छत्तीसगढ़

देसी फ्रिज का चलन तेजी से, शहरों में गांव से ज्यादा डिमांड

Nil dhankar
6 March 2025 7:14 AM IST
देसी फ्रिज का चलन तेजी से, शहरों में गांव से ज्यादा डिमांड
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धमतरी। गर्मी के सीजन में देसी फ्रिज यानी मिट्टी के बने मटका का डिमांड बढ़ जाता है। मिट्टी के बने मटका के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है, लेकिन जब से बाजार में इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज ने पैर पसारा है तब से देसी फ्रिज की डिमांड में बेहद कमी आई है। मटके के बाजार को मानो सांप सूंघ गया है। मिट्टी से बने बर्तन के इस्तेमाल नहीं कर रहे है। जिनके चलते कुम्हारों का पुस्तैनी कार्य विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है।

गर्मी के दिनों में जब प्यास लगता है तो गला सूखता है। गले को तर करना है तो शीतलपेय ठंडी कोल्ड्रिंग्स की ओर लोगो का ध्यान जाता है। मिट्टी के बर्तन को सेहतमंद माना जाता है। पहले के लोग मिट्टी से बने बर्तन मटका आदि सामग्री का खुलकर इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब मिट्टी के बर्तनों की डिमांड में कमी आई है। मिट्टी के बर्तन घड़ा देसी फ्रिज बनाने वाले कुम्हारों के मुंह से निवाला ही छिन लिया है। गर्मी के सीजन में देसी फ्रिज यानी मिट्टी से बने घड़े की डिमांड मानो आसमान छूआ करती थी, लेकिन जब से फ्रिज बर्तन आधुनिकता से आने लगा तब से मानो मिट्टी से बने सामग्री को कोई पूछने वाला तक नहीं है।

कुम्हारों ने बताया कि पुस्तैनी काम को लेकर आने वाली पीढ़ी के बच्चे इस कार्य को लेकर चिंतित है। यही वजह है कि अब कुम्हार जाती के लोग अपने पुस्तैनी कामकाज को छोड़ रहा है और अपने पुस्तैनी परम्परा को अलविदा कहते हुए दूसरे काम पर फोकस कर रहे हैं और अब कुम्हारों की पुस्तैनी व्यवसाय अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है।

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