छत्तीसगढ़

नान घोटाले में दो पूर्व IAS गिरफ्तार, ED को मिली 28 दिन की रिमांड

Shantanu Roy
22 Sept 2025 7:12 PM IST
नान घोटाले में दो पूर्व IAS गिरफ्तार, ED को मिली 28 दिन की रिमांड
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के दो वरिष्ठ और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों—आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा—को गिरफ्तार कर लिया। विशेष अदालत ने दोनों को 28 दिन की रिमांड पर ईडी के हवाले कर दिया है। माना जा रहा है कि इस लंबी अवधि की पूछताछ से घोटाले की कई परतें खुलेंगी और बड़े नामों के भी सामने आने की संभावना है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
सोमवार सुबह पूर्व मुख्य सचिव आलोक शुक्ला विशेष ईडी कोर्ट पहुंचे और सरेंडर आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया और इसके तुरंत बाद ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वहीं, पूर्व सचिव अनिल टुटेजा पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे। ईडी ने उनके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी कर अदालत में पेश किया और फिर औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने दोनों को चार सप्ताह की रिमांड पर सौंपते हुए कहा कि इतने बड़े घोटाले की जटिलता को देखते हुए विस्तृत पूछताछ आवश्यक है।
ईडी की दलील
अदालत में ईडी के वकील सौरभ पांडे ने कहा कि नान घोटाले के समय आलोक शुक्ला निगम के चेयरमैन और अनिल टुटेजा सचिव पद पर थे। इन्हीं के कार्यकाल में करोड़ों रुपए की कमीशनखोरी और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। ईडी के अनुसार, राइस मिलरों से मिलीभगत कर घटिया चावल की खरीद और वितरण किया गया। इसके बदले में करोड़ों रुपए की रिश्वत ली गई। कई अहम दस्तावेज और लेन-देन के प्रमाण मिलने के बाद अब दोनों अफसरों से गहन पूछताछ जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जमानत याचिका खारिज
दोनों अधिकारियों को पहले हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच—जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा—ने हाल ही में इस जमानत को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि दोनों अफसर पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी में और अगले दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहेंगे। इसके बाद ही उन्हें जमानत का हक मिलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों ने 2015 में दर्ज नान घोटाले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के तुरंत बाद 18 सितंबर को ईडी की टीम ने आलोक शुक्ला के भिलाई स्थित घर पर दबिश दी थी। उस समय वे सरेंडर करने कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन आदेश अपलोड न होने के कारण कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद 19 सितंबर को मामले की सुनवाई 22 सितंबर तक टाल दी गई थी।
भूपेश सरकार में पॉवरफुल पोस्टिंग
गौरतलब है कि नान घोटाले का खुलासा जब हुआ था, उस समय आलोक शुक्ला खाद्य विभाग के सचिव थे। 2018 में EOW (आर्थिक अपराध शाखा) ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 2019 में हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में पॉवरफुल पोस्टिंग मिली। इस दौरान आरोप लगा कि दोनों ने जांच को प्रभावित किया और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की। इसी मामले में राज्य के पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ भी ईडी ने एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
आखिर क्या है नान घोटाला?
फरवरी 2015 में यह घोटाला सामने आया था, जब ACB/EOW ने नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे।
छापे के दौरान 3.64 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए।
चावल और नमक के नमूनों की जांच में पाया गया कि वे मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त और घटिया गुणवत्ता के थे।
आरोप था कि राइस मिलों से घटिया चावल लेकर निगम अधिकारियों ने करोड़ों रुपए की रिश्वत ली।
भंडारण और परिवहन में भी भारी भ्रष्टाचार हुआ।
शुरुआत में निगम के महाप्रबंधक शिवशंकर भट्ट सहित 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। धीरे-धीरे जांच में तत्कालीन चेयरमैन, एमडी और दो वरिष्ठ आईएएस अफसरों के नाम भी जुड़ गए।
अब आगे क्या होगा?
ईडी को मिली 28 दिन की रिमांड के दौरान दोनों अफसरों से लगातार पूछताछ होगी।
उनके बैंक खातों की जांच होगी।
कथित फर्जी कंपनियों और उनके जरिए किए गए लेन-देन का पता लगाया जाएगा।
वित्तीय दस्तावेजों के क्रॉस-चेक किए जाएंगे।
यह भी जांच होगी कि घोटाले के पैसे को कहां-कहां निवेश किया गया।
ईडी अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ से न केवल दोनों अफसरों की भूमिका साफ होगी, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और बड़े नेटवर्क के बारे में भी अहम जानकारी सामने आएगी।
राजनीतिक हलचल
नान घोटाला छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद अफसरों को बचाया गया और उन्हें महत्वपूर्ण पद दिए गए।
वहीं, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा शासनकाल में ही यह घोटाला हुआ और ईडी की कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है।
अब जबकि दोनों वरिष्ठ अफसर ईडी की रिमांड में हैं, आने वाले दिनों में यह मामला फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बनेगा।
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