छत्तीसगढ़

क्या मरकाम बने रहेंगे अध्यक्ष?...सीएम की कृपा जरूरी...

jantaserishta.com
20 Oct 2021 5:41 AM GMT
क्या मरकाम बने रहेंगे अध्यक्ष?...सीएम की कृपा जरूरी...
x
सीएम की नाराजगी सामने आने के बाद पीसीसी अध्यक्ष बदले जाने को लेकर सुगबुगाहटें.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष, बढ़ रही नाराजगी

पीसीसी अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से कांग्रेस में गुटबाजी
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस में संगठन की नियुक्तियों के बाद पीसीसी अध्यक्ष के खिलाफ कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ते जा रही है। कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री की नाराजगी सामने आने के बाद अब कार्यकर्ता मुखर होकर अपना विरोध जताने लगे हैं। मोहन मरकाम पर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और हालफिलहाल कांग्रेस में शामिल चाटूकार व दलाल नेताओं को तवज्जो देने का आरोप लगते रहा है। मोहन मरकाम की नियुक्ति के पीछे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ही हाथ रहा है, जिसके बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि सत्ता और संगठन में संतुलन के साथ कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को भी विश्वास में लेकर प्रदेश में अपनी पैठ मजबूत करेगी। लेकिन भूपेश बघेल की नाराजगी सामने आने के बाद अब पीसीसी में बदलाव लेकर आवाज उठने लगी है। कई पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने इसके लिए लाबिंग भी शुरू कर दी है। विरोध को देखते हुए मरकाम के अध्यक्ष बने रहने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। मरकाम के कार्यप्रणाली से कांग्रेस में इस कदर गुटबाजी उभरने लगी है कि प्रदेश कांग्रेस अपने विज्ञापनों में प्रदेश कांग्रेस छत्तीसगढ़ का भी उल्लेख नहीं कर पा रही है। भूपेश बघेल के सर्वश्रेष्ठ सीएम वाले कई अखबारों( जनता से रिश्ता को नहीं) में प्रकाशित विज्ञापन में प्रदेश कांग्रेस का जिक्र तक नहीं है। ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर वे आगे भी अध्यक्ष बने रहते हैं तो इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आशीर्वाद बनाए रखने के लिए जोर लगाने पड़ेंगे। भूपेश बघेल की कृपा मिलने पर ही उनका अध्यक्ष का पद सलामत रह सकता है।
संगठन में नियुक्तियों को लेकर नाराजगी
कांग्रेस संगठन में अभी हाल में हुई नियुक्तियों को कांग्रेसी पचा नहीं पा रहे हैं। नियुक्ति के बाद वरिष्ठ कांग्रेसियो में भारी नाराजगी है, वरिष्ठ कांग्रेसी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि अभी जिन पदों पर नियुक्ति हुई है अधिकतर भूमाफिया, दलाल व चाटुकार किस्म के छुटभैये नेता ही अधिक हैं।उक्त नेता ने यह भी बताया कि इन सब नियुक्तियों में एक अल्पसंख्यक वर्ग का नेता दलाल की भूमिका निभा रहा है, जो मुख्यमंत्री का करीबी बताकर पद हासिल कर लिया है। उसके मुख्य भूमिका और पैसों के लेनदेन के कारण अभी हाल में हुई नियुक्तियों में वर्षो से कांग्रेस की मजबूती के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कांग्रेसियों की अनदेखी की गई है जिसे वे निश्चित रूप से पीसीसी चीफ मोहन मरकाम की मनमानी मान रहे हैं। नियुक्तियों के बाद उठा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह बवाल सिर्फ रायपुर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में धीरे-धीरे धधकते हुए फैल रहा है। यह आंधी आगे चलकर सुनामी बन जाएगा जो कांग्रेस के उन बड़े-बड़े वटवृक्ष के लिए नुकसान देह साबित होगा जो अपने नीचे किसी को पनपने नहीं दे रहे है। गौर करने वाली बात यह भी है कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री का पूर्व में दिए गए बयान का कोई औचित्य नहीं रह गया है, उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में पद रिश्तेदारों या चाटुकारों को नहीं दी जाएगी। लेकिन अभी ऐसा ही हो रहा है, रिश्तेदारों और चाटुकारों को ही पद दिया जा है। जिसका सर्वत्र विरोध हो रहा है, ऐसे लोगों को पदाधिकारी बना दिया गया है जो कभी कांग्रेस में रहे ही नहीं और कांग्रेस की संस्कृति से कोसों दूर हैं। पैराशूट लैंडिंग वालों की कांग्रेस में जमकर सिक्का चल रहा है।
पूरे प्रदेश में हो रहा विरोध
वरिष्ठ कांग्रेसियों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि संगठन में पद को भारी रकम लेकर बेचा गया है। पिछली बार जब ब्लाक अध्यक्षों की नियुक्ति हुई थी तब भी जमकर विरोध हुआ था भाटापारा में तो कांग्रेस के बजाय दूसरे दल के सक्रिय कार्यकर्ता को अध्यक्ष बनाया गया था, ऐसा भाटापारा के एक वरिष्ठ कांग्रेसी का कहना था। राजनांदगाव जिले में भी नवनियुक्त पदाधिकारी का जमकर विरोध हो रहा है। कमोबेश यही स्थिति रायपुर के गुरु घासीदास वार्ड में भी हुआ था, यहां भी ऐसे को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है जो ना तो कभी कांग्रेस भवन में कदम रखी है ना ही कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में दिखीं है। इसके बावजूद अध्यक्ष पद पर उनको बिठाया गया था । छत्तीसगढ़ के अधिकतर कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी वाले अंदाज में कहा कि ऐसे लोगों को पद दिए जाते रहे और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं हुआ तो थोक में इस्तीफा देने में भी देरी नहीं करेंगे। हालांकि अभी खुलकर कोई सामने नहीं आया है सिर्फ दबी जुबान में बोल रहे हैं और उचित समय का इंतजार कर रहे हैं। नाराज नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में सहयोग नहीं करने का अभी से मन बना लिया है।
भूमाफियाओं का संगठन में दबदबा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भू-माफिया और बाहर से आ गए कांग्रेसियों को प्रदेश पदाधिकारी बनाए जाने को लेकर जमकर विरोध हो रहा है। इसके चलते प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के विरोध में आवाज उठने लगी है। वरिष्ठ कांग्रेसजनों का स्पष्ट कहना है कि हम लोग बरसों से कांग्रेस की सेवा कर रहे हैं इसके बावजूद कांग्रेस की सत्ता आते ही पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम अनदेखी कर रहे हैं। पीसीसी अध्यक्ष दलाल किस्म के छुटभैया नेताओं की चमचागिरी के कारण ऐसे लोगों की नियुक्ति कर रहे हैं जो लोग सामाजिक और राजनीतिक तौर पर कहीं से भी कांग्रेसी नहीं थे और जो कांग्रेस के संघर्ष के दिनों में भारतीय जनता पार्टी के मोहरे बन कर कार्य करते थे ऐसे लोगों को संगठन में तवज्जो दी जा रही है। पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम की कार्यशैली को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखने लगी है। जमीन से जुड़े कांग्रेसी अपनी उपेक्षा से व्यथित हैं। पीसीसी अध्यक्ष के क्षेत्र के कार्यकर्ता ही अब उनके विरोध में खड़े हो रहे हैं।
जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी
जिन नेताओ को निगम मंडलो में जगह नहीं मिली थी वे संगठन में जगह मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे, जिस प्रकार से चाटुकारो ,दलालो और भूमाफियाओ की अभी नियुक्ति हुई है उसमे भी ये छले गए है जिससे वे काफी नाराज बताये जा रहे है और कुछ तो चुनाव में साथ नहीं देने का भी मन बना लिए हैं। इसमें पूर्व विधायक से लेकर कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हैं। कार्यकर्ता सम्बन्ध के हिसाब से पद बांटने का आरोप लगाते रहे है, पार्टी के समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। कई ऐसे लोगों को पद दिया गया जिन्हें कांग्रेसी ही नहीं पहचानते हैं। निगम-मंडलों कई ऐसे नाम औैर चेहरे भी हैं जो सत्ता औैर संगठन दोनों ही जगह हैं इसे लेकर कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त नाराजगी है। सूची जारी होने से पहले ऐसा कहा जाता था कि निगम मंडलों में ऐसे लोगों को कम महत्व दिया जाएगा, जो 15 साल सत्ता के संघर्ष से बाहर रहे हैं। जब निगम मंडलो में नियुक्ति हुई तो अधिकतर नाम उन्ही लोगो का था। कर्मठ और पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं मिलने से वे काफी मायूस और आक्रोशित भी हैं। कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी की 15 सालों बाद सत्ता में लौटने से अब उन्हें भी मेहनत का इनाम मिलेगा लेकिन तमाम निगम-मंडलों में फ्रंट लाइन नेता और पदाधिकारी रहे लोगों को ही नियुक्त कर दिया गया इससे कार्यकर्ता ठगा सा महसूस कर रहे थे फिर उन्हें लगा कि शायद संगठन के पदाधिकारियों की निगम-मंडलों में नियुक्ति से खाली होने पदों पर उन्हें अवसर दिया जाएगा लेकिन यहां भी उनकी अनदेखी की जा रही है।
दलाल-चाटूकारों को बांट रहे पद
निगम-मंडलों में नियुक्ति के दौरान कई ऐसे नेताओं को पद बांटे गए जिनका कांग्रेस से हाल-फिलहाल का ही संबंध है, दलाल व चाटूकार किस्म के दूसरे दलों व संगठनों से आकर बड़े नेताओं के आगे पीछे घुमने वालों को उपकृत किया गया जबकि निष्ठावान, जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को भाव नहीं मिला। कई महीने निगम-मंडल और संगठन में दोहरी जिम्मेदारी निभाने वाले जिन नेताओं को संगठन से मुक्त कर नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई उसे लेकर भी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। जिन जिलों में जिलाध्यक्ष बदले गए वहां विरोध के स्वर उभर रहे हैं। वहीं अन्य नियुक्तियों को लेकर भी कार्यकर्ता अपनी नाराजगी लगातार जाहिर कर रहे हैं।
छाया विधायकों का संगठन के खिलाफ मोर्चा
कांग्रेस के हारे हुए विधायक सत्ता और संगठन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। सभी छाया विधायकों ने कहा कि जिन लोगों के कारण वे पिछला चुनाव हार चुके हैं वे सभी आज सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे हैं। इसका असर यह हो रहा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के बाद भी उनके काम में अड़ंगा लगाया जा रहा है। अपने ही क्षेत्र में उपेक्षित इन छाया विधायकों ने रायपुर के एक निजी होटल में बैठककर आगे की रणनीति तैयार की। बताया गया है कि उनके क्षेत्र में सक्रिय हो चुके दूसरे दलों से आए नेताओं के साथ ही पार्टी की ही ऐसे नेता जो उनके काम में अड़ंगा लगा रहे हैं उन सबकी नामजद शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव हारने के बाद हमने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर पार्टी आलाकमान को दी थी लेकिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कांग्रेस प्रवेश कराकर संगठन के साथ ही सत्ता में महत्वपूर्ण पद दे दिया गया है। इसलिए वे इसकी शिकायत के लिए मुख्यमंत्री से समय मांग चुके हैंं।
बूथ प्रबंधन से पहले बूथ कमेटी बनाने के लिए कांग्रेस को करनी पड़ रही मशक्कत
प्रदेश में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को पिछले विधानसभा चुनाव के फार्मूले पर लडऩे की तैयारी कर रही है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने बूथ प्रबंधन को विशेष जोर दिया था, इस बार यहां कांग्रेस को सत्ता में होने के बावजूद बूथ प्रबंधन से पहले बूथ कमेटी के गठन के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। इसे देखते हुए अब बूथ कमेटी बनवाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम खुद मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कमर कसनी शुरू कर दी है, इसलिए बूथ कमेटी और बूथ प्रबंधन पर अभी से ध्यान दिया जा रहा है। पिछले सप्ताह हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने पहुंचे प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और प्रभारी सचिव डा. चंदन यादव ने बूथ प्रबंधन समिति के सदस्यों की भी बैठक ली थी। इस बैठक में पुनिया और डा. यादव ने बूथ कमेटियों का गठन जल्दी करने के लिए कहा। तब बूथ प्रबंधन समिति के सदस्यों ने यह शिकायत की कि विधायकों की दखल के कारण देरी हो रही है। इस कारण अब सभी बूथ कमेटियों के गठन की अवधि बढ़ा दी गई है। पहले प्रदेश कांग्रेस ने दिसंबर के पहले हफ्ते तक सभी बूथ कमेटियों के गठन का लक्ष्य रखा था, जिसे अब 31 दिसंबर कर दिया गया है। उसके अलावा यह तय हुआ है कि अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम भी दौरा कर बूथ कमेटियों का गठन कराएंगे।
Next Story