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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के जंगल सफारी में बीमार चल रही बाघिन ‘बिजली’ को सोमवार शाम इलाज के लिए गुजरात के वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा गया। ‘बिजली’ को यूट्रस और ओरल इंफेक्शन है, जिससे उसे पिछले कुछ समय से खाने-पीने में दिक्कत हो रही थी। हालांकि, बाघिन को रवाना करने से पहले रायपुर रेलवे स्टेशन पर फॉरेस्ट विभाग और रेलवे कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। फॉरेस्ट अफसर बिना टिकट लिए प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए थे और उन्होंने बाघिन को एक बड़े लोहे के पिंजरे में बंद कर रखा था, जिसे वे किसी को दिखाने से मना कर रहे थे। रेलवे कर्मचारियों ने जब पिंजरे की जांच करनी चाही, तो फॉरेस्ट अफसरों ने इंकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस चली, जिसके बाद मामला रेलवे मजिस्ट्रेट तक पहुंचा।
रेलवे मजिस्ट्रेट ने काटा चालान
मामले की जानकारी मिलने पर रेलवे मजिस्ट्रेट ने हस्तक्षेप करते हुए फॉरेस्ट अधिकारियों का चालान काटने का आदेश दिया। रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि किसी भी पशु को ट्रेन में लोड करने या प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए विशेष अनुमति और टिकट जरूरी होता है, जो अधिकारियों ने नहीं लिया था। हालांकि, कुछ देर की औपचारिकताओं के बाद मामला सुलझा और रेलवे की मदद से बाघिन को हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन से गुजरात रवाना कर दिया गया।
वन मंत्री ने दी जानकारी – ‘बिजली’ एक महीने तक रहेगी इलाज के अधीन
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बाघिन ‘बिजली’ करीब 8 साल की है और जंगल सफारी में पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रही थी। उन्होंने कहा- “बाघिन को यूट्रस और ओरल इंफेक्शन है। रायपुर में इलाज के बावजूद सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए बेहतर उपचार के लिए वनतारा सेंटर भेजा गया है। वहां विशेषज्ञ वेटनरी डॉक्टरों की निगरानी में एक महीने तक इलाज चलेगा।” वनतारा सेंटर, गुजरात का एक प्रमुख वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर है, जहां गंभीर रूप से बीमार या घायल जंगली प्राणियों का पुनर्वास और उपचार किया जाता है।
पहले भी भेजे गए थे वन्य प्राणी
यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ के जंगल सफारी से वन्य प्राणियों को वनतारा भेजा गया है। अप्रैल 2025 में चिरमिरी से मिले सफेद भालू और हिरण को भी इलाज और देखभाल के लिए वनतारा सेंटर भेजा गया था। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों प्राणियों को देने के बदले छत्तीसगढ़ वन विभाग को गुजरात से ज़ेब्रा जोड़ा, मीरकैट और माउस डियर मिले थे। ये सभी प्राणी रायपुर जंगल सफारी में लाए गए थे, लेकिन अभी तक क्वारेंटाइन जोन में हैं और पर्यटकों को नहीं दिखाए जा रहे।
क्वारेंटाइन में ही ज़ेब्रा की मौत
सूत्रों के अनुसार, रायपुर जंगल सफारी में लाए गए नर ज़ेब्रा की क्वारेंटाइन अवधि के दौरान सांप के काटने से मौत हो गई। मादा ज़ेब्रा, मीरकैट और माउस डियर अभी भी निगरानी में हैं। वन विभाग ने फिलहाल उनके प्रदर्शन को स्थगित रखा है।
12 करोड़ खर्च के बावजूद आठ बाड़े खाली
रायपुर जंगल सफारी में विदेशी वन्य प्राणियों को लाने की योजना के तहत लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से नए बाड़े तैयार किए गए थे। कुल 32 बाड़ों में से 8 नए बाड़े अभी भी खाली पड़े हैं। पिछली सरकार के कार्यकाल में इन बाड़ों को मंजूरी दी गई थी ताकि आने वाले समय में ज़ेब्रा, जिराफ़ और अन्य विदेशी प्रजातियों को रखा जा सके। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी को भी प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें इन प्राणियों की आवश्यकताओं के अनुसार बाड़े के डिजाइन शामिल थे। हालांकि, अब तक विदेशी प्रजातियों के आने में देरी और स्थानीय वन्य प्राणियों की बीमारियों ने जंगल सफारी प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल
वन विभाग की लगातार चूक और पशु प्रबंधन में लापरवाही को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। पहले भालू और हिरण के वनतारा भेजे जाने, फिर ज़ेब्रा की मौत और अब बाघिन ‘बिजली’ के बीमार पड़ने से यह स्पष्ट होता है कि जंगल सफारी में वन्यजीवों की देखरेख और स्वास्थ्य व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। पर्यावरण बार-बार होने वाली बीमारियां और मौतें प्राकृतिक आवास की कमी, अनुचित आहार और उच्च तापमान जैसे कारकों से जुड़ी हो सकती हैं।
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