छत्तीसगढ़

खेतों और दलदल से शव ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण

Shantanu Roy
8 Aug 2026 11:01 PM IST
खेतों और दलदल से शव ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण
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छग
Baloda Bazar. बलौदाबाजार। जिले के करही बाजार चौकी क्षेत्र के ग्राम लालपुर से ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करने वाली तस्वीर सामने आई है। गांव में श्मशान घाट तक पहुंचने वाला पारंपरिक रास्ता कथित अतिक्रमण की चपेट में होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव खेतों और दलदल के बीच से ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। करीब एक किलोमीटर तक ग्रामीणों ने शव को कंधे पर उठाकर नदी किनारे स्थित श्मशान घाट तक पहुंचाया। इस दौरान उन्हें फसल और कीचड़ भरे खेतों से होकर गुजरना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, ग्राम लालपुर निवासी बृहस्पति यादव का प्रसव के करीब 12 दिन बाद गुरुवार को निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही परिवार के लोग, रिश्तेदार और ग्रामीण अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। परिजन शव लेकर श्मशान घाट की ओर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में उन्हें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। श्मशान घाट तक पहुंचने वाला पारंपरिक रास्ता बंद होने के कारण अंतिम यात्रा को आगे ले जाने का सीधा मार्ग उपलब्ध नहीं था।
ऐसी स्थिति में ग्रामीणों ने मजबूरी में खेतों के बीच से होकर जाने का फैसला किया। कई ग्रामीणों ने शव को कंधे पर उठाया और करीब एक किलोमीटर तक खेतों और दलदली रास्ते से होते हुए नदी किनारे स्थित श्मशान घाट तक पहुंचे। बारिश के मौसम में खेतों में पानी और कीचड़ होने के कारण रास्ता और भी मुश्किल था। फसल के बीच से शव लेकर गुजरते ग्रामीणों की तस्वीर सामने आने के बाद गांव में मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
लंबे समय से रास्ते की समस्या का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक पहुंचने के रास्ते की समस्या आज की नहीं है। आरोप है कि रास्ते के हिस्से पर लंबे समय से अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक इस संबंध में प्रशासन को कई बार जानकारी दी गई और रास्ता खुलवाने के लिए आवेदन भी किए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार पहले ही दुख और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते की समस्या परिजनों की परेशानी और बढ़ा देती है। सामान्य परिस्थितियों में जिस अंतिम यात्रा को गांव के निर्धारित रास्ते से श्मशान घाट तक पहुंचना चाहिए, उसे खेतों और दलदल से होकर ले जाना पड़ता है।
बारिश में और बढ़ जाती है परेशानी
बारिश के मौसम में ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। खेतों में पानी भरने और मिट्टी दलदली होने के कारण पैदल चलना भी कठिन हो जाता है। ऐसे में शव को कंधे पर उठाकर खेतों के बीच से ले जाना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रास्ते की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले समय में किसी भी आपात स्थिति में लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट तक पहुंचने वाले पारंपरिक रास्ते की स्थिति की तत्काल जांच कराई जाए। यदि रास्ते पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे मुक्त कराया जाए। साथ ही श्मशान घाट तक स्थायी और सुगम मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में भी ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो।
हर अंतिम यात्रा में परेशानी का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते की समस्या बार-बार सामने आती है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे गांव से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी और आवश्यक व्यवस्था के लिए भी ग्रामीणों को खेतों के बीच से गुजरना पड़े, यह प्रशासनिक स्तर पर ध्यान दिए जाने वाला विषय है। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई है, लेकिन अब तक ऐसा समाधान नहीं हुआ जिससे भविष्य में इस तरह की परेशानी पूरी तरह खत्म हो सके। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को समझे और श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए स्पष्ट एवं स्थायी रास्ता उपलब्ध कराए। बृहस्पति यादव की अंतिम यात्रा के दौरान सामने आई यह तस्वीर अब गांव की मूलभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले को केवल शिकायत तक सीमित न रखते हुए जमीन पर स्थायी समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के लिए खेतों और दलदल के बीच से शव ले जाने की मजबूरी न हो।
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