सिस्टम ताक पर, माफिया व ड्रग कंट्रोलर कर रहे जानलेवा कारोबार

नकली दवा के कारोबार में ड्रग माफिया और औषधि विभाग की मिलीभगत
ड्रग अधिकारी नक़ली दवा कारोबारियों से वसूल रहे मनमाना पैसा
कांग्रेस सरकार का बना हुआ सिस्टम अभी भी बरकरार
नकली दवा बिकने का मांगा जा रहा है सबूत दो, तब होगी कार्रवाई
ड्रग माफिया को मिल रहा ड्रग विभाग के अधिकारियों का पूरा संरक्षण अधिकारियों की मनमानी
दवाईयों का मानक जांच करने के लिए छत्तीसगढ़ ड्रग कंट्रोल विभाग की आधुनिक लेब्रोटरी भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग सहित ड्रग कंट्रोल के अधिकारी ह ता वसूली में दवा मार्केट में खुलेआम दिख रहे
दवाईयों के प्रमाणिकता को पुष्टी करने के लिए डिस्ट्रीबूटर के रजिस्टर में नियमिक रूप से जांच और भौतिक सत्यापन करना कानून जरूरी
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ते जा रहा है। कभी-कभार कार्रवाई होती भी है तो ड्रग विभाग के अधिकारी दवा दुकानों के संचालकों से मिलकर मामला रफा-दफा करने में जुट जाते हैं। इससे पता चलता है कि नकली दवाओं के कारोबार में ड्रग माफिया और ड्रग विभाग के घालमेल से ही तेजी से फल-फूल रहा है। मीडिया वाले जब नकली दवाओं की बिक्री को लेकर खुलासा करते हैं तो ड्रग कंट्रोलर और निरीक्षक उस पर कार्रवाई के लिए सबूत मांगते हैं। पूछते हैं कि नकली दवा बिक रही है इसका सबूत दो, तब जाकर हम कार्रवाई करेंगे। साफ है ड्रग विभाग के अधिकारियों का पूरा संरक्षण ड्रग माफिया को मिल रहा है। ड्रग अधिकारी नक़ली दवा कारोबारियों से मनमाना पैसा वसूल रहे है, जबकि ड्रग कंट्रोल विभाग का दवा दुकानों में नियमित जाँच कर दवाओं की क्वालिटी उसके मानकों की जानकारी लेना होता है। दवा कितने एमजी की है और जितनी मात्रा रेपर में दर्शाइ गई है उतनी हैं या नहीं, दवाओं में जिन चीजों का इस्तेमाल हुआ है उसकी मात्रा दर्शाए गए चार्ट के अनुसार है या नहीं यह भी जांचना होता है। लेकिन जब कंट्रोलर और उनका पूरा विभाग नींद में हो और पत्रकारों से सबूत मांगे और उनके जुटाए तथ्यों पर निर्भर रहकर कार्रवाई करे तब तो उनकी जि मेवारियों के प्रति सजगता और कत्र्तव्यपरायणता को समझा जा सकता है। जनता से रिश्ता अख़बार पिछले 11 वर्षों से लगातार परत दर परत अंदर की ख़बर प्रकाशित करते जा रहा है नक़ली माल का जख़़ीरा ष्ठष्ठ नगर, टाटीबंध, मोवा, देवेंद्र नगर, कटोरा तालाब, तेलीबांधा, श्याम नगर, भनपुरी जैसे इलाकों में गोडाउन लेकर रखा जा रहा है।
जनता से रिश्ता के पास इसका पु ता सबूत है कि छत्तीसगढ़ में कई बड़ी व नामी कंपनियों की नक़ली दवाई का विक्रय बहुत ज़ोर शोर से चालू है और असली दवाई में भी मानक स्तर और उसकी प्रमाणित गुणवत्ता की कमी पाई गई है। नियमित जाँच और प्रमाणीकरण तथा गुणवत्तापूर्ण दवाइयों का मानक जो दवाओं के रैपर में लिखा होता है उसकी जाँच लगातार रूटिंग में ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा किया जाना है, सरकार का नियम और क़ानून है लेकिन ड्रग इन्स्पेक्टर मंथली पेमेंट में नर्सिंग होम डॉक्टर और मेडिकल स्टोर होलसेल मेडिकल वालों से अपना पेमेंट लेने में अपना परम कर्तव्य मानकर पैसा लेने से फुरसत ही नहीं पा रहे हार्ट पेशेंट के लिए दवाई हो या सिर दर्द की दवाई हों या कैंसर की दवाई हो या पैरासिटामोल की कोई भी दवाई हो सबका मामला एक जैसा है अमानक स्तर होने की वजह से लगातार इसका बुरा असर लोगों पर हो रहा है, जिसकी वजह से कैंसर जैसी महामारी छत्तीसगढ़ की जनता में फैलते जा रही है। मेडिकल साइंस नियम के अनुसार भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के क़ानून अनुसार ड्रग्स विभाग को लगातार हर ब्रांड की दवाइयों की जाँच करना प्रतिमाह अति आवश्यक और डीलर डिस्ट्रीब्यूटरों के यहाँ दबिश देकर रजिस्ट्रार ऑफ़ स्टॉक का मिलान करना भी अति आवश्यक रजिस्टर और स्टॉक का मिलान नहीं होने के कारण जो होल सेल व्यापारी है छत्तीसगढ़ में मनमाना ग़ैर क़ानूनी रूप से स्टॉक दवाइयों का नक़ली दवाईयां रखने की आदत बना ली है।
अधिकारियों की मनमानी के चलते विभाग के मंत्री भी लाचार नजर आ रहे हैं। इससे यह प्रतित होता है भारतीय जनता पार्टी की सरकार को अधिकारी जो कांग्रेस पार्टी से समर्पित और कांग्रेस सरकार के समय से पदस्थ हैं वह अपना सिस्टम बनाकर विभाग को और सरकार को गुमराह कर रहे हैं। जिससे छत्तीसगढ़ की जनता को मोटी रकम खर्च करने के बावजूद नकली दवाओं का सेवन करना पड़ रहा है और बड़ी-बड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर निक मे विभाग के अधिकारियों के कारण सरकार की बदनामी गरीब जनता के बीच में हो रही है।..





