समय बड़ा बलवान है निगल जाएगा, या तो बदल देगा या बदल जाएगा

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
कल बीजेपी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा. विमल चोपडा़ कुछ डाक्टरों के साथ वित्तमंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात करने गए लेकिन कुछ कारणों से उनका वित्त मंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई औऱ उन्हें वापस आना पड़ा। जिस पर कांग्रेस के एक बड़े नेता ने तंज कसते हुए कहाकि भाजपा के मंत्री खुद को भगवान समझने लगे है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि क्या कांग्रेस शासनकाल में रामराज्य आ गया था. नेता और कार्यकर्ता एक साथ बैठने लग गए थे। और तो और भूपेश बघेल को राजनांदगांव में एक कार्यकर्ता ने खरी खोटी सुनाया था कि कार्यकार्ताओं के कुछ काम ही नहीं हो रहे। मजे कि बात ये है कि जब खुद सरकार में बैठे थे तब कार्यकर्ताओं के काम नहीं कर पाए और जनता तथा कार्यकर्ताओं ने बदल दिया अब विपक्ष में बैठकर ज्ञान पेल रहे हैं। किसी ने ठीक ही कहा है कि समय बड़ा बलवान है निगल जाएगा, या तो बदल देगा या बदल जाएगा।
राजधानी वाले भी आदर्श पेश करें
बिलासपुर में प्रेसक्लब चुनाव की अवधि दो साल की है और 22 सितंबर को दो साल की अवधि खत्म होगी लेकिन बिलासपुर के पदाधिकारियों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी को निभाते हुए दो माह पहले ही चुनाव की घोषणा कर आदर्श सुचिता पेश किया है जिसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है। वहीं राजधानी रायपुर में प्रेसक्लब चुनाव अखाड़ा बना हुआ है यहां जो भी पदाधिकारी अध्यक्ष बनता है नई परिपाटी को जन्म दे देता है। रायपुर में पिछले 10 सालों में समय पर कभी चुनाव नहीं हो पाया है। यह पत्रकारों का अखाड़ा बनकर रह गया है। प्रेस क्लब के सदस्यों के लिए कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया। सिर्फ जो 5-10 पदाधिकारी होते है वो ही प्रेसक्लब की गरिमा को धूलधूसरित करने में उतावले होते हैं। जिसके कारण सैकड़ों पत्रकारों को सरकार से मिलने वाले फयदे सं वंचित होना पड़ता है। पत्रकारों में खुसुर-फुसुर है कि हर साल चुनाव कराएं और पत्रकारों के दु:ख-सुख में काम आने के साथ सरकारी योजना का लाभ पहुंचाएं ताकि जो हमारे बुजुर्गों ने बुनियादी रखी है उस पर गर्व किया जा सकें। लेकिन दुख इस बात है कि डींग हांकने वाले जब पदाधिकारी बन जाते है तो दिवाली दशहरा, होली, 15 अगस्त, 26 जनवरी के अलावा पत्रकारों को मिलने वाली सभी सरकारी फायदे का लाभ एक वर्ग विशेष ही उठाकर भाई -भतीजावाद को जन्म देकर प्रेसक्लब को जागीर के रूप में परिवर्तित कर देते हैं।
मंत्रालयीन संगठन के बल्ले-बल्ले ...पांडे जी कहिन
छत्तीसगढ़ मंत्रालय कर्मचारी संघ के त्रिवार्षिक चुनाव में अध्यक्ष पद पर चंद्रकांत पांडे और सचिव पद पर उमेश सिंह ने जीत हासिल की। अध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें चंद्रकांत पांडेय को 233 वोट, हीराचंद बघेल को 107 वोट, कांति सूर्यवंशी को 194 और महेंद्र सिंह राजपूत को 188 वोट मिले। चंद्रकांत पांडेय नव जागृति पैनल और हीरा चंद बघेल समाधान पैनल से प्रत्?याशी थे। अजीश मिरे उपाध्यक्ष चुने गए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ में सैकड़ों सरकारी कर्मचारी संगठन है जो अपनी मांगों को लेकर समय समय पर आंदोलन कर सरकार से सीधा मोर्चा ले लेते है। लेकिन मंत्रालयीन कर्मचारी संगठनों का जलवा की कुछ अलग है। सीधे अधिकारियों से जुड़े रहने का फायदा मिल जाता है। कोई मांग नहीं कोई आंदोलन नहीं फिर भी उनकी हर मांग पूरी हो जाती है। यही दूसरे संगठन वाले ताज्जुब करते है कि मंत्रालयीन कर्मचारी संगठन में क्या सुरखाब के पर लगे है जो बिन मांगे सब कुछ मिल जाता है और दूसरे संगठन महीनों हड़ताल करने के बाद भी कोई सुध लेने वाला कोई नहीं होता है।
नई भूमिका में होंगे अमिताभ जैन बधाई
प्रदेश के मुख्य सचिव अमिताभ जैन की विदाई की तैयारी शुरू हो गई है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें बिजली विनियामक आयोग का चेयरमैन बनाए जाने की खबरें आ रही हैं। यह पद हेमंत वर्मा के इस्तीफे के बाद खाली हो गया है। पहले अमिताभ जैन को मुख्य सूचना आयुक्त बनाए जाने की चर्चा थ। लेकिन अब रास्ता साफ हो गया है। बधाई हो जैन साहब। जनता में खुसुर-फुसुर है कि अब बिजली के करंट से जनता को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। क्य़ोंकि अमिताभ जैन मुख्य सचिव रहते कई जन कल्याणकारी फैसले लिए जिसके कारण उन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन मिला अब नई भूमिका में भी जनता बिजली के दामों से राहत की जरूरत महसूस कर रही है। नियामक आयोग की रेगुलेटरी टेंपरेरी और परमानेंट मीटर में एक समान बिल होना चाहिए बिजली वाले टेंपरेरी में 8.40 पैसे तो परमानेंट मीटर में 3.80 पैसे प्रति यूनिट बिल लेते है जो न्याय संगत नहीं है। इस पर आप ही कुछ कर सकते है। यहां तो बिजली वाले बात भी करते है तो लोगों को करंट लग जाता है। विपक्ष भी बिजली बिल को लेकर हो हल्ला कर रहा है उसे चुप कराने जैन साहब से बेहतर कोई अफसर नहीं हो सकता । वैसे भी बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन का पद मुख्य सूचना आयुक्त के पद की तुलना में अधिक बेहतर और सम्मानजनक है। बिजली की रेगुलेटरी बॉडी होने की वजह से इस पद का ग्लेमर भी रहता है। 28 में से करीब डेढ़ दर्जन राज्यों में रिटायर नौकरशाह बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन बने थे ।
हाई कोर्ट की चिंता जायज़...
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में बढ़ती भीड़ और कल्याण अधिकारियों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य की 33 जेलों में क्षमता से करीब 40 प्रतिशत ज्यादा कैदियों की मौजूदगी और कल्याण अधिकारियों की कमी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि हर जिला जेल में वेलफेयर आफिसर की नियुक्ति और अतिरिक्त बैरक का समय पर निर्माण आवश्यक है, ताकि कैदियों को मानक सुविधाएं मिल सकें और भीड़भाड़ की समस्या कम हो। जनता में खुसुर -फुसुर है कि जिस काम के लिए कार्यपालिका की जिम्मेदारी है उस काम के लिए न्याय पालिका को संज्ञान लेना पड़े तो इस बात का संकेत है कि हालात बहुत अच्छे नहीं है। जेल में अपराधियों की संख्या बढऩा किसी भी राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। कार्यपालिका को हाईकोर्ट की गाइड लाइन पर काम की रफ्तार बढ़ानी चाहिए ताकि जेल को सुधार गृह बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
120 सरपंचों को सालभर से काम नहीं मिला ...
बालोद जिले के डौंडीलोहारा जनपद पंचायत क्षेत्र से निर्वाचित 120 सरपंचों को सालभर से काम नहीं मिला है। स्थिति से नाराज सरपंचों ने कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे, जहां जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात होने पर समस्या बताने के साथ पुराने प्रस्ताव पर काम शुरू करने की मांग की सरपंचों ने जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात के दौरान बताया कि उन्हें निर्वाचित हुए एक साल होने जा रहा है, लेकिन उनके पंचायतों में कार्यो की स्वीकृति नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते गांवों में विकास कार्य रुका पड़ा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि गांवों में स्वराज आ ही नहीं सकता जब तक वहां अफसरशाही काबिज रहेगी। डौंडीलोहारा जनपद पंचायत का दुर्भाग्य है कि 120 गांवों के सरपंचों को उनके प्रतिनिधित्व वाले गांव में एक साल कोई काम नहीं हुआ इसके पीछे नौकरशाही में अहम की लड़ाई माना जा रहा है।





