छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क कार्यालय में हमले पर संघ ने की कड़ी निंदा, दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग

Shantanu Roy
9 Oct 2025 8:28 PM IST
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क कार्यालय में हमले पर संघ ने की कड़ी निंदा, दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ के अध्यक्ष बालमुकुंद तंबोली ने रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय, नवा रायपुर में हुई अभद्रता, गाली-गलौज, झूमा-झटकी, तोड़फोड़ और धमकी की घटना की कड़ी निंदा की है। इस घटना में विभागीय अपर संचालक संजीव तिवारी को निशाना बनाया गया था। तंबोली ने इस घटना को केवल एक अधिकारी के प्रति हमला नहीं, बल्कि पूरे जनसंपर्क विभाग की संस्थागत गरिमा पर सीधा आघात करार दिया। उन्होंने कहा कि हमलावरों का शासकीय कार्यालय में एक साथ घुसना, वरिष्ठ अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करना, सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त करना और खुलेआम धमकियां देना योजनाबद्ध और सोची-समझी साजिश का स्पष्ट संकेत है।
इस मामलें में एक वरिष्ठ अधिकारी जानकारी देते हुए बताया है कि आरोपी पत्रकार ब्लैकमेलिंग मामलें में जेल की हवा खा चुका है और 100 -200 कॉपी छापकर विज्ञापन पर अपना अधिकार मानकर सरकार को और विभाग को उलटी-सीधी उटपटांग खबर प्रकाशित करने का भय दिखाकर विज्ञापन के बहाने से अधिकारियों के पास उपस्थित होते है। जिससे कि फर्जी पत्रकारों को अधिकारियों को बात-चीत का अवसर और करीब आने का अवसर मिल जाता है। जिसके परिणित ये घटना हो गई। विगत दिनों इसी तरह की एक साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक द्वारा ओछी और निंदनीय हरकत करने के कारण अखबार कार्यालय में बाटने में प्रतिबंध किया गया था और गेट में गार्ड के पास छोड़ने का आदेश जारी हुआ था। अब जाल-साज ब्लैकमेलर पत्रकार द्वारा अशोभनीय और कड़ी निंदनीय घटना को अंजाम कार्यालय में देने के कारण और अधिकारियों से दुर्व्यहार करने के कारण हो सकता है कि जनसम्पर्क कार्यालय नवा रायपुर में गेट में अपॉइंटमेंट मिलने के बाद ही अंदर एंट्री दी जाएगी। बिना
अपॉइंटमेंट के किसी भी पत्रकार को या अखबार कार्यालय के कर्मचारी को प्रवेश नहीं दिया जायेगा। इसी तरह की व्यवस्था चंडीगढ़, कोलकाता, गुजरात, पंजाब, बंगलुरु, मुंबई सचिवालय में प्रचलित है। इससे अवांछित तत्व और गंदगी फैलाने वालों पर कड़ी से कड़ी पाबंदी मानी जा सकती है।




श्री तंबोली ने कहा, "यह घटना केवल व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र और शासन के जनकल्याणकारी कार्यों पर हमला है। जनसंपर्क विभाग समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुँचाने का कार्य करता है और अधिकारी निष्ठा के साथ इस कार्य में लगे हुए हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता की आड़ में गुंडागर्दी करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई आवश्यक है। जनसंपर्क अधिकारी संघ ने घटना के संदर्भ में कहा कि इस प्रकार की हरकतें केवल एक अधिकारी की गरिमा पर आघात नहीं करती, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता और भरोसे को चुनौती देती हैं। श्री तंबोली ने दोषियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कठोर धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।


साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध किया कि वे इस प्रकरण में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें और विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा प्रदान करें। संघ ने यह भी निर्णय लिया कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल भेंट करेगा, ताकि इस गंभीर मामले में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। श्री तंबोली ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनसंपर्क विभाग के अधिकारी और कर्मचारी राज्यव्यापी विरोध आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा, "हम केवल अपने अधिकार और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन और शासन के सुचारु संचालन के लिए यह आवश्यक है कि असामाजिक तत्वों को कानून के कठोर दायरे में लाया जाए।"इस घटना ने राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में सुरक्षा और कार्यक्षमता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। संघ ने इसे न सिर्फ विभागीय समस्या बल्कि शासन और प्रशासन की गरिमा पर हमला बताया। श्री तंबोली ने कहा कि जनसंपर्क विभाग न सिर्फ शासन की योजनाओं को जनता तक पहुँचाता है, बल्कि पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के हित में भी कार्य करता है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएँ विभाग की कार्यक्षमता और अधिकारियों की प्रतिबद्धता को कमजोर करने का प्रयास हैं।
संघ ने मांग की है:
घटना में शामिल सभी व्यक्तियों की तत्काल गिरफ्तारी।
भारतीय दंड संहिता की कठोर धाराओं के तहत अपराध दर्ज करना।
दोषियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच।
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना।
मुख्यमंत्री से शीघ्र प्रतिनिधिमंडल की भेंट।
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क अधिकारी संघ ने स्पष्ट किया कि यदि शासन और प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो विभाग के अधिकारी राज्यव्यापी विरोध और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इस पूरे प्रकरण से यह साफ हो गया है कि सरकारी कार्यालयों में असामाजिक तत्वों की हरकतें बढ़ रही हैं और इसके खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
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