट्रोलर की संचार संबंधी चूक सामने आई है।
रनवे पर कैसे पहुंचे दो विमान?
AAIB की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान AXB-1109 को गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट से दिल्ली जाना था। विमान का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-BXL था। इसमें छह चालक दल के सदस्यों और 165 यात्रियों समेत कुल 171 लोग सवार थे।
3 अप्रैल की सुबह विमान को शुरुआत में रनवे-26 से उड़ान भरने की तैयारी के लिए स्टार्टअप और पुशबैक की अनुमति दी गई थी। लेकिन बाद में रनवे बदलकर रनवे-08 कर दिया गया। इसके बाद एयरपोर्ट के सरफेस मूवमेंट कंट्रोल (SMC) ने विमान को टैक्सीवे N2 से जाने और रनवे-08 के होल्डिंग पॉइंट पर रुकने का निर्देश दिया।
इसी दौरान नौसेना का एक सिंगल-पायलट फाइटर जेट रनवे-08 पर उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था। नौसेना के एटीसी टावर ने उसे टेकऑफ की अनुमति दे दी थी। एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान भी इसी रनवे की ओर बढ़ने लगा और बिना स्पष्ट अनुमति के सक्रिय रनवे पर पहुंच गया।
'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' को समझ लिया रनवे में प्रवेश की अनुमति
जांच रिपोर्ट में इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण कारण बातचीत के दौरान पैदा हुई गलतफहमी बताई गई है। दरअसल, SMC कंट्रोलर ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के चालक दल को रनवे बदलने की जानकारी देते हुए कहा था कि वे 'बैकट्रैक' की अपेक्षा रखें।
बैकट्रैक का मतलब होता है विमान का रनवे पर प्रवेश करके उसकी लंबाई के विपरीत दिशा में आगे बढ़ना, ताकि वह उड़ान भरने के लिए निर्धारित स्थान तक पहुंच सके।
रिपोर्ट के अनुसार, पायलट ने 'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' को रनवे में प्रवेश करने की अनुमति समझ लिया। जबकि यह केवल भविष्य की संभावित प्रक्रिया की जानकारी थी, रनवे पर जाने की वास्तविक अनुमति नहीं।
इसके बावजूद चालक दल ने कंट्रोलर से दोबारा स्पष्ट अनुमति नहीं मांगी। विमान के पायलट ने रनवे में प्रवेश करने की बात कही, लेकिन इस सूचना को कंट्रोलर की तरफ से अनुमति नहीं मिली थी।
ट्रेनी को-पायलट भी नहीं समझ पाया गंभीर स्थिति
AAIB की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस उड़ान में कप्तान एक प्रशिक्षु फर्स्ट ऑफिसर को प्रशिक्षण दे रहा था। कप्तान लगातार प्रशिक्षण और विमान संचालन की निगरानी में व्यस्त था, जबकि प्रशिक्षु को-पायलट रेडियो संचार संभाल रहा था।
होल्डिंग पॉइंट पर पहुंचने के बाद प्रशिक्षु को-पायलट विमान के टेकऑफ से जुड़े आंकड़ों की गणना करने और सिस्टम में जरूरी जानकारी भरने में व्यस्त हो गया। इस कारण उसका ध्यान रेडियो संचार और आसपास की गतिविधियों से हट गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रशिक्षु को-पायलट अपने प्रशिक्षक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर था और उसने रनवे में बिना अनुमति प्रवेश करने से रोकने के लिए कोई चेतावनी नहीं दी।
इस तरह कॉकपिट के भीतर भी आपसी निगरानी और संवाद में कमी रही, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
कंट्रोलर की भी सामने आई गलती
जांच में केवल पायलटों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। रिपोर्ट में SMC कंट्रोलर की ओर से भी संचार संबंधी चूक को सहायक कारण बताया गया है।
जब विमान के को-पायलट ने टैक्सी निर्देशों का जवाब दिया तो उसने 'होल्ड एट होल्डिंग पॉइंट' वाले महत्वपूर्ण हिस्से को दोहराया ही नहीं। कंट्रोलर ने भी इस अधूरे जवाब पर दोबारा स्पष्ट पुष्टि नहीं मांगी।
इसके बाद कंट्रोलर ने विमान को 119.7 मेगाहर्ट्ज की एटीसी फ्रीक्वेंसी पर संपर्क करने के लिए कहा। पायलट की ओर से जवाब में 'रनवे में प्रवेश' का उल्लेख किया गया, लेकिन कंट्रोलर ने इस पर स्पष्ट अनुमति नहीं दी और न ही गलतफहमी दूर की।
SMC कंट्रोलर ने यह मान लिया कि विमान नौसेना के एटीसी से संपर्क स्थापित कर चुका है और उसे रनवे में प्रवेश की अनुमति मिल गई होगी। इसी गलत धारणा के कारण समय रहते विमान को रोकने का निर्देश नहीं दिया जा सका।
नौसेना के फाइटर जेट ने समय रहते भरी उड़ान
घटना के दौरान नौसेना का फाइटर जेट रनवे पर टेकऑफ के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा था। टावर कंट्रोलर ने जब देखा कि एक अनजान विमान सक्रिय रनवे में प्रवेश कर गया है, तो उसने नौसेना के पायलट को इसकी सूचना दी।
नौसेना के पायलट ने स्थिति को समझते हुए रनवे के N5 हिस्से के पास से उड़ान भर ली। इस वजह से दोनों विमानों के बीच संभावित टक्कर टल गई।
नौसेना के कंट्रोलर ने बाद में इसे 'नियर मिस' यानी बेहद करीब से टली टक्कर की स्थिति बताया। घटना के बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान को रनवे खाली करने और निर्धारित स्थान पर रुकने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद दूसरे नौसेना फाइटर जेट की उड़ान पूरी होने पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान को दोबारा टेकऑफ की अनुमति दी गई। विमान ने सुरक्षित दिल्ली के लिए उड़ान भरी और वहां भी सुरक्षित लैंडिंग की।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना में किसी भी यात्री या चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई और दोनों विमानों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
AAIB ने दिए सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के सुझाव
अंतिम जांच रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
एयर इंडिया एक्सप्रेस को संबंधित चालक दल की काउंसलिंग और पायलट-इन-कमांड को विशेष प्रशिक्षण देने की सिफारिश की गई है। वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) से रेडियो संचार में स्पष्ट और मानक शब्दावली के इस्तेमाल पर जोर देने को कहा गया है।
नौसेना को रनवे पर स्टॉप बार की व्यवस्था और सिविल विमानों के लिए फ्रीक्वेंसी बदलने की प्रक्रिया स्पष्ट करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा DGCA को नागरिक विमानन और रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच बेहतर समन्वय के लिए औपचारिक व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई है।
भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए जरूरी बदलाव
डाबोलिम एयरपोर्ट पर हुई यह घटना बताती है कि विमानन सुरक्षा में छोटी सी संवाद संबंधी चूक भी कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। खासकर ऐसे एयरपोर्ट पर जहां नागरिक विमानों और सैन्य विमानों का संचालन एक ही रनवे पर होता है, वहां स्पष्ट निर्देश और बेहतर समन्वय बेहद जरूरी हैं।
AAIB की रिपोर्ट में रनवे N2 को संभावित जोखिम वाला क्षेत्र मानने, रनवे प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा करने और कंट्रोलर के बीच शिफ्ट बदलते समय महत्वपूर्ण जानकारियों का लिखित रिकॉर्ड रखने की भी बात कही गई है।
इस घटना में 171 लोगों की जान सुरक्षित रही, लेकिन जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में ऐसे जोखिम रोकने के लिए केवल पायलटों की सतर्कता नहीं, बल्कि पूरे हवाई यातायात तंत्र का एकसाथ सही तरीके से काम करना आवश्यक है।





