छत्तीसगढ़

विष्णुदेव ने कचरे को सोना मनवाया, इस्तेमाल कर बनवाई सड़क, सरपट दौड़ रही गाड़ियां

Nilmani Pal
30 Jun 2025 11:45 AM IST
विष्णुदेव ने कचरे को सोना मनवाया, इस्तेमाल कर बनवाई सड़क, सरपट दौड़ रही गाड़ियां
x

बस्तर। नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में नवाचार की नई राह चल पड़ी है। यहां प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाई गई है, जिसमें गाड़ियां दौड़ने भी लगी है। बता दें कि बस्तर के जगदलपुर स्थित ग्राम कलागुड़ा में प्लास्टिक कचरे से 1 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया गया है। इस पर प्रदेश के मुखिया सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी भी दी है।

सीएम साय ने प्लास्टिक कचरे से बनी सड़क के बारे में X पर पोस्ट कर लिखा, ‘प्लास्टिक कचरे से बनी सड़क – बस्तर में नवाचार की नई राह’.. छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार नवाचार के नए प्रतिमान गढ़ रही है। बस्तर के जगदलपुर स्थित ग्राम कलागुड़ा में प्लास्टिक कचरे से 1 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया गया है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सतत विकास की सोच को भी साकार करती है। सड़क की विशेषता यह है कि इसके टॉप लेयर पर प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यह पारंपरिक डामर की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होगी। यह सड़क सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) रोड की तरह बारिश में क्षतिग्रस्त नहीं होगी और इसकी लाइफ भी ज्यादा होगी।

बस्तर का चेहरा बदल रहा

जो कभी बंदूक और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, आज वहाँ मोबाइल टावर खड़े हो रहे हैं, जो सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि विकास और विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं. मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सरकार द्वारा विगत डेढ़ वर्ष में 64 नए फॉरवर्ड सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है. इन सुरक्षा चौकियों के आसपास गांवों में न केवल पुलिस की उपस्थिति से सुरक्षा की भावना बनी है, बल्कि इन इलाकों में अब नेटवर्क भी पहुंच गया है. सरकार ने अब तक कुल 671 मोबाइल टावर चालू कर दिए हैं, जिनमें से 365 टावरों में 4G सेवा उपलब्ध है. यह न सिर्फ तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह संकेत है कि अब आदिवासी क्षेत्रों में संचार क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।

बस्तर में सिर्फ मोबाइल टावर नहीं लग रहे हैं, बल्कि ये टावर इस बात का सबूत हैं कि वहां के बच्चे और युवा भी अब डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं. पहले जहां बच्चों को पढ़ाई या नौकरी की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता था, अब वही काम वे अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए ऑनलाइन कर पा रहे हैं. अब बस्तर का युवा भी स्मार्टफोन से अपनी दुनिया खुद बना रहा है. सुरक्षा कैंपों के इर्द-गिर्द बसते गांवों में अब बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुँच रही हैं. नियद नेल्लानार योजना के तहत चिन्हित 146 ग्रामों में 18 सामुदायिक सेवाएं और 25 तरह की सरकारी योजनाएं एक साथ क्रियान्वित की जा रही हैं।

सुशासन तिहार के तहत अब तक सैकड़ों समाधान शिविर आयोजित किए गए हैं, जहां सांसद से लेकर विधायक तक गांव गांव पहुंचकर जनता की शिकायतों का समाधान किया. इन शिविरों में ग्रामीणों को राशन कार्ड, आधार, पेंशन, स्वास्थ्य परीक्षण, स्कूल प्रवेश, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला गैस जैसी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर दिया गया है. मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए की जा रही योजनाओं और नवाचारों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संकट से निपटने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है, और जनभागीदारी से लेकर तकनीकी उपायों तक, हर स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

Next Story
null