छत्तीसगढ़

बातें तो बहुत हैं पर कोई मुद्दा नहीं ये शोर है, पर इसमें कोई मतलब नहीं...

Nil dhankar
24 Oct 2025 11:35 AM IST
बातें तो बहुत हैं पर कोई मुद्दा नहीं ये शोर है, पर इसमें कोई मतलब नहीं...
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ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव

कांग्रेस की सरकार रहे या न रहे टशन तो वैसे ही बरकरार रहता है। पिछले दो साल से फुर्सत के क्षणों को राजनीतिक लाभ का जरिया बनाने की उधेड़बुन में यह भी भूल गए है कि कौन सा मुद्दा कांग्रेस को जिंदा कर सकती है। बढ़ते बिजली बिल को छोड़कर अब गुजरात जा रही बीमार बाधिन की रास्ते में मौत हो गई उस पर न विभाग रोया न फारेस्ट में रहने वाले बाघिन के रिश्तेदार रोए, आंसू तो कांग्रेसियों की रोके नहीं रूक रही है। जबकि पिछले दो साल गरीब, अमीर , मध्यमवर्गीय परिवार बिजली बिल से हलाकान है उस पर किसी कांग्रेसी आंदोलन चलाया न ही विरोध दर्ज कराया. क्या कांग्रेस सत्ता जाते ही मुद्दा विहीन हो गई है या आमजनता की परेशानी को मुद्दा ही नहीं बनाना चाहती है। जनता में खुसर-फुसर है कि ये कांग्रेस है भाई जो 70 साल राज करके सड़क में आई है लेकिन उसे गरीबों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है वह तो सिर्फ अपनी राजनीतिक ढपली बजाते हुए सत्ता में काबिज होना चाहती है। बिजली बिल से गांव-रगीब, किसान के साथ कांग्रेसी भी बिजली की करंट से हायतौबा मचा रहे है पर कांग्रेस के बड़े नेताओं का टशन मुद्दे के बजाय अपनी राजनीतिक चेहरा चमकाने में लगे है। इसी बात पर किसी ने ठीक ही कहा है कि बातें तो बहुत हैं , पर कोई मुद्दा नहीं ये शोर है, पर इसमें कोई मतलब नहीं।

पुलिस विभाग पर शनि की वक्रदृष्टि...

पुलिस वाला गुंडा सुना था, फिल्म और उपन्यास भी पढ़ा गया, मगर छत्तीसगढ़ में पुलिस वाला चोर और महिला शोषण करने वाले की चर्चा बड़े जोर शोर से हो रही है। क्या कमी रह गई है पुलिस की नौकरी में जो लाख दो लाख के लिए नियत खराब करना पड़ रहा है। अब एक एएसआई की पत्नी ने पुलिस के बड़े अधिकारी पर यौन शोषण का लिखित शिकायत कर तहलका मचा दिया है। मगर बड़े साहब ने भी उसी पीड़ित महिला की शिकायत पर अपनी सफाई के लिए डीजीपी को लिखित में पत्र लिखकर इसे ब्लेक मेलिंग करार दिया है। जनता में खुसुर -फुसुर है कि सच झूठ के दावे प्रतिदावे का खुलासा तो जांच के बाद होगा। कौन सच बोल रहा है औऱ कौन झूठ बोल रहा है। पुलिस जवान तो चोरी के मामले में सस्पेंड हो चुका है। अब बड़े साहब के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। रूको जरा इंतजार करो, पहले से कुछ फैसला मत लो। पुलिस पर जितने भी आरोप लगे है आज तक साबित नहीं हो पाया, सभी आरोपी बाइज्ज्त बरी हो चुके है। आखिर पुलिस महकमा का मामला है। आपसी समन्वय का मामला है, कोई न कोई फैसला जांच में आएगा ही तब तक इंतजार करें, कोई फैसला करने से पहले जांच रिपोर्ट को भी तवज्जो देने की जरूरत है।

गौरीशंकर के साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा

निगम मंडलों में मनपसंद निगम का अध्यक्ष नहीं बनाने के नाराज गौरी शंकर श्रीवास ने केस कला बोर्ड के उपाध्यक्ष का पद लेने से इंकार कर दिया । अब चोरों ने भी उनके कार को निशाना बनाने के साथ दिवाली पर मिले गिफ्ट औऱ दस्तावेज चोरी कर ले गए । राजधानी में भाजपा नेता की कार में तोड़फोड़ कर चोरी की घटना से हड़कंप मच गया है। भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास के वीआईपी स्टेट शंकर नगर निवास के बाहर अज्ञात चोरों ने उनकी कार पर तोड़फोड़ कर दीपावली गिफ्ट और दस्तावेज़ पर हाथ साफ़ किया है। अज्ञात चोर पकड़े जाने के डर से कार में लगा डीवीआर कैमरा भी निकालकर ले गए । जनता में खुसुर-फुसुर है कि ताज्जुब की बात है जिसकी सरकार है उनके नेताओं की कार औऱ दस्तावेज तक सुरक्षित नहीं है। खबरदारों की माने तो उनके ही विरोधी इस तरह की हरकत कर गौरी शंकर को परेशान करना चाह रहे है, फिल्म विकास निगम का अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन उसे भी मोना सेन को देकर सरकार ने गौरी शंकर की परीक्षा को औऱ कठिन कर दिया है। शायद पार्टी वाले कुछ औऱ अच्छा सोच रहे होंगे इसलिए उन्हें कुंदन बनाने तपा रहे है। उनके लिए कुछ बड़ा पद सोचा हो क्योंकि हमने बनाया है हम ही संवारेंगे इस सरकार का मूल मंत्र है लेकिन अब गौरा शंकर का धैर्य टूटने लगा है। जल्दी से कुछ दे दो तो नुकसान की भरपाई हो जाए।

मुख्य़धारा में लौटने की मार्मिक अपील

नक्सल प्रभावित इलाकों में एक भावनात्मक पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह पत्र आत्मसमर्पण कर चुके दो पूर्व नक्सलियों जानसी और जैनी द्वारा लिखा गया है। इस पत्र को नक्सल प्रभावित इलाकों में जगह-जगह फेंका गया है। पत्र के माध्यम से दोनों ने जंगल में सक्रिय नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। पत्र में पूर्व नक्सलियों ने अपने पुराने साथियों को संबोधित करते हुए लिखा है कि “आप लोग जंगल में परेशान होते रहते हैं और फालतू मरना पड़ता है। बीमारी, घुटनों का दर्द जैसी तकलीफों के बावजूद काम करना पड़ता है। इतनी मुश्किलों में जीना अब बेकार है। इसलिए एक बार सोचिए और मुख्यधारा में शामिल हो जाइए।” जनता में खुसुर-फुसुर है कि गृहमंत्री के डेड लाइन से पहले बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है। यह सरकार की उपलब्धि है। अब नक्सली ही आत्मसमर्पण के लिए पर्चा लिख रहे है। ताकि बस्तर में नए युग की शुरूआत हो सके। बस्तर के आदिवासियों वो सभी सुविधाएं मिले जो शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को मिलती है।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का लाभ किसको ...

भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री उज्जवला योजना अंतर्गत 10.33 करोड़ से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को घरेलू एलपीजी कनेक्शन देने के बाद एक बार फिर दीपावली के पूर्व लोगों को उपहार देते हुए पीएमयूवाय अंतर्गत 25 लाख नवीन उज्जवला गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ में 2 लाख 23 हजार नवीन घरेलू एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

नवीन उज्जवला गैस कनेक्शन के लिए छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।जनता में खुसुर-फुसुर है कि उज्ज्वला कनेक्शन तो पहले भी महिलाओं को मिला है पर वो न तो वो गरीब है न ही जंगल में रहने वाली है, संपन्न महिलाओ्ं ने वंचित महिलाओं के हक में पहले भी डाका डाला, अब फिर डाका डालने के की कवायद शुरू हो गई है। नेता, व्यापारी, अधिकारी के चहेतों को ही सरकारी योजना का लाभ मिलते आ रहा है। अब ढाई लाख कनेक्शन कहां खपाया जाएगा ये तो योजना वाले ही जाने ।

दिवाली पर होली जैसा रंगों की बौछार

सौहार्द के पर्व दिवाली पर भी राजनीतिक पार्टियां हल्के बयानबाजी से भी नहीं चूकते है, मौका मिलते ही बरसात कर देते है। भाजपा और कांग्रेस के बीच अब पटाखे वाली सियासत शुरु हो गई है. भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस और पीसीसी अध्यक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दीपक में परिपक्वता नहीं है। दिवाली का त्योहार है, मां लक्ष्मी और भगवान धनवंतरी की पूजा करें। कांग्रेस संगठन का काम सांप वाले पटाखे जैसा है। वह किसी की तुलना पटाखे से नहीं करें, अगर बम फट गया तो आंख चौंधिया जाएगी। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने पलटवार करते हुए कहा कि पुरंदर मिश्रा को बीजेपी के बमों का अध्ययन करना चाहिए. वो स्वयं फुस्सी बम है। बीजेपी में बहुत सारे बम है. स्वास्थ्य बम है। तेज आवाज करने वाले बड़बोला बम है मंत्री ओपी -लक्ष्मी बम है, जहां भी हाथ मारेंगे, वहां से लक्ष्मी आएगी।जनता में खुसुर-फुसुर है कि त्योहारी सीजन आते ही नेता मंत्री भकवा जाते है, इसलिए विपक्ष सत्ता पक्ष की किरकरी करने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। वहीं सत्ता से बाहर विपक्ष मौके की तलाश में अपनी ही भद पिटवा लेते है। सौहार्द्र को राजनीतिक सूचिता में शािमल किया जाए ताकि इस तरह के अनर्गल प्रलाप से राजनीति दूषित न हो।

हर बार छत्तीसगढ़ियों के हक में डाका क्यों ...

छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी है या छलने की साजिश। छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल ने रसायनज्ञ के पदों पर सीधी भर्ती निकाली है। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 16 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 14 नवंबर है। कुल 13 पदों के लिए यह भर्ती निकाली गई है, जिनमें अनारक्षित 5, अनुसूचित जनजाति 4, अनुसूचित जाति 2 और अन्य पिछड़ा वर्ग 2 पद शामिल हैं। उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए. अधिकतम आयु छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार छूट प्रदान की जाएगी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार पहले बताए कि परीक्षा कौन लेगा पीएससी या व्यापम । पहले भी पीएससी को उसके कर्ताधर्ताओं ने परिवारवाद के जरिए कंलंकित कर चुके है। वहीं व्यापम की तो कोई माई बाप ही नहीं है। वहां तो फुल सेटिंग वाले आरोप लगातार लगते रहे है। सवाल उठता है कि उनकी परीक्षा कौन लेगा पीएससी औऱ व्यापम तो ब्लेक लिस्टेट हो गए है। यदि विभागीय परीक्षा होगी तो वो पूरी तरह घल्लूघारा हो जाएगा। परदेशी अधिकारियों के देखरेख में परीक्षा होगी तो मूल छत्तीसगढि़यों को इसका लाभ मिलना संभव ही नहीं है । क्या हर बार इस बार भी छत्तीसगढ़ियों को ही छला जाएगा।

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