छत्तीसगढ़

नक्सल पीड़ितों की आवाज अब दिल्ली तक: विजय शर्मा

Shantanu Roy
1 Jun 2025 9:27 PM IST
नक्सल पीड़ितों की आवाज अब दिल्ली तक: विजय शर्मा
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Bastar. बस्तर। एक समय था जब बस्तर के आदिवासी और ग्रामीण माओवादी हिंसा के डर से सहमे रहते थे, अपनी पीड़ा को व्यक्त करना तो दूर, शासन-प्रशासन से न्याय की अपेक्षा भी नहीं कर पाते थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। बस्तर बदल रहा है- यही संदेश छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर से दिया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के माओवाद प्रभावित इलाकों में अब लोग खुलकर अपनी बात कह पा रहे हैं, और अपने अधिकारों की मांग दिल्ली तक पहुंचा चुके हैं। वे अब सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि बदलाव के वाहक बन चुके हैं। यह परिवर्तन शासन, प्रशासन और जनता के साझा प्रयासों का परिणाम है।

बस्तर की पीड़ा अब राष्ट्रव्यापी विमर्श का हिस्सा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दशकों तक नक्सली हिंसा की मार झेलते रहे बस्तर के लोग अब अपनी पीड़ा और संघर्ष की गूंज दिल्ली के दरबार तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। यह न केवल प्रशासनिक परिवर्तन का संकेत है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और लोकतांत्रिक सहभागिता का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अब माओवादी हिंसा से पीड़ित लोग केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं बैठे हैं, बल्कि वे अपने अधिकारों, अपने क्षेत्र के विकास और न्याय के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। बस्तर की यह चेतना अपने आप में एक ऐतिहासिक बदलाव है।


तियानमेन स्क्वायर की तिथि पर होगा विशेष आयोजन
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने जानकारी दी कि चीन के 'तियानमेन स्क्वायर नरसंहार' की तिथि, 4 जून को बस्तर में माओवादी हिंसा से पीड़ित लोगों द्वारा एक जनआंदोलन जैसा आयोजन किया जाएगा। इस दिन बस्तर के कई क्षेत्रों में लोग एकजुट होकर अपनी पीड़ा और संघर्ष को सांकेतिक रूप से उजागर करेंगे। यह आयोजन न केवल बस्तर की आंतरिक चेतना का प्रतीक होगा, बल्कि यह भारत और विश्व के समक्ष यह संदेश देगा कि बस्तर के लोग अब चुप नहीं हैं। अब वे गोलियों के साए से निकलकर लोकतांत्रिक आवाज़ की ताकत के साथ खड़े हैं।

दिल्ली तक पहुंची बस्तर की आवाज
विजय शर्मा ने गर्व के साथ कहा कि हाल ही में कई नक्सल पीड़ित समूहों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से दिल्ली में मुलाकात कर अपनी समस्याएं साझा कीं। इस मुलाकात में उन्होंने नक्सलवाद के कारण वर्षों से उपेक्षित जीवन, शोषण और विस्थापन की त्रासदी के बारे में बताया। राष्ट्रपति महोदया ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनकी पीड़ा को समझा जाएगा और केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों मिलकर ऐसे क्षेत्रों के विकास और पुनर्वास के लिए ठोस योजनाएं बनाएंगे।

बस्तर के लिए विकास की नई इबारत
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बस्तर के पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लिए कृतसंकल्पित है। चाहे वह सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि, पशुपालन हो या फिर सांस्कृतिक पुनर्जीवन, सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के गांव-गांव में पुलिस के खौफ की जगह विश्वास की बात होती है, और माओवादियों के डर की जगह शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के अवसरों की चर्चा होती है। श्री शर्मा ने यह भी कहा कि नक्सलवाद से लड़ने का सबसे सशक्त तरीका जन-जागृति और विकास है। जब जनता को विकल्प मिलता है, शासन का साथ मिलता है, तो वे कभी हिंसा के रास्ते पर नहीं जाते। बस्तर के वर्तमान हालात इस सिद्धांत को मजबूत करते हैं।
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