छत्तीसगढ़

2 परिवारों का सालभर से सामाजिक बहिष्कार, 12 लोग परेशान

Shantanu Roy
27 Oct 2026 3:34 PM IST
2 परिवारों का सालभर से सामाजिक बहिष्कार, 12 लोग परेशान
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Dhamtari. धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अंधविश्वास और सामाजिक बहिष्कार का एक गंभीर मामला सामने आया है। कुरूद थाना क्षेत्र के ग्राम बोदाछापर में दो परिवारों ने गांव के कुछ लोगों पर टोनहा कहकर प्रताड़ित करने और पिछले एक साल से सामाजिक बहिष्कार करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि गांव में उनसे कोई बातचीत नहीं करता और न ही उन्हें रोजगार दिया जाता है। इस कथित बहिष्कार से दोनों परिवारों के महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित कुल 12 सदस्य प्रभावित हैं। लगातार प्रताड़ना से परेशान परिवारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। एक पीड़ित ने न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की चेतावनी भी दी है।

एक साल से सामाजिक बहिष्कार झेल रहे दो परिवार
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम बोदाछापर निवासी नरोत्तम साहू और तीरथ राम साहू ने गांव के कुछ लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों का कहना है कि उन्हें अंधविश्वास के आधार पर टोनहा बताकर सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया है। पिछले करीब एक साल से परिवारों को गांव की सामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि ग्रामीणों को उनसे बातचीत करने से रोका जाता है। इतना ही नहीं, उन्हें रोजगार और कामकाज के अवसरों से भी वंचित किया जा रहा है। इस स्थिति के कारण परिवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महिलाओं और बच्चों समेत 12 लोग परेशान
पीड़ित परिवारों के अनुसार, सामाजिक बहिष्कार का असर केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के कुल 12 सदस्य इसकी मार झेल रहे हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। परिवारों का आरोप है कि सामाजिक संबंध टूटने और काम नहीं मिलने के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। लगातार परेशानियों के बाद दोनों परिवारों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

नाती के शव को कब्र से निकालकर जलाने का गंभीर आरोप
इस मामले में तीरथ राम साहू ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, उनके नाती की मृत्यु के बाद परिवार ने शव को अपनी बाड़ी में दफनाया था। परिवार की योजना नाती की याद में दफन स्थल पर मठ बनाने की थी। तीरथ राम साहू का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी सहमति के बिना कब्र से शव निकाल लिया और उसे श्मशान घाट ले जाकर जला दिया। उन्होंने बताया कि जब परिवार ने इस घटना का विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। इसके बाद उन्हें टोनहा कहकर प्रताड़ित किया जाने लगा। हालांकि, शव को कब्र से निकालने और जलाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

15 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आरोप
तीरथ राम साहू ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर गांव के कुछ लोगों ने उनके परिवार पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगा दिया। इसके साथ ही परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। उनका कहना है कि इस कथित फैसले के बाद से परिवार के सदस्य लगातार परेशानी झेल रहे हैं। पीड़ितों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार
लगातार कथित प्रताड़ना से परेशान नरोत्तम साहू और तीरथ राम साहू अपने परिवारों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने की मांग की। तीरथ राम साहू ने गंभीर मानसिक परेशानी का जिक्र करते हुए न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की चेतावनी दी है। इस चेतावनी को देखते हुए परिवार को तत्काल सुरक्षा, सहायता और शिकायत पर संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता है।

प्रशासन ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
पीड़ित परिवारों की शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सामाजिक बहिष्कार, अर्थदंड और शव को कब्र से निकालने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना जैसे मामलों की रोकथाम के लिए विशेष कानून मौजूद है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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