छत्तीसगढ़
सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पिताजी की याद में श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन
Shantanu Roy
5 Jun 2025 9:05 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। वरिष्ठ समाज सेवी, गौ सेवक, अग्रवाल समाज के राष्ट्रीय संरक्षक एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पिता स्वर्गीय रामजीलाल जी अग्रवाल की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए गुरुवार को बारहवां एवं पगड़ी रस्म के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ समेत देश भर से आम और खास लोग पहुंचे और पुण्यआत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, टंकराम वर्मा, केदार कश्यप, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने स्वर्गीय रामजीलाल अग्रवाल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भगवान से पुण्य आत्म की शांति के साथ ही परिवार के सदस्यों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
इसके अलावा भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय, अमर अग्रवाल, राजेश मूणत, विधायक राजेश अग्रवाल, अनुज शर्मा जी, सुनील सोनी, संपत अग्रवाल जी, पुरंदर मिश्रा जी, गुरु खुशवंत साहेब, ईश्वर साहू, सुशांत शुक्ला, गजेंद्र यादव, मोतीलाल साहू, रोहित साहू, दीपेश साहू, प्रबोध मिंज, इंद्र कुमार साहू, विभिन्न बोर्ड और निगम के अध्यक्षगण केदार गुप्ता, अमरजीत सिंह छाबड़ा, भूपेंद्र सवन्नी, वर्णिका शर्मा, श्रीनिवास मद्द्दि, दीपक म्हस्के, संजय श्रीवास्तव, डॉ सलीम राज, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल, नंदन जैन, बिलासपुर महापौर पूजा विधानी, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, पूर्व विधायक चंद्र शेखर साहू, देव जी भाई पटेल, श्रीचंद सुंदरानी, कुलदीप जुनेजा, शिव रतन शर्मा, रंजना साहू, नवीन मार्कण्डेय, सियाराम साहू, रेणु जोगी, अमित जोगी, लाभचंद बाफना, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, अशोक बजाज, राजीव लोचन महाराज जी, कबीर पंथ प्रमुख राष्ट्रीय संत असंग देव जी महाराज, गोदडीवाला धाम प्रमुख अम्मा मीरा, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष सतीश थोरानी, गुरमुख सिंह होरा, सुरेश गोयल, पद्मश्री सुरेंद्र दुबे, ऊषा बारले, राजेश अग्रवाल जी साधु-संत, धर्म प्रमुख, मीडिया कर्मियों समेत हजारों की संख्या में पारिवारिक शुभचिंतक और गणमान्यजन शामिल हुए और मृतआत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें श्रीरामजीलाल अग्रवाल का 24 मई को लंबी बीमारी के बाद 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अनिल द्विवेदी ने स्वर्गीय रामजीलाल अग्रवाल का जीवन परिचय रखते हुए कहा कि लाभ-हानि, प्रेम-घृणा से भरी इस दुनिया में जीने की पूरी गयारह सीढ़ियां थे बाबूजी. विशाल कुटुंब को संभालने वाले आदर्श परिवार के मुखिया, रामजीलाल अग्रवाल जी ने सहज, सरल, सात्विक, सत्यपरक और अप्रदूषित जीवन जीया. घर पर कोई भी आगंतुक आए, 'जीम लो‘ कहकर भोजन के लिए आमंत्रित करते थे. उन्होंने सभी को बराबर का स्नेह दिया, सबकी चिंता की. राजमाता श्रीमंत विजरायाराजे सिंधिया ने बाबूजी के योगदान को सराहते हुए कहा था: आप इतना बड़ा परिवार संभाल रहे हैं और हम एक बेटे को नही संभाल सके। बाबूजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे समाजवादी नेता रघु ठाकुर कहते हैं कि, 1980 के दशक में जब कोई मदद को आगे नही आता था तब बाबूजी सब प्रकार की मदद करते थे. उनकी सफेद गांधी टोपी और अग्रवाल परिवार का आरएसएस.भाजपा के प्रति समर्पण यह दर्शाता है कि बाबूजी के दिल में सभी विचारधारा और दलों के प्रति सम्मान ताउम्र बना रहा.
श्री द्विवेदी ने कहा कि ऋषितुल्य गौसाधक स्व.रामजीलाल अग्रवाल का दूसरा परिवार महावीर गौशाला बन गया था। प्रातः 5 बजे उठकर गायों की सेवा करना उनकी दिनचर्या में शुमार था। इतना वात्सल्य कि गाएं उन्हें देखकर रंभाने लगती. एक दिन गाय का गोबर साफ करते देखने पर जब एक पत्रकार ने बाबूजी से पूछा कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा: इनके आर्शीवाद से ही परिवार फल-फूल रहा है. वे पूरे परफैक्शन और संपूर्णता के साथ समाज.जीवन में रमे रहे. समाज बिखरा और बेतरतीब क्यों है, यह सवाल बाबूजी को चुभता रहता था. यही वजह रही कि वे अग्रवाल समाज के लिए तन-मन-धन से जुटे रहे. वे अग्रवाल महासभा के चार बार अध्यक्ष रहे, मध्य प्रदेश अग्रवाल महासभा के उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष, अग्रवाल सम्मेलन के सलाहकार तथा अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन में विशेष आमंत्रित रहे. उन्होंने आदर्श जीवन जीने की जो पगडण्डी हमें दिखाई है, वह अमूल्य धरोहार है। पुरस्कार जिन चुनिंदा लोगों को पाकर सम्मानित होता है, स्व. बापूजी को राज्य सरकार ने अप्रतिम गौसेवा के लिए उन्हें राज्य अलंकरण से सम्मानित किया तो उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत, हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, गुजरात के तत्कालीन राज्यपाल तथा राजिम कुंभ में जगतगुरू शंकराचार्य जैसी हस्तियों के हाथों उन्हें सम्मानित होने का गौरव हासिल हुआ।
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