छत्तीसगढ़

बड़ी दूर से आए हैं विकास का तोहफा लाए हैं...

admin3
23 May 2025 11:35 AM IST
बड़ी दूर से आए हैं विकास का तोहफा लाए हैं...
x
ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
वैसे तो पिछले डेढ़ साल के शासनकाल में विष्णुदेव सरकार ने कई उपलब्धियां हासिल की है। सीधे जनता के साथ जनता के लिए काम करने की छवि वाली विष्णुदेव सरकार ने बस्तर क्षेत्र की जनता से जुड़ाव और विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पहले एक डेढ़ साल के कार्यकाल में जो सक्रियता दिखाई है, उसने पिछले सभी मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ दिया है। बस्तर दौरे की संख्या में विष्णुदेव साय ने अब तक के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक साल में ही 31 दौरे किए हैं, जबकि उनके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री इतने कम समय में इतने बार बस्तर नहीं पहुंच पाए। इस पहल ने न केवल क्षेत्रीय विकास को गति दी है, बल्कि बस्तर के लोगों के साथ मुख्यमंत्री के गहरे संपर्क को भी दर्शाया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि बस्तर के 12 स्थानीय विधायकों को वहां की राजनीति की पकड़ अच्छी है, अब तक के सरकारों में विधायक को अधिकारियों ने जो बता दिया उसे ही सच माना जाता था, लेकिन सीएम ने बस्तर के विकास को करीब से देखने और जानने के लिए बस्तर औऱ सरगुजा पर फोकस किया है। क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव में यहीं वोटर सरकार बनाएंगे इसलिए सीएम ने दो केंद्र बनाए है जिस पर वो काम कर रहे है। ये विष्णु के सुशासन का एक हिस्सा है। इसे राजनीतिक चश्में से नहीं देखें। बार-बार सीएम का इन क्षेत्रों में जाने से वहां विकास की गंगा बहने लगी है। जब भी जा रहे तब तोहफा देकर ही लौट रहे हैं। लोगों की जुबान पर एक ही धुन हैं, बड़ी दूर से आए हैं विकास को तोहफा लेकर आए हैं।
पुलिस विभाग पर शनि की नाराजगी
छुट्टी की समस्या से जूझते पुलिस कर्मियों को एक और झटका लगा है। शनिवार को मिलने वाली छुट्टी को समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निराकरण का हवाला देते हुए अनिश्चितकालीन के लिए रद्द कर दिया गया है। डीजीपी के निर्देशों का हवाला देते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) की ओर से जारी इस पत्र की पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खासी चर्चा है। जारी इस पत्र में कहा गया है कि कार्यालयीन कार्यों की महत्ता एवं संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए समय सीमा में प्रकरणों का निराकरण करना आवश्यक है। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक ने शनिवार के दिन भी पुलिस मुख्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक शासकीय कार्यों के निवर्हन के लिए निर्देशित किया गया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि हर थाने में महादेव का मंदिर बनाने के बाद भी पुलिसवालों को कृपा नहीं मिल पा रहा है। कुछ पुलिस वाले तो ज्योतिष के पास भी ग्रहदशा और आने वाले संकटों के निपटने के लिए तक मांगे है। खबरदारों की माने तो थाने में एक छोटा सा शनिदेव का मंदिर भी स्थापित कर लें ताकि बने की कृपा से महादशा से बच सके।
टेबल देवता को प्रसन्न करने अनेखा प्रदर्शन
बस्तर के अधिकारियों की कार्यशैली आदिवासियों के लिए किसी देवता से कम नहीं है। बिना बलि के कोई सुनवाई नहीं करते है। ताजा मामला चित्रकोट पर्यटन स्थल के पार्किंग नाका को लोहंडीगुड़ा एसडीएम द्वारा सील किए जाने के विवाद को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की अगुवाई में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने लोहंडीगुड़ा एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेस का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दीपक बैज हाथों में मुर्गा और बियर की बोतल लेकर नजर आए, वहीं अन्य कार्यकर्ता अपने साथ बकरा लेकर विरोध जताने पहुंचे। जनता में खसुर-फुसुर है कि सरकारी दफ्तरों में विराजमान टेबल देवता आमजनता का कोई भी सरकारी कामकाज बिना बलि के नहीं करते। इसलिए कांग्रेसियों ने प्रतिकात्मक भोज के साथ प्रदर्शन कर यह संदेश दिया है कि बस्तर में कोई भी काम कराना है तो ये तीनों चाजं चढ़ावा में लाना पड़ेगा । नहीं तो टेबल देवता प्रसन्न नहीं होंगे।
तारीख पर तारीख का खेल नहीं खेलें
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों से कहा कि वे जनता के सेवक हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से फील्ड का दौरा करें, जनता के सुख-दुख में शामिल हों और शिकायतों के निपटारे में पेशियों की अनावश्यक तारीखें देना बंद करें। उन्होंने कहा कि राजस्व से संबंधित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अवैध रेत खनन के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि आदेश तो सरकार के बहुत आते है पर करते तो अपने मन की है। इसी क्रम को तोडऩे के लिए सीएम अधिकारियों को नसीहत दी है कि अधिकारी शासक बनकर नहीं सेवक बनकर काम करें नहीं तो सस्पेंडिंग आर्डर तैयार पड़ा है सिर्फ नाम ही लिखना है।
न्याय करो सरकार...
सिर्फ चार मिनट की देरी के चलते तीन छात्राओं का एक साल बर्बाद हो गया। प्री बीएड परीक्षा देने पहुंची युवतियों को परीक्षा केंद्र के गेट पर ही रोक दिया गय। परीक्षा से वंचित छात्राओं ने रोते हुए न्याय की मांग की है। इन परीक्षार्थियों का कहना है कि 15 मिनट तक का समय रहता है। क्या मानवता के नाम पर कुछ लचीलापन नहीं दिखाया जा सकता था? पूरा मामला कांकेर का है। कांकेर की रमिता कोमा अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाने के लिए गई थी, इसी वजह से परीक्षा केंद्र पहुंचने में देरी हुई। भावुक रमिता ने बताया कि अब उन्हें एक साल और इंतजार करना पड़ेगा क्या घड़ी समय की सुई से मानवीयता की कीमत तय होगी? जनता में खुसुर-फुसुर है कि ये साधारण परीक्षार्थी है यदि वीवीआईपी परीक्षार्थी होते है परीक्षा केंद्र घर पहुंच जाता। ये कैसा सुशासन है जो आमजनता के साथ अन्याय का कहर बनकर टूटता है। सरकार को इस मामले में पुनर्विचार कर उन परीक्षार्थियों परिस्थिति पर भी गौर फरमाना चाहिए।
Next Story
null