छत्तीसगढ़

भाजपाइयों को छत्तीसगढ़िया, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और गरीबों से इतनी नफरत क्यों है?

Shantanu Roy
9 Sep 2023 2:34 PM GMT
भाजपाइयों को छत्तीसगढ़िया, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और गरीबों से इतनी नफरत क्यों है?
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छग
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि अपनी राजनीति चमकाने राजभवन गए भाजपाइयों की हकीकत छत्तीसगढ़ की जनता जानती है। भाजपा नेताओं के बदनियती के चलते ही जन सरोकार के सर्वाधिक महत्वपूर्ण, आरक्षण विधेयक 9 महीने से अधिक समय से उसी राजभवन लंबित है। भाजपाईयों के षडयंत्र के चलते ही छत्तीसगढ़ के बहुसंख्यक आबादी को उसके शिक्षा और रोजगार के अधिकार को प्रभावित करने वाला 76 प्रतिशत आरक्षण से वंचित रखा गया है। छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं के षडयंत्रों के चलते ही नवीन आरक्षण विधेयक, जिसमें छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये 32 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जाति के लिये 13 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 27 प्रतिशत और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग (ईडब्लूएस) के लिये 4 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। वह पिछले 9 महिने से राजभवन में कैद है। आए दिन तथ्यहीन, आधारहीन आरोप लगाकर बात-बात पर राजभवन जाते हैं, वे यह क्यों नहीं बताते की आरक्षण से इतनी नफ़रत क्यों है? छत्तीसगढ़ में मुद्दाविहीन भाजपाई संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते रहे हैं। यदि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को जन सरोकारों से मतलब होता तो महामहिम राज्यपाल से आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर करने की अपील करते।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि केवल अपने राजनीति एजेंडे को पूरा करने ही भाजपाई आज राजभवन गए थे। भाजपा के उस प्रतिनिधि मंडल में धरम लाल कौशिक और प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव मौजूद थे जो स्वयं ही ओबीसी वर्ग से आते हैं लेकिन महामहिम राज्यपाल से यह नहीं पूछा कि छत्तीसगढ़ के पिछड़ा वर्ग को 27 परसेंट आरक्षण देने वाला विधेयक 2 दिसंबर 2022 से आज तक लंबित क्यों है? अनुसूचित जाति के भी भाजपा के पूर्व मंत्री पुन्नुलाल मोहले, कृष्णमूर्ति बांधी और दयाल दास बघेल शामिल थे, लेकीन यह नहीं पूछा कि अनुसूचित जाति के लिए बढ़ाए गए आरक्षण के प्रावधान हेतु नवीन आरक्षण विधेयक पर महामहिम का हस्ताक्षर कब होगा? पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने यह नहीं पूछा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सामान्य वर्ग के लोगों के आरक्षण की व्यवस्था भी विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित नवीन आरक्षण विधेयक में किया गया है, लेकिन विगत 9 महीने से अधिक समय से लंबित क्यों है? प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र शर्मा ने कहा है कि भाजपा मूलतः सामाजिक न्याय विरोधी है, आरक्षण विरोधी है, असलियत यही है कि छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं के इशारे पर ही जन सरोकार के सबसे महत्वपूर्ण 76 प्रतिशत नवीन आरक्षण विधेयक राज भवन में लंबित रखा गया है। सर्वविदित है कि जहां-जहां भाजपा विपक्ष में है वहां वे राजभवन को अपनी पार्टी कार्यालय के रूप में संचालित करते है। भाजपाई नहीं चाहते की छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों को उनका अधिकार मिले।
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