छत्तीसगढ़

मानसिक बीमारी से पीड़ित महिला एक माह बाद परिवार से मिली, चेहरे पर लौटी खुशी

Shantanu Roy
2 Aug 2026 8:49 PM IST
मानसिक बीमारी से पीड़ित महिला एक माह बाद परिवार से मिली, चेहरे पर लौटी खुशी
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छग
MCB. एमसीबी। छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के चिरमिरी की रहने वाली मानसिक रूप से बीमार महिला करीब एक महीने बाद सुरक्षित अपने परिवार के पास वापस लौट आई है। महिला इलाज के दौरान मध्यप्रदेश के रतलाम स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी। उपचार पूरा होने के बाद महिला का बेटा उसे अपने साथ लेकर वापस छत्तीसगढ़ पहुंचा। परिवार के लिए यह पल राहत और भावुकता से भरा रहा। जानकारी के अनुसार, चिरमिरी के छोटी बाजार वार्ड क्रमांक-19 निवासी लक्ष्मी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं।
बताया गया
कि 1 जुलाई 2026 को वह किसी तरह भटकते हुए अपने घर से दूर मध्यप्रदेश के रतलाम पहुंच गई थीं। अनजान स्थान पर पहुंचने के बाद उन्हें परेशानी की स्थिति में रतलाम के स्वास्थ्य विभाग की मदद मिली। बताया गया कि महिला को उसी दिन रात करीब 11:35 बजे रतलाम के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच और उपचार के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें मानसिक रोग विभाग में भर्ती किया। इसके बाद उनका इलाज डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम में शुरू किया गया।
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में डॉक्टरों की निगरानी में महिला का उपचार किया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। इलाज के बाद महिला की स्थिति में सुधार आया और वह अपने परिवार तक पहुंचने की स्थिति में आ गईं। इसी बीच परिवार की ओर से महिला की तलाश की जा रही थी। महिला के बेटे दीपक को जब अपनी मां के रतलाम में होने की जानकारी मिली तो वह तुरंत वहां पहुंचा। मेडिकल कॉलेज पहुंचकर उसने महिला की पहचान अपनी मां के रूप में की। मां-बेटे के मिलने का यह क्षण बेहद भावुक रहा।
इसके बाद दीपक ने जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी मां को अपने साथ वापस लाने की तैयारी की। 31 जुलाई 2026 को वह अपनी मां को लेकर रतलाम से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुआ। परिवार के अनुसार, दोनों 1 अगस्त 2026 को चिरमिरी पहुंच गए, जिसके बाद घर में खुशी का माहौल बन गया। परिवार ने राहत की सांस ली कि लंबे समय बाद उनकी मां सुरक्षित वापस लौट आई हैं। मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के भटक जाने की घटनाएं कई बार सामने आती हैं, ऐसे मामलों में समय पर सहायता और पहचान होने से मरीजों को दोबारा परिवार तक पहुंचाया जा सकता है।
इस घटना में रतलाम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने महिला को उपचार और देखभाल उपलब्ध कराई। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान महिला की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा गया। मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ परिवार और समाज को संवेदनशील व्यवहार करने की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों को नियमित इलाज, दवा और परिवार के सहयोग की आवश्यकता होती है। यदि कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति रास्ता भटक जाए तो उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचाने के लिए पुलिस, प्रशासन और आम लोगों की मदद महत्वपूर्ण साबित होती है। चिरमिरी की लक्ष्मी की यह कहानी एक बार फिर बताती है कि समय पर मिली सहायता, चिकित्सकीय देखभाल और परिवार के प्रयास से बिछड़े हुए लोग दोबारा अपने घर लौट सकते हैं। एक महीने बाद मां की सुरक्षित वापसी से परिवार में खुशी लौट आई है।
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