छत्तीसगढ़

छग गृह निर्माण मंडल के मकानों को खरीददारों का टोटा

Admin2
2 July 2021 5:38 AM GMT
छग गृह निर्माण मंडल के मकानों को खरीददारों का टोटा
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प्रदेशभर में मकान और दुकान पहले से बने हुए, घटिया क्वालिटी और खंडहर होने के कारण बिक नहीं रहे

पर्यावरण को नुकसान

शहर में मकान कोई खरीद नहीं रहे तो आउटर में कौन लेगा अब तक जितने भी मकान शहर के बाहर बने हैं उसमें करोड़ों रूपये जनता के स्वाहा हो चुके

अधिकतर बाहरी प्रोजेक्ट बिक्री नहीं होने के कारण खंडहर में तब्दील हो चुके हैं

भ्रष्ट अधिकारियो को राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के छवि की भी चिंता नहीं

भ्रष्ट और बेशर्म अधिकारी तालपुरी, अभिलाषा परिसर, हिमालयन हाइट्स और परसदा जैसे प्रोजेक्ट में 5000 करोड़ रूपये जनता के पैसे की लूट के बाद भी बाज नहीं आ रहे

कौन है सफेदपोश नेता जो राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने और तीनो भ्रस्ट अधिकारियों को बचाने में लगा है

गृह निर्माण मंडल के भ्रष्ट अधिकारियों ने जनता की गाढ़ी कमाई को बिना डिमांड और बिक्री प्लानिंग किए बगैर मकानों/दुकानों के निर्माण में झोक दिया । ऐसे भ्रष्ट अधिकरियों से संपूर्ण लागत की वसूली अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।

ज़ाकिर घुरसेना

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का पंच लाइन हम मकान नहीं घर बनाते हैं लेकिन किसका घर, सिर्फ बोर्ड के अधिकारियों और माननियों का। घर बनाते जरूर हैं लेकिन गरीबो या आम जनता की सोच और पहुंच के अनुरूप नहीं। सरकार का अरबो रूपये फंसे होने के बावजूद अधिकारी नया प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड द्वारा जो पहले कालोनिया बना कर बेचीं गई वो हाथो हाथ बिक गई लेकिन अब गुणवत्ता खऱाब होने के वजह से लोगों का बोर्ड के मकानों के प्रति मोहभंग होने लगा है। बोर्ड को चाहिए पहले जो मकान एवं दुकान जो बिकने से रह गई है उन्हें बेचे बाद में नया कंस्ट्रक्शन करे, लेकिन हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारी सिर्फ अपनी जेबें भरने के चलते प्रोजेक्ट लेकर आते हैं। उन्हें शासन के पैसे से कोई सरोकार नहीं है।

क्वालिटी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए

एक ही साल में बोर्ड द्वारा बनाये गए मकानों की हालत खस्ता हो जाती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल राजधानी सहित प्रदेश भर में मकान और दुकानें तो बना रहा है, लोगो का मानना है कि क्वालिटी सही होने के कारण लेकिन उन्हें बेचना मुश्किल हो रहा है। रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में हजारों मकान और दुकान ऐसी हैं, जिनकी बुकिंग नहीं हुई है। बिना बुकिंग मकान बनाना सिर्फ पैसे की बर्बादी है,जिसे बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी समझने को तैयार नहीं हैं।

प्राइम लोकेशन की जमीन पर बनाएं मकान

जिस प्रकार प्राइवेट बिल्डर शहर की प्राइम लोकेशन पर मकान बनाकर बेचते हैं वैसा ही हाउसिंग बोर्ड को भी चाहिए मुख्य मार्ग से लगी हुई भूमि पर मकान बनाकर बेचे लोग हाथो हाथ खरीदने तैयार रहते हैं। सरकार की काफी जमींन है जिस पर अवैध कब्जेधरियो की नजऱ रहती है ऐसे जगहों का चयन करना चाहिए। लोकेशन सही नहीं होने के कारण बोर्ड को जगह जगह स्टाल लगाकर मकान बेचने की कवायद करना पड़ता है। कई कालोनिया ऐसी है जो आज तक आबाद नहीं हो पाया है। बोर्ड द्वारा बनाये जा रहे मकानों की लोकेशन सही नहीं होने के कारण ग्राहक आसानी से मिल नहीं पाते और मकान कई साल तक नहीं बिकने और गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण लोग दरवाजे खिड़किया तक निकालकर ले जाते हैं। वहीं लोकशन का सही चयन नहीं होने के कारण इन मकानों में रहने के लिए किराएदार नहीं मिल रहे हैं।

चारागाह में मकान बनाने की तैयारी, विरोध शुरू

विधानसभा से लगे मांढर मार्ग पर ग्राम पंचायत छपोरा भुरकोनी जिसका खसरा नंबर 207 रकबा 10 .934 हे. ( कुल 27 .01 एकड़) राजीव नगर आवास योजना के तहत आवासीय प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित करने हेतु मांग की गई है। इस सम्बन्ध में बोर्ड के कमिश्नर से हुई चर्चा में उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ जमींन की मांग किया गया है, जब जमींन मिलेगी तब प्रोजेक्ट के बारे में निर्णय लिया जायेगा। अभी सिर्फ जमींन आरक्षित करने हेतु एप्लीकेशन दिया गया है। रेवेन्यू विभाग से जब जमींन मिलेगी तब कुछ कहा जायेगा। अब सवाल यह उठता है कि जब बोर्ड के हजारों मकान अभी तक बिके ही नहीं हैं तो नया प्रोजेक्ट लेकर आने से क्या और किसे फायदा है। जिस जगह मकान बनाने की योजन बोर्ड ला रही है वह वर्तमान रिकार्ड के मुताबिक निजी अपरिवर्तित भूमि है जो चारागाह के रूप में ग्रामीणों द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है।

रायगढ़ सहित कोंडागांव में एक हजार मकान खाली

रायगढ़ में एक हजार से अधिक मकान खाली पड़े हैं। वहीं बस्तर में 1200 से अधिक खाली हैं। राजनांदगांव में 733 मकानों को खरीदने वाला कोई नहीं है। कोंडागांव में 500 से ज्यादा मकान खाली है।

बिना बुकिंग मकान बनाना भी एक कारण

कायदे से देखा जाये तो हाउसिंग बोर्ड में इतनी बड़ी संख्या में मकान खाली नहीं होने चाहिए। क्योकि हाउसिंग बोर्ड में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत बुकिंग की जाती है फिर निर्माण शुरू होता है। लेकिन अभी बिना बुकिंग किये मकान बना दिए गए हैं जिसे बेचने के लिए बोर्ड के अधिकारियो को पसीने छूट रहे हैं। आम तौर पर किसी भी स्कीम की 90 फीसदी मकान की बुकिंग होने पर ही निर्माण कार्य प्रारम्भ होना चाहिए लेकिन अपने निजी फायदे के लिए नियम कायदों को ध्यान में नहीं रखते और कंस्ट्रक्शन प्रारम्भ करवा देते हैं। सरकार के अरबो रूपये फंसा देने में कोई गुरेज करते। मजबूरन मकानो व दुकानों को बेचने के लिए अभियान चलना पड़ता है। लोगो ने यह भी कहा कि हाउसिंग बोर्ड की सबसे बड़ी कमजोरी है लोकेशन और क्वालिटी। अधिकतर खरीदारों ने हाऊसिंग बोर्ड का मकान नहीं खरीदने को एक सबसे बड़ा कारण मानते हैं। आज लोग था़ेडा-सा अधिक पैसा लगाकर अच्छे लोकेशन में क्वालिटी हाउसिंग लेना चाहते हैं।

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