वक्फ का मतलब क्या होता है? भारत में इसकी शुरुआत कब हुई थी

मोहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक से जुड़ा है इतिहास
अंजनी कुमार , वरिष्ठ पत्रकार
बुद्धवार को तमाम विरोध के बीच संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लोकसभा में पेश कर दिया. इससे पहले संसदीय समिति जिसमें करीब 14 संशोधन जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी ने स्वीकार कर लिए. संशोधित बिल को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी .
यहां यह भी जानना आवश्यक हो जाता है कि आखिर वक्फ का भारत में पदार्पण कब हुआ
तो इस्लाम के भारत आने के साथ ही भारत में वक्फ की आमद मानी जा सकती है, हालांकि इतिहास इसे लेकर बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है कि वह किस कालखंड में इसकी शुरुआत बताए.
ऐसे में यह भी तय करना इतिहास के लिए मुश्किल ही है, वक्फ को औपचारिक रूप से लागू करने वाला ' पहला शासक ' कौन रहा होगा. ये सवाल ठीक ऐसा ही है, जैसा कि यह जानने की कोशिश कि वक्फ की शुरुआत कब हुई . ..
तमाम विरोध के बीच संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लोकसभा में पेश कर दिया. इससे पहले संसदीय समिति (जेपीसी ) में कुल 44 संशोधन धन जगदम्बिका पाल की अगुआई वाली जेपीसी ने स्वीकार कर लिया . यह तो आप सभी जानते ही हैं कि कुछ जरूरी सवाल जो वक्फ बोर्ड से जुड़े हुए हैं अगर इनके माकूल जबाब मिल जाते हैं तो वे वक्फ के इतिहास तक का सफ़र हमें करा सकते हैं .
वक्फ अरबी भाषा से निकला शब्द है, जिसका ओरिजिन 'वकुफा' शब्द से हुआ है
..आखिर वक्फ है क्या ? इसे यहां जानना आवश्यक हो जाता है .तो वक्फ अरबी भाषा से निकला शब्द है, जिसका ओरिजिन 'वकुफा' शब्द से हुआ है. वकुफा का अर्थ होता है ठहरना, रोकना. इसी से बना वक्फ, जिसका अर्थ उस संपत्ति से है, जो जन-कल्याण के लिए हो. यह एक तरीके का 'दान' जैसा ही होता है और इसका दानदाता चल या अचल संपत्ति दान कर सकता है. जन कल्याण के लिए जो जन कल्याण के लिए जो भी दान कर दिया जाए, उसे संरक्षित करना ही वक्फ है. अब इसमें घर, खेत, जमीन-मैदान ही शामिल नहीं है, बल्कि पंखा, कूलर, साइकिल, टीवी-फ्रिज भी आ सकते हैं .
शर्त यही है कि, इसे जनकल्याण की मकसद से दान किया गया हो. जो ये दान देते हैं, ऐसे दानदाता को ‘वाकिफ’ कहा जाता है. वाकिफ ये भी तय कर सकता है कि जो दान दिया गया है . उसका या उससे होने वाली आमदनी का इस्तेमाल कैसे होगा ?
अगर कोई दानदाता (वाकिफ) यह कहता है कि उसके दिए गए दान से होने वाली कमाई सिर्फ यतीम बच्चों के लिए खर्च होगी, तो ऐसा ही किया जाएगा .
इस्लाम में वक्फ से जुड़ी एक और कहानी
वक्फ को लेकर एक कहानी भी सामने आती है. ऐसा कहा जाता है कि, एक बार खलीफा उमर ने खैबर में एक जमीन हासिल की और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा कि इसका सबसे अच्छा और बेहतरीन प्रयोग कैसे किया जा सकता है ? पैगंबर ने कहा, "इस संपत्ति को रोक लो, इसके बांध लो और इससे होने वाले फायदे को लोगों के काम में लगाओ . उनकी जरूरतों पर खर्च करो. इसे न बेचा जाए, न उपहार में दिया जाए और न ही इसे विरासत में दिया जाए. इस तरह उस जमीन को वक्फ किया गया.
वक्फ बोर्ड : पैगंबर मोहम्मद साहब के समय की ऐसी ही एक घटना
पैगंबर मोहम्मद साहब के समय की ऐसी ही एक घटना और सामने आती है, जब 600 खजूर के पेड़ों के एक बाग को वक्फ किया गया था और इससे होने वाली आमदनी से मदीना के गरीब लोगों की मदद की जाती थी . पैगंबर मोहम्मद साहब के समय की ऐसी ही एक घटना और सामने आती है, जब 600 खजूर के पेड़ों के एक बाग को वक्फ किया गया था और इससे होने वाली आमदनी से मदीना के से मदीना के गरीब लोगों की मदद की जाती थी. ये वक्फ के सबसे पहले उदाहरणों में से एक है. इसी तरह इजिप्ट की राजधानी काहिरा में एक बहुत पुरानी अल अजहर यूनिवर्सिटी है, जिसे अरबी संस्कृति और भाषा की पढ़ाई के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है. ये 10वीं सदी में बनी थी और ये भी एक वक्फ है.
भारत में वक्फ कब आया ?
इस्लाम के भारत आने के साथ ही भारत में वक्फ की आमद मानी जा सकती है, हालांकि इतिहास इसे लेकर बहुत क्लियर नहीं है कि वह किस कालखंड इसकी शुरुआत बताए. ऐसे में यह भी तय करना इतिहास के लिए मुश्किल ही है, वक्फ को औपचारिक रूप से लागू करने वाला 'पहला शासक' कौन रहा होगा. ये सवाल ठीक ऐसा ऐसा ही है, जैसा कि ये जानने की कोशिश करना की 'दान की परंपरा कैसे शुरू हुई.'
मोहम्मद गोरी से मानी जा सकती है शुरुआत
हालांकि एक तथ्य यह है कि वक्फ की संपत्ति की शुरुआत सिर्फ दो गांवों के दान से हुई थी. इन दो गांवों का कनेक्शन मोहम्मद गोरी से जुड़ा है. 12वीं शताब्दी के के आखिर में पृथ्वीराज चौहान से जीतने के बाद मोहम्मद गौरी ने सैन्य ताकत और इस्लामिक संस्थानों को बढ़ाकर अपनी सत्ता मजबूत करने की कोशिश की थी. मोहम्मद मोहम्मद गौरी ने मुसलमानों की शिक्षा और उनकी इबादत के लिए मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान में दिए थे. भारत में इसको वक्फ के पहले उदाहरण में से एक माना जाता है .
यह भी कहते हैं कि भारतीय रेलवे और भारतीय सेना के बाद, वक्फ बोर्ड भारत में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार हैं. इसकी शुरुआत 12वीं सदी के अंत में अविभाजित भारत के पंजाब के मुल्तान में हुई, और दिल्ली में राज करने वाले सुल्तानों के शासनकाल में यह फैली.
वक्फ इस्लामी परंपरा का हिस्सा था और यह भारत में मुस्लिम शासकों के शासनकाल में धीरे-धीरे प्रचलन में आया
वक्फ इस्लामी परंपरा का हिस्सा था . और यह भारत में मुस्लिम शासकों के शासनकाल में धीरे-धीरे प्रचलन में आया. अब अगर समय के पहिए के साथ पीछे की ओर सफर करते हुए चलें तो मिलता है कि इस्लाम के साथ 7वीं शताब्दी में अरब व्यापारियों के कदम जब दक्षिण भारत (खासकर मालाबार क्षेत्र) में पड़े तो उन्हीं के कंधों पर 'वक्फ' ने भी भारतीय जमीन पर कदम रखा, लेकिन इसे शासकीय स्तर पर लागू करने की बात की जाए तो पहला जिक्र दिल्ली सल्तनत के शासकों को दिया जा सकता है. दिल्ली सल्तनत की शुरुआत 13वीं शताब्दी से हुई थी.





