छत्तीसगढ़

साय सरकार में महिला सशक्तिकरण की लहर

Nil dhankar
17 April 2026 1:59 PM IST
साय सरकार में महिला सशक्तिकरण की लहर
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में साय सरकार के गठन के बाद से महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी जा रही है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाएं अब जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं, जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब आंकड़ों में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी गौरव वर्ष महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का व्यापक अभियान है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बजट में महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपए, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपए तथा कुपोषण मुक्ति व पोषण अभियान के लिए 235 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश है।

राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। 10 मार्च 2024 को प्रारंभ इस योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार रुपए की सहायता मिल रही है। अब तक 26 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 881 करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में अंतरित की जा चुकी है, वहीं इस योजना के लिए 8 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी, जिसके लिए 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। राज्य में महिलाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 368 सदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है और 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। साथ ही 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच और मजबूत होगी।

मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत 3 लाख 73 हजार से अधिक पंजीयन दर्ज किए गए हैं तथा 235 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष 2023-24 में जहां 1 लाख 75 हजार से अधिक पंजीकरण हुए, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 19 हजार से अधिक हो गई। वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2 लाख 4 हजार से अधिक पंजीयन हो चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का 93 प्रतिशत से अधिक है। पोषण अभियान में भी राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पोषण माह 2024 के दौरान प्रति केंद्र प्रदर्शन में प्रदेश को प्रथम स्थान तथा कुल गतिविधियों में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। वहीं न्योता भोज जैसे नवाचारों के तहत 9 हजार 700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 1 लाख 83 हजार से अधिक बच्चों को लाभ मिला।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट जैसे कार्यों से जोड़ा जा रहा है तथा लखपति दीदी योजना के माध्यम से उन्हें व्यवसायिक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 38 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, जिससे उन्हें स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 27 से बढ़ाकर 34 कर दी गई है, जहां 14 हजार 300 से अधिक प्रकरणों में से 8 हजार 900 से अधिक का निराकरण किया जा चुका है। स्पष्ट है कि “महतारी गौरव वर्ष” केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि ठोस परिणाम देने वाला अभियान है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाएं अब विकास की धुरी बनकर उभर रही हैं और राज्य को नई दिशा दे रही हैं।

किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जाती है जब उसकी महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने लगें। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पहल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह योजना आज लाखों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, आर्थिक संबल और नई उम्मीदों का संचार कर रही है।

महतारी वंदन योजना केवल हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सपनों को पंख देने, उनके आत्मसम्मान को मजबूत करने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बन गई है। प्रदेश के गांव-गांव से ऐसी प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि छोटे-छोटे आर्थिक सहयोग से भी बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर अपने जीवन में आए बदलाव साझा किए। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी की अनीता साहू ने बताया कि पहले आर्थिक कठिनाइयों के कारण परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन योजना से मिली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और “अनीता सिलाई सेंटर” शुरू किया। आज वे सिलाई, खेती और मजदूरी के माध्यम से अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं। उनका यह सफर संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक कहानी बन गया है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की मिथलेश चतुर्वेदी ने भी अपने जीवन का भावुक अनुभव साझा किया। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल दिया और उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया रास्ता चुना। आज वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में आत्मनिर्भर महिला की पहचान बना चुकी हैं।

कोरिया जिले की ग्राम डुमरिया निवासी बाबी राजवाड़े बताती हैं कि खेती-किसानी में मिलने वाली मासिक राशि उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। वहीं ग्राम आमापारा की सुंदरी पैकरा इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं, जिससे उनके बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

भरतपुर विकासखंड के ग्राम चांटी की सविता सिंह की कहानी इस योजना की सार्थकता को और मजबूत करती है। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। आज वे गांव में कपड़ों की सिलाई कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च स्वयं उठा रही हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।

महतारी वंदन योजना का व्यापक प्रभाव प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहा है। लगभग 69 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है और अब तक 25 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 237 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जा चुकी है। यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रहा है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को केवल सहायता नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। महिलाएं इस राशि से छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई में निवेश कर रही हैं, खेती-किसानी को मजबूत बना रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे परिवार, समाज और राज्य—तीनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

महिलाओं का कहना है कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने की ताकत दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में नई उम्मीद और नया आत्मविश्वास लेकर आई है।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है। निश्चित रूप से महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए आत्मसम्मान, सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की नई सुबह साबित हो रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।

कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।

एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।

आजीविकामूलक गतिविधियों ने बनाई लखपति दीदी

इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।

जीवन में आया बड़ा बदलाव, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ

लखपति दीदी सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं।

महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पहरनादादर की रहने वाली बिसाहिन कभी केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थीं। बारिश पर निर्भरता के कारण उत्पादन कम होती थी, जिसके कारण बिसाहिन के परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। सीमित संसाधन और अनिश्चित आय के कारण जीवन संघर्षपूर्ण था, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत शुरू हुई कृषि तालाब निर्माण योजना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। शासन द्वारा तालाब निर्माण के लिए 2 लाख 74 हजार 999 की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से 2 लाख 49 हजार रुपए 613 की लागत से एक सुंदर सीढ़ीनुमा कृषि डबरी का निर्माण किया गया। यह तालाब जल संचयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन गया। लगभग 20×20 मीटर की यह डबरी करीब 894 घन मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता रखती है, जो सूखे के समय में भी उनके लिए वरदान साबित हो रही है।

बिसाहिन बताती है कि डबरी में पानी भरते ही उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन की शुरुआत की। पहले जहां वे केवल एक फसल पर निर्भर थीं, अब वे मछली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने लगी हैं। इस नई पहल से उनकी सालाना आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही अब वे निजी जल स्रोत होने के कारण रबी की फसलें और सब्जियों की खेती भी आसानी से कर पा रही हैं।

बिसाहिन बताती है कि एक ओर जहां यह सिंचाई का स्थायी साधन बनी, वहीं दूसरी ओर मछली पालन से उन्हें दोहरी आय प्राप्त होने लगी है। इसके साथ ही इससे जुड़ी गतिविधियों जैसे चारा बनाना और जाल बुनना, गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर लेकर आई हैं। बिसाहिन जय सतनाम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं, जिसका संचालन लोकोस ऐप के माध्यम से किया जाता है। इस समूह से जुड़कर उन्हें कम ब्याज पर ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने मछली बीज और चारा खरीदा। समूह के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और सामूहिक विकास का रास्ता भी खुला। अब समूह की अन्य महिलाएं भी बिसाहिन से प्रेरित होकर तालाब के किनारे बड़ी निर्माण और सब्जी उत्पादन जैसे छोटे उद्यम शुरू करने की योजना बना रही हैं। आज बिसाहिन एक साधारण किसान से आगे बढ़कर एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनका आत्मविश्वास और मेहनत गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। बिसाहिन खुद कहती हैं कि यह तालाब मेरे लिए केवल एक गड्ढा नहीं, बल्कि मेरे भविष्य की उम्मीद है। अब मुझे पानी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और मछलियों ने मेरी आय दोगुनी कर दी है।

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