छत्तीसगढ़

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे, बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला

Nil dhankar
5 Dec 2025 11:35 AM IST
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे, बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

जमीन के गाइड लाइन ने विपक्ष सहित सत्ता पक्ष में एक नई गाइड लाइन की लकीर खींच दी है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जिनके पास जितना ज्य़ादा जमीन वो ही नई गाइड लाइन की समर्थन कर रहे है ताकि संशोधन होने के बाद उनकी सारी जमीन अवैध से वैध यानी दो नंबर से एक नंबर में हो जाएगा। जमीन की नई गाइडलाइन दरों में वृद्धि का भाजपा वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइन दर खरीदी- बिक्री के वास्तविक मूल्य के आसपास है। ऐसा करने से कालाधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकार को सही राजस्व की प्राप्ति भी होगी। वहीं कांग्रेसी जमीन की नई गाइड लाइन का कपड़ा फाड़ फाड़ कर जगह -जगह विरोध दर्ज करा रहे है। जमीन की कद्र करने वाले कई जमीनदारों का कहना है कि जब भी नई सरकार आती है जमीन को अपने स्तर पर गाइड लाइन बनाने की कोशिश करती है पर हमको मालूम है सत्ता में बैठे हमारे नेताओ् को कैसे जमीन पर उतारना है।

नाम भले ही बदल जाए पर चरित्र नहीं बदलना चाहिए...

अब पीएमओ् और राजभवन का नाम बदल गय़ा है। गलती से भी यदि कोई मतदाता सेवा तीर्थ या लोकभवन जाना चाहे तो क्या करना पड़ेगा किसी ने नहीं बताया है। इस खबर पर पूरे देश में जोर शोर से चर्ता हो रही है। इसके पहले देश के कई राज्यों की राजधानियों के साथ सत्ता परिवर्तन के साथ शहरों के नाम बपदले गए । तब लोगों ने सहर्ष स्वीकार्य करते हुए सालों तक तारीफ करते रहे। अब पीएमओ् और राजभवन के नाम बदलने से भ्रष्टाचारी अधिकारयों औऱ भ्रष्टाचार को आपरेट करने वाले तथाकथित दलाल टाइप के लोगों में मायूसी साफ दिखाई दे रही है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भ्रष्टाचार तो अब शिष्ठाचार में बदल चुका है, इस कारण भ्रष्टाचारियों की एक बैठक कुछ दिनों पहले एक श्मशान घाट में गलती से एक बड़े अधिकारी के निधन में गमगीन अधिकारिय़ों की टीम ने शोक व्यक्त करने के साथ यह भी प्रस्ताव पारित किय़ा है कि हम भी सरकार के नाम बदलने का अनुसरण करते रहेंगे। भ्रष्टाचार सुनने में बड़ा असहज लगता है, एैसा लगता है कि किसी ने राह चलते किसी शरीफ आदमी पर कीचड़ उछाल दिया हो। श्मशान घाट में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का नाम दिया जाए जितने भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए उसमें भ्रष्टाचार शब्द की जगह शिष्टाचार भेंट पूजा ग्रहण करते लिखा जाए। ताकि नाम बदलने से किसी को भी आहत नहीं करें । शिष्टाचार तो शिष्टाचार है, उसे पूर्व की तरह ससम्मान अनुग्रह अनुदान समझ कर देते रहे, जनता का काम बिना कसी रूकावट के आगे बढ़ते रहे। नाम में क्या रक्खा है कहने वालों को उनके सवाल का जवाब मिल गया होगा। नाम भले ही बदल जाए पर चरित्र नहीं बदलना चाहिए यही सरकारी जीवन की सार है। इसी बात पर मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र का गजल याद आया घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे, बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला ।

कोचियों और छापामारने वालों के बल्ले बल्ले

धान खरीदी शुरू होते ही प्रदेश में नया खेल शुरू हो गया है। जो कल तक कोचिए ते, आज वो राइस मिलर बनकर अपना धान पकड़वा रहे है औऱ इस पांच घंटे छापामारी के दौरान सोसायटी में अवैध धान बेचकर एक दिन में लाखों की कमाई कर रहे है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कोचियों औऱ समिति प्रबंधक के बीच जो चोली दामन का संबंध है उसे सरकार किसी भी तरह अलग बिलग नहीं कर सकती , कोचियों/बिचौलियों द्वारा धान के अवैध भंडारण एवं परिवहन की रोकथाम हेतु जिले में राजस्व, कृषि, खाद्य, सहकारिता एवं मंडी विभाग के अधिकारियों का उडऩदस्ता दल गठित किया गया है।अंतरराज्यीय अवैध धान परिवहन रोकने हेतु उड़ीसा सीमा पर बोराई (घुटकेल), बांसपानी, बनरौद और सांकरा चेकपोस्ट पर 24म7 निगरानी की व्यवस्था की गई है।अब तक अवैध धान परिवहन/भंडारण के 28 प्रकरण दर्ज, कुल 1,253 मे.टन धान एवं 02 वाहन जप्त किए गए हैं। कार्रवाई लगातार जारी है। खबर तो ये भी है कि जहां ज्यादा माल सोटाई करने को मिलती है उस मंडी से सैकड़ों किमी दूर उडऩदस्ता टीम को छापामारने के लिए भेजते है इस दौरान उस मंडी में दूसरे राज्यों की धान आसानी से बेच कर सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा रहे है।

अलाव जलाए पर झुलसने से बचाव भी करें ...

कड़ाके की ठंड ने फिर 2018 की याद ताजा कर दी है। पहले जो लोग ठंड से सिकुड़ गए थे उन्हें जगह अलाव जलाने की छूट दी गई जिसके फलस्वरूप करोड़ों के शराब घोटाले हो गए, लोगों ने ठंड के बचने के लिए अलाव चलाने की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे निजी ठंड को दूर करने के लिए इतना अलाव जला डाला कि एसीबी ईओडब्ल्यू और सीबीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि फिर से अलाव की शुरूआत हो गई है जनता में सरकार को सलाह दी है कि जिनके हाथ में अलाव जलाने की जिम्मेदारी है उन्हें 2018 से 2023 तक जले अलाव को ध्यान में रखकर अलाव की व्यवस्था करें ताकि अधिकारी झुलसे नहीं औऱ लोगों को ठंड से राहत मिलता रहे। छत्तीसगढ़ में फिर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। आमजनों को शीतलहर से सुरक्षा और त्वरित राहत दिलवाने नगर निगम ने राजधानी में 2 दर्जन से अधिक सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। कमिश्नरों ने जोन स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से महादेवघाट रायपुरा और महोबा बाजार, चंगोरा भाठा बाजार, ब्रम्हदेईपारा खमतराई, जयस्तम्भ चौक के पास, कलेक्टर ऑफिस डॉ बी आर अम्बेडकर चौक के पास, नेताजी सुभाष स्टेडियम, मोती बाग, डंगनिया पानी टंकी स्कूल के समीप, शंकर नगर चौपाटी, तेलीबाँधा तालाब मरीन ड्राइव, अंतर राज्यीय बस स्टैण्ड भाठागांव में अलाव की नियमित व्यवस्था की है। अब तो नगर निगम वाले भी अलाव चलाने के लिए जगह पहुंच रहे है ताकि उनकी भी कडक़ी दूर हो सके।

बारदाना नहीं अनारदाना है भाई ...

धान खरीदी क्या शुरू हुई बारदाना अनार दाना की तरह महंगी हो गई है। समिति प्रबंधक से लेकर सोसायटी वाले कुछ भी बेच रहे और अनारदाना खा रहे है। बिलासपुर कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी को पारदर्शी और सुचारु रूप से संचालित करने प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों द्वारा लगातार खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में उपायुक्त सहकारिता, खाद्य नियंत्रक और जिला विपणन अधिकारी ने चपोरा धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया।जनता में खुसुर-फुसुर है कि धान खरीदी साल में एक बार होती खरीदी केंद्र वाले तो बारदाना को ही अनार दाना समझते है। निरीक्षण के दौरान चपोरा केंद्र से 100 नग शासकीय बारदाना एक किसान के वाहन में बाहर ले जाते हुए पाया गया। इसकी जांच सहकारिता विस्तार अधिकारी कोटा और खाद्य निरीक्षक कोटा द्वारा की गई। जांच में ग्राम सेमरा के किसान हनुमान प्रसाद पिता जगन्नाथ प्रसाद ने बताया कि 8 दिसंबर को होने वाली धान खरीदी के टोकन के लिए धान भरने हेतु उन्होंने केंद्र के चौकीदार संजय यादव से बारदाना मांगा था, जिसे वे अपने वाहन में लेकर जा रहे थे। इसकी पुष्टि केंद्र स्तर पर भी की गई। केंद्र में इस अनियमितता के पाए जाने पर खरीदी फड़ प्रभारी, बारदाना प्रभारी और चौकीदार को तत्काल निलंबित किया गया।

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