छत्तीसगढ़

एम्बुलेंस नहीं मिली तो 20 ग्रामीणों ने 19 किमी खटिया पर ढोकर मरीज को पहुंचाया अस्पताल

Shantanu Roy
25 April 2026 8:38 PM IST
एम्बुलेंस नहीं मिली तो 20 ग्रामीणों ने 19 किमी खटिया पर ढोकर मरीज को पहुंचाया अस्पताल
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Jagdalpur. जगदलपुर। कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा से लगे बीनागुड़ा गांव से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक लकवाग्रस्त युवक को समय पर एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा। भरी गर्मी और कठिन रास्तों के बीच करीब 20 ग्रामीणों ने मरीज को खटिया पर लादकर 19 किलोमीटर तक पैदल सफर तय किया और उसे छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप तक पहुंचाया, जहां से आगे एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया।

जानकारी के अनुसार, बीनागुड़ा गांव के निवासी मर्रो पददा को तीन दिन पहले अचानक लकवा आ गया था। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने 108 एम्बुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन कई बार संपर्क करने के बावजूद कोई मदद नहीं मिल सकी। परिवार के लोग सुबह से एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन सेवा नहीं पहुंची। गांव की स्थिति को देखते हुए आखिरकार स्थानीय लोगों ने खुद ही मरीज को अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। करीब 20 ग्रामीणों ने मिलकर खटिया तैयार की और मरीज को उस पर लिटाकर कंधों पर उठाया। इसके बाद उन्होंने पहाड़ी और पथरीले रास्तों से गुजरते हुए 19 किलोमीटर का लंबा सफर शुरू किया। चिलचिलाती धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार चलते रहे।

काफी मशक्कत के बाद सभी लोग छोटेबेठिया पहुंचे, जहां बीएसएफ कैंप के जवानों ने मदद की। वहां से एम्बुलेंस की व्यवस्था कर मरीज को आगे अस्पताल भेजा गया। इस दौरान मरीज की हालत गंभीर बनी रही। यह घटना एक बार फिर इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाती है। बीनागुड़ा गांव और आसपास के इलाकों में आज भी सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां एम्बुलेंस सेवा अक्सर ठप रहती है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। उन्होंने नियमित एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की भी बात कही है। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और ग्रामीणों की पहल को लोग सराह रहे हैं, जिन्होंने कठिन हालात में मरीज की जान बचाने के लिए खुद जिम्मेदारी उठाई।
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