छत्तीसगढ़
कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षिका की धार्मिक आस्था को लेकर हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा
Shantanu Roy
14 Oct 2026 2:29 PM IST

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Sukma. सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा स्थित मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में एक शिक्षिका के धार्मिक पहनावे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शारदीय नवरात्र के दौरान लाल वस्त्र और भवानी माला धारण कर विद्यालय पहुंचीं शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना को कथित तौर पर इस पहनावे में स्कूल आने से मना करने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद हिंदू समाज के लोगों ने विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना पिछले करीब 15 वर्षों से मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान उन्होंने अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार लाल वस्त्र और भवानी माला धारण की थी। आरोप है कि विद्यालय के प्राचार्य ने उनके पहनावे पर आपत्ति जताई और लाल कपड़ों में स्कूल नहीं आने को कहा। शिक्षिका ने इसे अपनी धार्मिक दीक्षा और आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए अपनी बात रखी, लेकिन मामला शांत होने के बजाय विवाद में बदल गया। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम से आहत शिक्षिका ने विद्यालय से इस्तीफा देने की बात कही। उन्होंने संस्था को अपना त्यागपत्र भी सौंप दिया। हालांकि, उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, स्कूल प्रबंधन की ओर से पूरे मामले में क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है।
मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद हिंदू समाज के लोग विद्यालय परिसर पहुंचे और प्राचार्य के कथित व्यवहार का विरोध किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और विद्यालय से जुड़े लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि किसी शिक्षिका की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक पहनावे को लेकर आपत्ति जताए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। विवाद बढ़ने की जानकारी मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी एस.के. दीप और थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। प्रशासन की ओर से मामले को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षिका ने नवरात्र के अवसर पर अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए लाल वस्त्र और भवानी माला धारण की थी। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन की कथित आपत्ति से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि, प्राचार्य पर लगाए गए आरोपों और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदू समाज के लोगों ने विद्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बसंत पंचमी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले पर्व पर विद्यालय में अवकाश रखा जाता है। उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विद्यालय की अवकाश नीति और धार्मिक आयोजनों को लेकर अपनाए जाने वाले नियमों की समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि स्कूल में शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही धार्मिक आधार पर भेदभाव से जुड़ी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय परिसर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित करने की मांग भी रखी।
विवाद के बाद हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने विद्यालय की कार्यप्रणाली और अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। इस संबंध में जिला कलेक्टर के नाम खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में संस्था की कार्यप्रणाली की जांच कराने और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने की मांग की गई है। बताया गया कि मंगलवार शाम को इस मामले को संस्था के उच्च पदाधिकारी फादर के समक्ष रखने और आगे चर्चा करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, इस बातचीत के परिणाम को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस पूरे मामले में शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना का त्यागपत्र, धार्मिक पहनावे को लेकर प्राचार्य की कथित आपत्ति और विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल, विद्यालय प्रबंधन पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। अब शिक्षा विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षिका के पहनावे पर आपत्ति किन परिस्थितियों में जताई गई थी और उनके इस्तीफे पर क्या निर्णय लिया जाता है।
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