नैना ने जब तीन बरस बाद सुनी अपनों की आवाज, मिला श्रवण यंत्र

श्रवण क्षमता दुर्बल होने के कारण छोड़नी पड़ी पढ़ाई
नैना के मामा ने बताया कि वह कुम्हाररास के पोटाकिबिन आश्रम में अध्ययनरत् थी। कक्षा 6वीं में खेल दौरान चोटिल होने के कारण उसे सुनने में परेशानी होने लगी, सुनने में समस्या के चलते नैना के लिए शब्दों को समझना बड़ी चुनौती रही, अक्षरों को पढ़ने में तो उसे कोई समस्या नहीं होती किन्तु उच्चारण समझ ना पाने के कारण उसे कक्षा में पढ़ाए पाठ स्मरण नहीं रहते। समय के साथ उसे अच्छे से बोलने और सुनने में परेशानी बढ़ने लगी, कम उम्र में ही सुनने में असक्षम हो जाने से वह बहुत ही नाखुश रहा करती थी और उसने अपने आगे की पढ़ाई कि उम्मीद पुरी तरह से छोड़ दी। बड़ी मुश्किल से 7 वीं एवं 8वीं कक्षा तक पढ़ाई पूर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़ घर के कामों में हाथ बटाने लगी।
जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र व समाज कल्याण विभाग से मिला सहयोग
जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के सुकमा फिल्ड कॉडिनेटर ने नैना नाग का जानकारी गोंगला के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से प्राप्त किया और उनके परिवार वाले की सहमति से जिला दिव्यांग पुनर्वास के तहत दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया गया। नैना को 40 प्रतिशत दिव्यांगता है। तत्पश्चात् समाज कल्याण विभाग और जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र सुकमा के द्वारा विगत 3 दिसम्बर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर नैना को श्रवणयंत्र प्रदान किया गया। श्रवणयंत्र की सहायता से वह सुनने में सक्षम हो गयी है और अभी वर्तमान में वह आगे पढ़ाई पूरी कर एक सुनहरा भविष्य गढ़ने की कामना करती है।





