छत्तीसगढ़
गैंगरेप केस में दो दोषियों को 20-20 साल की सजा, DNA रिपोर्ट बनी अहम सबूत
Shantanu Roy
30 Sept 2026 9:56 PM IST

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छग
Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के लेमरू थाना क्षेत्र में हुए गैंगरेप के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो आरोपियों हसरुहन मंझवार और अजय सिंह को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामले में एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट अहम सबूत साबित हुई। पीड़िता ने शुरुआती न्यायालयीन बयान में घटना से इनकार किया था, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य सामने आने के बाद दोबारा बयान दर्ज कराया गया, जिसमें उसने गैंगरेप की बात स्वीकार की।
अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी के अनुसार, दोनों आरोपी पीड़िता के ही गांव के रहने वाले हैं। घटना के समय पीड़िता अपने घर में अकेली थी। आरोप है कि रात के समय हसरुहन मंझवार और अजय सिंह जबरदस्ती घर में घुसे और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे जान से मार देंगे। इसके बाद दोनों आरोपी मौके से चले गए। डरी-सहमी पीड़िता ने अगले दिन सुबह लेमरू थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 332(बी), 351(3) और 70(1) के तहत अपराध दर्ज किया। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के डीएनए सैंपल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र कर जांच के लिए एफएसएल लैब भेजे। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू हुई। इस दौरान पीड़िता ने कोर्ट में दिए अपने प्रारंभिक बयान में कहा कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई थी। पीड़िता के इस बयान से मामले में नया मोड़ आ गया।
हालांकि अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट से एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट आने तक इंतजार करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और वैज्ञानिक रिपोर्ट का इंतजार किया गया। बाद में एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में घटना से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के बाद कोर्ट ने पीड़िता को दोबारा बयान के लिए बुलाया। इस बार पीड़िता ने कोर्ट के सामने बताया कि उसके साथ गैंगरेप की घटना हुई थी।
पीड़िता ने कहा कि वह डर और दबाव के कारण अपने पहले बयान में घटना से इनकार कर गई थी। उसने बताया कि आरोपियों की धमकी के कारण वह भयभीत थी और इसी वजह से पहले सच नहीं बता सकी। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने पीड़िता के बयान के साथ गवाहों के बयान, पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल साक्ष्य, एफएसएल रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट प्रस्तुत की। कोर्ट ने उपलब्ध सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी हसरुहन मंझवार और अजय सिंह को दोषी करार दिया। दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इस मामले में वैज्ञानिक जांच महत्वपूर्ण साबित हुई। पीड़िता के प्रारंभिक बयान से इनकार के बावजूद डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट ने जांच को मजबूत आधार दिया। बाद में पीड़िता के दोबारा दर्ज बयान और अन्य सबूतों के आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
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