छत्तीसगढ़

लूट और अवैध हथियार के मामले में दो अपराधियों को मिली आजीवन कारावास की सजा

Shantanu Roy
4 Aug 2025 10:07 PM IST
लूट और अवैध हथियार के मामले में दो अपराधियों को मिली आजीवन कारावास की सजा
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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर की एक अदालत ने लूट और अवैध हथियार रखने के एक गंभीर मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश शैलेश शर्मा की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया, जिसमें दोनों अपराधियों को आजीवन कारावास, कुल 9 वर्ष से अधिक का सश्रम कारावास, तथा विभिन्न धाराओं के अंतर्गत जुर्माने की सजा दी गई है।
लूटपाट की घटना से फैला था दहशत का माहौल
यह मामला 1 सितंबर 2022 का है। सुबह 5:30 बजे के आसपास गोंडवारा रोड, एकता नगर स्थित साईं मोटर गैरेज के पास देवेंद्र साहू नामक व्यक्ति मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। तभी दो अज्ञात युवकों ने उन पर जानलेवा हमला किया। एक आरोपी ने बटनदार चाकू से उन पर वार कर हाथ पर गंभीर चोट पहुंचाई, जबकि दूसरा युवक उनकी जेब से मोबाइल लूटकर मौके से फरार हो गया। घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल व्याप्त हो गया था। पीड़ित की शिकायत पर गुढियारी थाना पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की।
वैज्ञानिक तरीके से की गई जांच, मिले पुख्ता सबूत
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय गवाहों के बयान और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दोनों आरोपियों की पहचान की। आरोपियों के नाम शेख शब्बीर उर्फ एसके शब्बीर उर्फ बाबू और आशीष मिर्झा उर्फ लियॉन उर्फ बबलू हैं। दोनों को क्रमशः घटना के कुछ ही दिनों बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटा गया मोबाइल फोन और हमले में प्रयुक्त चाकू भी बरामद किया, जिससे अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूत हुआ।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
करीब तीन वर्षों तक चले इस मुकदमे में कोर्ट ने साक्ष्यों, गवाहों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
शेख शब्बीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 394 (लूट के दौरान जानलेवा हमला) में आजीवन कारावास एवं ₹40,000 के जुर्माने की सजा सुनाई गई।
आशीष मिर्झा को भी धारा 394 के अंतर्गत आजीवन कारावास और ₹40,000 जुर्माना लगाया गया।
इसके अतिरिक्त दोनों आरोपियों को अन्य सहवर्ती धाराओं के अंतर्गत कुल 9 वर्ष से अधिक के सश्रम कारावास की भी सजा दी गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
कोर्ट के इस फैसले को आम जनता की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह टिप्पणी भी की कि— "शहर में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जा सकता जो दिनदहाड़े हथियारों से हमला कर लूट की वारदात को अंजाम देते हैं।"
अभियोजन पक्ष ने निभाई अहम भूमिका
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने मजबूत दलीलों और तथ्यों के माध्यम से आरोपियों की संलिप्तता को अदालत के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं पुलिस की सटीक जांच और समय पर साक्ष्य जुटाना, न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुआ।
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