छत्तीसगढ़
नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब तेजी से हो रहा साकार: CM साय
Shantanu Roy
12 Dec 2025 6:49 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बार फिर बड़ा कदम सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर आज ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। लगातार आत्मसमर्पण, विकास कार्यों में तेजी और सुरक्षा बलों की रणनीतिक पहल से क्षेत्र में शांति की नई राह मजबूत होती जा रही है। इसी क्रम में सुकमा जिले में शनिवार को पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत दरबा डिवीजन कमेटी के सक्रिय माओवादियों सहित 10 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया। इनमें 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर कुल ₹33 लाख का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर कई गंभीर घटनाओं में शामिल होने के आरोप रहे हैं और सुरक्षा बल लंबे समय से इनकी तलाश में थे।
नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब तेजी से हो रहा साकार
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) December 12, 2025
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में बस्तर आज ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है।
आज पुनः सुकमा जिले में पूना मारगेम – पुनर्वास से…
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा के मार्ग में न तो वर्तमान सुरक्षित होता है और न भविष्य। राज्य सरकार की विशेष पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को नया जीवन देना है। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सरकार सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की गारंटी प्रदान करती है। CM साय ने कहा कि मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों के लिए सुरक्षित जीवन की शुरुआत ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी यह एक नई उम्मीद है। “वे अब अपने परिवार के साथ स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी, ताकि वे समाज में दोबारा मजबूती से खड़े हो सकें,” उन्होंने कहा।
राज्य सरकार के अनुसार, पूना मारगेम कार्यक्रम का उद्देश्य है कि जो माओवादी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें पुनर्वास के ऐसे अवसर दिए जाएं, जिससे वे हिंसा-मुक्त जीवन की ओर बढ़ सकें। कार्यक्रम के तहत आवास, शिक्षा, प्रशिक्षण, व्यवसायिक सहायता और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। बस्तर में पिछले एक वर्ष के दौरान बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों में विश्वास बढ़ा है। लगातार हो रहे समर्पण से यह संकेत मिलता है कि नक्सल संगठन कमजोर पड़ रहे हैं और विकास की नीतियाँ लोगों तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—छत्तीसगढ़ को पूर्णत: नक्सलवाद मुक्त बनाना। बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देनी है। इस दिशा में सरकार, सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं।” बस्तर क्षेत्र में चल रहे अभियान ने एक बार फिर साबित किया है कि संवाद, सहयोग और विकास ही स्थायी शांति का रास्ता हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन 10 माओवादियों का मुख्यधारा में लौटना इसी परिवर्तन की मजबूत कड़ी है।
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