छत्तीसगढ़
गड्ढों से बचने के चक्कर में रांग साइड जा रहे वाहन, मार्ग पर हादसों का खतरा
Shantanu Roy
23 Sept 2026 12:48 PM IST

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छग
Pratappur. प्रतापपुर। अंबिकापुर-प्रतापपुर मुख्य मार्ग पर बकी नदी पुल के आसपास सड़क की बदहाल स्थिति राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अपनी निर्धारित लेन में चलने में दिक्कत हो रही है। कई स्थानों पर गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक अचानक दिशा बदलकर सड़क के दूसरे हिस्से या रांग साइड की ओर चले जाते हैं। इससे सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर की आशंका बनी रहती है। सड़क की खराब स्थिति के कारण इस मार्ग पर दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
गड्ढों से बचने अचानक बदलनी पड़ती है दिशा
बकी नदी पुल के आसपास सड़क पर कई जगह बड़े और छोटे गड्ढे बने हुए हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिमपूर्ण हो जाती है। सामने अचानक गड्ढा आने पर चालक उसे बचाने के लिए वाहन की दिशा बदल देते हैं। इस दौरान कई बार वाहन अपनी लेन से बाहर निकल जाता है। पीछे या सामने से तेज गति में आ रहे वाहनों के कारण हादसे की स्थिति बन सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन चालकों को कई जगह मजबूरी में सड़क के किनारे या रांग साइड की ओर जाना पड़ता है। खासकर पुल के आसपास सड़क की स्थिति खराब होने के कारण वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है। रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है, क्योंकि कम रोशनी में गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
22 सितंबर को भी हुआ हादसा
22 सितंबर को भी बकी नदी पुल के पास सड़क की खराब स्थिति का असर देखने को मिला। अंबिकापुर से वाड्रफनगर की ओर जा रहे दो व्यक्ति सड़क की खराब स्थिति के बीच गिरकर घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने दोनों की मदद की और प्राथमिक उपचार के लिए प्रतापपुर भेजा। इस घटना के बाद एक बार फिर सड़क की स्थिति और उससे जुड़े यातायात जोखिम का मुद्दा सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क के गड्ढों की मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
42 किलोमीटर सड़क के लिए 24.59 करोड़ की स्वीकृति
जानकारी के अनुसार अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग के करीब 42 किलोमीटर हिस्से के डामरीकरण के लिए 24.59 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बावजूद सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे अब भी बने हुए हैं। बारिश का मौसम लगभग समाप्त होने के बाद भी सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। मार्ग से नियमित आवागमन करने वाले लोगों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि स्वीकृत डामरीकरण का काम कब शुरू होगा। लोगों का कहना है कि सड़क के निर्माण या डामरीकरण में देरी के कारण वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर उन हिस्सों में खतरा अधिक है जहां सड़क पर एक साथ कई गड्ढे मौजूद हैं।
बारिश में पानी से छिपे गड्ढे अब धूल बनी परेशानी
बारिश के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में कई बार वाहन चालक पानी से भरे गड्ढों में चले जाते हैं और वाहन का संतुलन बिगड़ने की स्थिति बनती है। अब बारिश कम होने के बाद गड्ढों के आसपास जमा मिट्टी और खराब सड़क से उड़ने वाली धूल लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। अंबिकापुर से प्रतापपुर होते हुए वाड्रफनगर और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर केवल यातायात की रफ्तार पर नहीं पड़ रहा, बल्कि अचानक दिशा बदलने के कारण दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ रहा है।
तत्काल निरीक्षण और मरम्मत की मांग
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से सड़क की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर जरूरी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए और बड़े गड्ढों को जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए। इसके साथ ही स्वीकृत डामरीकरण कार्य भी शीघ्र शुरू कराया जाए, ताकि लंबे समय से जर्जर सड़क से लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत होने से वाहन चालकों को अपनी लेन में सुरक्षित तरीके से चलने में सुविधा मिलेगी और गड्ढों से बचने के लिए अचानक रांग साइड जाने की स्थिति भी कम होगी। इससे धूल और खराब सड़क से होने वाली परेशानी के साथ-साथ दुर्घटना की आशंका को भी कम किया जा सकेगा।
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