छत्तीसगढ़

धर्मांतरण के आरोपों पर बवाल, 18 गांवों के ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट

Shantanu Roy
3 Nov 2026 4:34 PM IST
धर्मांतरण के आरोपों पर बवाल, 18 गांवों के ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट
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Kawardha. कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कथित धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पंडरिया विकासखंड के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी बैगा समाज के लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाते हुए मंगलवार को 18 गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कलेक्टर तुलिका प्रजापति को लिखित आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की है कि कथित धर्मांतरण के मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

जानकारी के अनुसार, पंडरिया के वनांचल क्षेत्रों से आए ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी बैगा समाज के लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र के कई गांवों में इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बैगा समाज की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की परिस्थितियों का फायदा उठाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए।


इस मुद्दे को लेकर 18 गांवों के ग्रामीणों का एक साथ कलेक्ट्रेट पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आवेदन सौंपकर अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों की समस्याओं और शिकायतों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने चर्च संचालन से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि कहीं किसी व्यक्ति को धन, सहायता या अन्य प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित तो नहीं किया जा रहा है। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर किसी चर्च, संस्था या व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की वास्तविकता संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने कलेक्टर तुलिका प्रजापति को सौंपे आवेदन में कथित गतिविधियों की जांच के साथ जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन को वनांचल क्षेत्रों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति का पता लगाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन की शिकायत का समाधान किया जा सके। यह मामला आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के साथ सामाजिक सद्भाव बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल ग्रामीणों ने अपनी मांग प्रशासन के सामने रख दी है। अब इस आवेदन पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।
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