छत्तीसगढ़

रायपुर सेंट्रल जेल से हिस्ट्रीशीटर राजा बैजड़ का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप

Shantanu Roy
16 Oct 2025 6:34 PM IST
रायपुर सेंट्रल जेल से हिस्ट्रीशीटर राजा बैजड़ का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप
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Raipur. रायपुर। राजधानी की सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। रायपुर सेंट्रल जेल की बैरक नंबर-15 से सामने आए एक नए वीडियो ने पूरे जेल तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वीडियो न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण बन गया है कि जेल के भीतर अपराधियों का दबदबा और नेटवर्क किस हद तक सक्रिय है। रायपुर सेंट्रल जेल से सामने आया यह वीडियो छत्तीसगढ़ के जेल प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है।
वैसे भी सेंट्रल जेल पूरे रायपुर में चर्चा का विषय और चर्चित है कि रायपुर सेंट्रल जेल में पैसा दो तो सारी सुविधा उपलब्ध है सिर्फ़ इस बात के लिए ही सेंट्रल जेल रायपुर का हमेशा देश में सुर्ख़ियों में नाम आता है। सेंट्रल जेल में पैसा देने से लड़की छोड़ सभी प्रकार की सुविधा जेल प्रशासन उपलब्ध कराता है। इसका पुख़्ता प्रमाण समय-समय पर क़ैदी जेल से सजा काटकर बाहर निकलते हैं। वे संवाददाताओं के सामने वीडियो के सामने प्रकट करते हुए पाए गए है। जेल में पैसा देने से तड़के वाला खाना, गांजा, सट्टा, जुआ, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, गुटका, मोबाइल जैसे सभी चीज़ों को उपयोग करने दिया जाता है। सभी प्रकार के मनोरंजन की वस्तु आसानी से उपलब्ध हो जाती है। आज जिस केदी के पास पैसा नहीं है और केदी ने पैसे को अंदर तक बराबर नहीं पहुंचाया उसको एक मिर्ची और एक प्याज़ भी नहीं दिया जाता है। साधारण कैदियों को उबली हुई दाल और बिना नमक मिर्च की सब्ज़ी, पतली चाय बिना दूध वाली दी जाती है। जबकि जेल मैनुअल के हिसाब से खाने का भी मेन्यू संतुलित आहार पौष्टिक आहार और स्वादिष्ट देने का आदेश है। लेकिन रंगबाज़-तीरंदाज़ माफ़िया और पैसे वाले क़ैदी को ही यह सुविधा मिलती है। ये जानकारी समय-समय पर जेल से बाहर आने वाले क़ैदी मीडिया को अपना नाम नहीं बताने की शर्त में बताते है। लेकिन बड़े अधिकारियों की जांच के बाद सब लीपापोती करते है। जेल के अधिकारियों ने जेल को साफ़ सुथरा और आदर्श जेल के रूप में बताया है लेकिन जांच करने वाले अधिकारी भी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और जो व्यवस्था और सिस्टम बना हुआ है उसके विपरीत अपनी जाँच रिपोर्ट नहीं देते।


जब राजधानी की जेल में कैदी इस तरह खुलेआम मोबाइल चला रहे हों, तो राज्य की अन्य जेलों की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं। यह घटना न केवल जेल सुरक्षा की विफलता है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि अपराधी अब जेल के अंदर भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन इस बार इस शर्मनाक चूक पर कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर किसी और विवाद में दबकर रह जाएगा। इसके जैसा ही एक वीडियो पहले भी वायरल हुआ था जिस पर जेल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।


अपराधियों के गठजोड़ का खुलासा
जेल की बैरक नंबर-15 में रिकॉर्ड हुआ वीडियो जेल के भीतर चल रहे अवैध गठजोड़ और सुविधाओं के दुरुपयोग का पर्दाफाश करता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैदी मोबाइल फोन का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं। वे न केवल वीडियो कॉल कर रहे हैं, बल्कि उसी कॉल को रिकॉर्ड कर बाहर भी भेज रहे हैं। यह दृश्य यह बताने के लिए काफी है कि जेल की ऊंची दीवारों के भीतर भी कानून और नियमों का पालन वैसा नहीं हो रहा जैसा होना चाहिए।





वीडियो में दिखा राजा बैज़ड
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में नजर आने वाला कैदी मोह. रशीद अली उर्फ़ राजा बैज़ड है। वह क्राइम नंबर 317/25 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) में थाना टिकरापारा में दर्ज मामले में आरोपी है। पुलिस ने उसे 11 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और तब से वह रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है।

जेल से ही की वीडियो कॉल, बाहर भेजा वीडियो
मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि वीडियो कॉल जेल के भीतर से ही की गई थी। बताया जा रहा है कि राजा बैज़ड ने अपने एक रिश्तेदार को जेल के अंदर से वीडियो कॉल की और उसी कॉल को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर भेज दिया। यह वीडियो उसके रसूख और जेल के अंदर उसके प्रभाव को दिखाने के उद्देश्य से बनाया गया था।

13 से 15 अक्टूबर के बीच रिकॉर्ड हुआ वीडियो
सूत्रों का कहना है कि यह वीडियो 13 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच रिकॉर्ड किया गया था। यानि घटना बेहद हालिया है और यह दर्शाती है कि सख्त निगरानी के बावजूद जेल के भीतर मोबाइल जैसे प्रतिबंधित साधन कैसे पहुंच रहे हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सोशल मीडिया पर वायरल, प्रशासन में हड़कंप
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जेल मुख्यालय में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत इस पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि जेल के अंदर से वीडियो वायरल होने की सूचना मिलने के बाद कई अधिकारियों को तलब किया गया है।

जेल की साख पर लगा दाग
रायपुर सेंट्रल जेल पहले भी विवादों में रह चुकी है। समय-समय पर यहां से मोबाइल फोन, नशे के पदार्थ और अवैध सामान मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन इस बार का मामला अलग है, क्योंकि इस वीडियो ने जेल के अंदर की असल स्थिति उजागर कर दी है। यह अब केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता के रूप में देखा जा रहा है।

एनडीपीएस आरोपी का जेल में बढ़ा दबदबा
राजा बैज़ड जैसे आरोपियों का जेल में इस तरह से मोबाइल का उपयोग करना यह बताता है कि वह केवल एक आम कैदी नहीं, बल्कि जेल के भीतर भी प्रभावशाली स्थिति रखता है। वीडियो में जिस आत्मविश्वास के साथ वह वीडियो कॉल करता नजर आता है, उससे यह स्पष्ट है कि उसे किसी सजा या अनुशासन का भय नहीं है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना
जेल मुख्यालय ने प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा जा रहा है कि यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन या स्थानांतरण की कार्रवाई की जा सकती है। गृह विभाग ने भी इस पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है। रायपुर सेंट्रल जेल में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कक्ष भी है। बावजूद इसके, कैदी के मोबाइल फोन इस्तेमाल का किसी को पता नहीं चला। यह स्थिति बताती है कि या तो कैमरे निष्क्रिय हैं या फिर कुछ अधिकारी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।

पहले भी मोबाइल बरामद हो चुके हैं
पिछले दो सालों में रायपुर सेंट्रल जेल से कई बार मोबाइल, चार्जर और सिम कार्ड बरामद किए जा चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब इतने बार लापरवाही सामने आ चुकी है तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

जेल सुधारों पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार ने जेलों में सुधार और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की थीं। लेकिन इस ताजा घटना ने उन सुधारों की सफलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल के अंदर अवैध गतिविधियां, मोबाइल और मादक पदार्थों की मौजूदगी यह साबित करती है कि सुधार के प्रयास केवल कागजों पर सीमित हैं।


कैदियों की सुविधाएं बनी चर्चा का विषय
वायरल वीडियो में कैदी जिस सहजता से मोबाइल चला रहा है, वह यह संकेत देता है कि जेल के अंदर कई कैदियों को अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। अब यह जांच का विषय है कि ये सुविधाएं किसकी अनुमति से और किस बदले में मिल रही हैं। इस घटना के बाद नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई है कि जेल के अंदर बढ़ते अपराधी गठजोड़ों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जेल अब अपराध सुधार का नहीं, बल्कि अपराध संचालन का केंद्र बनती जा रही है।

जेल प्रशासन का कोई आधिकारिक बयान नहीं
घटना के खुलासे के बाद भी रायपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। न तो उन्होंने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि की है और न ही यह बताया है कि मामले में कितने कर्मचारी या अधिकारी जांच के दायरे में हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस घटना की जानकारी ली है। गृह विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई के मूड में है। यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है तो जेल विभाग में बड़े फेरबदल की संभावना है।
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