दूरस्थ अंचल में हैंडपंप संधारण कार्य में महिला तकनीशियनों की भूमिका सराहनीय

जशपुर जिले के विभिन्न विकासखण्डों के अंतर्गत 109 ग्रामों के 139 बसाइटों में स्थापित 189 नग हैण्डपंपों में ग्रीष्म ऋतु में भू-जल स्तर नीचे जाने के कारण कम मात्रा में पानी आने की शिकायतें मिलती हैं। वर्तमान में जिले का औसत भू-जल स्तर लगभग 1200 मीटर है। जिले के जशपुर, मनोरा तथा पत्थलगांव विकासखण्ड में अन्य विकासखण्डों की तुलना में भू-जल स्तर नीचे जाने की शिकायत अधिक है। भू-जल स्तर नीचे जाने वाले हैण्डपपों में राईजर पाईप बढ़ाकर चालू किया जा रहा है। ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में ग्राम पंचायतों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
हैण्डपंप के चारों ओर बनाया गया प्लेटफार्म एवं नाली न टूटे तथा हैण्डपंप के आसपास गन्दे पानी का जमाव न हो ताकि गंदगी न फैले तथा मच्छर मक्खी न हो इसलिए ग्राम पंचायतों को हैण्डपप के चारों ओर तथा गड्ढों में मुरूम डलवाना चाहिए। जिससे कि पेयजल स्त्रोत सुरक्षित हो तथा ग्राम भी साफ सुथरा लगे ।
पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु सभी ग्रामों में 05-05 महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से स्थल पर ही जल परीक्षण किये जाने हेतु प्रशिक्षित किया गया है। अब तक जिले में 53103 नग जल परीक्षण फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से किया जा चुका है। जिले में स्थापित सभी हैण्डपंपों तथा अन्य पेयजल स्त्रोतों का मानसून के पूर्व तथा वर्षा ऋतु के समाप्ति उपरान्त दो बार सोडियम हाइपोक्लोराइड द्वारा निर्जीवीकरण किया जाता है और वर्ष में एक बार बैक्टिरियोलॉजिकल परीक्षण किया जाता है। फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल परीक्षण में यदि किसी विशेष पैरामीटर का परिणाम अधिक आता है तो पेयजल का नमूना जिला स्तरीय जल परीक्षण प्रयोगशाला में लाकर परीक्षण किया जाता है। जिला स्तरीय जल परीक्षण प्रयोगशाला में सभी पैरामीटर के परीक्षण की सुविधा है तथा कोई भी निर्धारित राशि का भुगतान कर जल नमूनों की जांच करवा सकता है। जशपुर जिला स्तरीय प्रयोगशाला को शीघ्र ही एन.ए.बी.एल. मान्यता की सम्भावना है। इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं।





