छत्तीसगढ़

फर्जी 8वीं की मार्कशीट से 7 साल की नौकरी वार्ड बॉय बर्खास्त

Shantanu Roy
2 Sept 2026 11:49 PM IST
फर्जी 8वीं की मार्कशीट से 7 साल की नौकरी वार्ड बॉय बर्खास्त
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छग
Bilaspur. बिलासपुर। गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल में फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी करने का मामला सामने आया है। यहां वार्ड बॉय के पद पर नियुक्त महावीर साहू की आठवीं कक्षा की अंकसूची जांच में फर्जी पाई गई। इसी अंकसूची के आधार पर उसे नौकरी मिली थी और वह करीब सात साल तक सेवा करता रहा। मामले की जांच पूरी होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अब वसूली सहित अन्य कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक महावीर साहू की नियुक्ति के बाद उसके प्रमाण पत्र और अंकसूची को लेकर तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण के पास शिकायत पहुंची थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि कॉलेज प्रबंधन ने नियुक्ति के दौरान नियमों का पालन नहीं किया और उम्मीदवार के दस्तावेजों का उचित सत्यापन किए बिना ही उसे नौकरी दे दी गई। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने एक समिति गठित कर महावीर साहू की नियुक्ति में लगाए गए दस्तावेजों की जांच शुरू कराई। समिति ने अंकसूची और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया तो आठवीं कक्षा की मार्कशीट को लेकर गड़बड़ी सामने आई। जांच में पता चला कि महावीर साहू ने नौकरी हासिल करने के लिए वर्ष 2008 की आठवीं कक्षा की अंकसूची प्रस्तुत की थी। इसमें रोल नंबर 26987 दर्ज था। अंकसूची में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला हसौद विकासखंड जैजैपुर का नाम स्कूल के रूप में दर्ज किया गया था।

विभाग ने जब संबंधित स्कूल से अंकसूची का सत्यापन कराया तो स्कूल प्रबंधन ने इसे फर्जी बताया। इसके बाद विभागीय जांच आगे बढ़ाई गई। बताया जा रहा है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद वार्ड बॉय ने अपनी गलती भी स्वीकार कर ली। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 14 के तहत कार्रवाई की। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर्मचारी को एक महीने का नोटिस दिया गया। नोटिस की अवधि और आवश्यक विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद महावीर साहू को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद कॉलेज में नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नौकरी के लिए आठवीं की अंकसूची जरूरी थी।

नियुक्ति से पहले दस्तावेज का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया। अगर भर्ती के समय ही संबंधित स्कूल से मार्कशीट की जांच करा ली जाती तो फर्जीवाड़ा पहले ही सामने आ सकता था। करीब सात साल तक फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी किए जाने से उस समय नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों की जांच में हुई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज के डीन डॉ. जीआर चतुर्वेदी ने माना कि दस्तावेजों की जांच पहले ही होनी चाहिए थी और पूर्व के अधिकारियों को इस संबंध में उचित कार्रवाई करनी थी। उन्होंने बताया कि विभागीय जांच में वास्तविकता सामने आने के बाद कर्मचारी को नोटिस दिया गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन अब महावीर साहू से वसूली सहित अन्य संभावित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को पत्र भेज रहा है। सरकार के निर्देश के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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