छत्तीसगढ़
राघवेंद्र पटेल हत्याकांड में दो आरोपियों को आजीवन कारावास
Shantanu Roy
23 Jun 2026 11:29 PM IST

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Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के बहुचर्चित राघवेंद्र पटेल हत्याकांड में द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दो मुख्य आरोपियों ऋषि रैदास और रविशंकर श्रीवास्तव को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं सह-आरोपी संतोष चौधरी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, जबकि एक अन्य आरोपी काजल कुमार मन्ना अभी भी फरार बताया गया है।
यह मामला जून 2021 का है, जिसमें क्षणिक लालच और आपसी षड्यंत्र के चलते अपने ही मित्र राघवेंद्र पटेल की बेरहमी से हत्या की गई थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने योजना बनाकर ग्राम श्रृंगारबहरा (मरवाही) में राघवेंद्र पटेल की गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद अपराध को छिपाने के उद्देश्य से शव पर पेट्रोल डालकर उसे जला दिया गया था, जिससे साक्ष्य नष्ट किए जा सकें। पुलिस विवेचना के दौरान इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य सामने आए। जांच में बलेनो कार की जब्ती, टोल रजिस्टर एंट्री, पेट्रोल पंप और होटल के सीसीटीवी फुटेज तथा फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) रिपोर्ट को न्यायालय ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों के लिए कम सजा की अपील की थी, लेकिन न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया। न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने अपने आदेश में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व मित्रता के बावजूद केवल क्षणिक लालच में आकर इस प्रकार की सुनियोजित और क्रूर हत्या करना गंभीर मानसिक प्रवृत्ति को दर्शाता है। ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने अपने फैसले में दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 120बी के तहत आजीवन कारावास तथा 2,000-2,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। इसके अलावा धारा 201/34 (साक्ष्य मिटाने) के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और 1,000-1,000 रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया जाता है तो अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील कौशल सिंह ने प्रभावी पैरवी की। यह फैसला क्षेत्र में लंबे समय से चर्चित इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। वहीं पुलिस और अभियोजन की मजबूत जांच एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मामले को सजा तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर इस फैसले के बाद लोगों में संतोष का माहौल देखा गया है। यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि अपराध चाहे कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना संभव नहीं है।
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