छत्तीसगढ़

कंधे पर बच्चे और खाट पर मरीज नाला पार करने को मजबूर ग्रामीण

Shantanu Roy
5 Sept 2026 9:31 PM IST
कंधे पर बच्चे और खाट पर मरीज नाला पार करने को मजबूर ग्रामीण
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Kanker. कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल ब्लॉक के सोनपाल गांव में ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव तक सड़क पहुंचने के बावजूद रास्ते में पड़ने वाले नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। करीब 80 साल पुरानी यह समस्या अब भी बनी हुई है और ग्रामीणों को तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ जाने से ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। हाल ही में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में ग्रामीण बच्चों को कंधे और पीठ पर बैठाकर नाला पार कराते नजर आए, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।
बच्चों और मरीजों के लिए सबसे बड़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नाला उफान पर आ जाता है। ऐसे समय में स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अभिभावक मजबूरी में उन्हें कंधे या पीठ पर बैठाकर तेज बहाव के बीच से निकालते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई बार मरीजों को भी खाट पर लिटाकर नाले के दूसरी ओर ले जाना पड़ता है। राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए भी लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही या पैर फिसलने से बड़ा हादसा हो सकता है।
लंबे समय से उठ रही पुलिया निर्माण की मांग
ग्रामीण सानू राम दुग्गा ने बताया कि नाले पर पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई बार जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बुजुर्ग पुलिया निर्माण की मांग करते-करते दुनिया से चले गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि बरसात आते ही हर साल वही परेशानी दोहराई जाती है।
1.07 करोड़ की सड़क बनी लेकिन अधूरा रह गया काम
ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन साल पहले गांव तक पहुंचने के लिए 1 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से 2.30 किलोमीटर लंबी डामर सड़क का निर्माण कराया गया था। सड़क बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब आवागमन आसान हो जाएगा। लेकिन सड़क के बीच आने वाले नाले पर पुलिया नहीं बनने से समस्या खत्म नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ ही पुलिया का निर्माण भी होना चाहिए था। पुलिया के अभाव में बारिश के समय सड़क का उपयोग प्रभावित हो जाता है और लोग फिर पुराने जोखिम भरे रास्ते पर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने जल्द समाधान की मांग की
ग्रामीण राजेश्वरी पटेल ने बताया कि बारिश के दौरान नाला पूरी तरह भर जाता है और छोटे बच्चों को पार कराना बेहद खतरनाक होता है। इसके बावजूद स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसलिए अभिभावक मजबूरी में उन्हें कंधे पर बैठाकर ले जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नाले पर पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दिनों में लोगों को परेशानी और खतरे का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि सड़क और पुलिया दोनों सुविधाएं मिलने के बाद ही गांव का वास्तविक विकास संभव होगा।
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