छत्तीसगढ़
वन्यजीव संरक्षण पर खतरा: हिरण शिकार, ‘समझौते’ और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
Shantanu Roy
6 Dec 2025 7:36 PM IST

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छग
Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। जिले में वन्यजीवों की अवैध हत्या और उसके बाद पुलिस द्वारा कथित रूप से ‘समझौता’ कर मामलों को दबाने की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बलौदा थाना क्षेत्र के बिरगहनी (ब) गांव में हाल ही में सामने आए हिरण शिकार के मामले ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि हिरण का शिकार कर उसके मांस से भोज की तैयारी कर रहे लोगों को पुलिस ने पकड़ा, लेकिन कानूनी कार्रवाई के बजाय 2 लाख रुपये की रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ दिया।
हिरण शिकार मामले ने खोली पुलिस की पोल
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बिरगहनी जंगल में कुछ लोग हिरण को मारकर उसके मांस को साफ कर भोज तैयार कर रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही बलौदा थाना के कुछ आरक्षक मौके पर पहुंचे। ग्रामीण उम्मीद कर रहे थे कि पुलिस वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई करेगी, जिसके अनुसार हिरण शिकार पर 3 से 7 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माना का प्रावधान है। लेकिन उल्टा पुलिस पर ही आरोप लग गया कि उन्होंने शिकारी पक्ष से दो लाख रुपये लेकर मामला रफा-दफा कर दिया। इस कथित सौदे ने न केवल ग्रामीणों में गुस्सा पैदा किया है बल्कि पुलिस विभाग की छवि को भी धूमिल किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्दी में मौजूद लोग ही अपराधियों को बचाएंगे तो अवैध शिकार के मामलों को रोकना मुश्किल हो जाएगा।
जंगली सुअर हत्याकांड में भी दोहराया गया ‘समझौता’
यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले इसी गांव में जंगली सुअर को चाकू मारकर बेरहमी से मारने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी मांस से भोज तैयार कर रहे थे। जब इसकी सूचना पुलिस को मिली तो यहां भी कार्रवाई के बजाए कथित रूप से समझौता कर पूरा मामला दबा दिया गया। इन मामलों ने स्थानीय स्तर पर अवैध शिकारियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फसल नुकसान जैसे मामलों में तो कार्रवाई की जाती है, लेकिन वन्यजीवों की सुरक्षा की बात आती है तो पुलिस की उदासीनता साफ दिखाई देती है।
जिले में लगातार बढ़ रहे वन्यजीव अपराध
जांजगीर-चांपा जिले में यह समस्या नई नहीं है। कई गांवों में पिछले वर्षों में जंगली सुअर और अन्य वन्यजीवों का शिकार किया गया है। कटरा-बिरगहनी जंगल में 2020 से करंट तार लगाकर सुअर शिकार करने के मामले दर्ज हैं। वर्ष 2022 में इस मामले में आरोपियों हीरालाल सरगम और दिलेश पाटले को गिरफ्तार किया गया था। सक्ती थाना क्षेत्र में भी करंट तार से शिकार करने वाले तीन लोगों को पकड़ा गया था, यह मामला एक ग्रामीण की मौत से जुड़ा था। पंतोरा उपथाना के खैजा गांव में शिकार के लिए लगाए गए करंट तार से युवक गौतम लहरे की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ। इन सभी मामलों में स्पष्ट है कि जिले में वन्यजीव शिकार के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन पुलिस और वन विभाग इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
पुलिस पर बढ़ रहे रिश्वतखोरी के आरोप
ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों का कहना है कि शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने और रिश्वत के नाम पर मामले दबा देने की परंपरा ने स्थिति को खतरनाक बना दिया है। पुलिस की निष्क्रियता का लाभ उठाकर अब शिकारी हिरण, जंगली सुअर और अन्य वन्यजीवों को खुलेआम निशाना बना रहे हैं। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
लगातार हो रही घटनाओं और पुलिस पर लगे आरोपों ने ग्रामीणों में भारी असंतोष फैला दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि पुलिसकर्मियों पर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच हो हिरण व सुअर शिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जंगल क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जाए। वन विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। जांजगीर-चांपा में बढ़ रहे वन्यजीव अपराध यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि यदि स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया तो जंगलों की जैव विविधता और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। जिले में चल रहा यह वन्यजीवों का काला खेल तत्काल रोकने की जरूरत है।
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