छत्तीसगढ़

विधवा रतनी अगरिया की PM आवास योजना ने बदली जिंदगी

Shantanu Roy
29 Oct 2025 7:33 PM IST
विधवा रतनी अगरिया की PM आवास योजना ने बदली जिंदगी
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Raigarh. रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत महलोई (जनपद पंचायत तमनार) की रहने वाली रतनी अगरिया नामक विधवा महिला की जिंदगी आज एक नई उम्मीद की किरण से जगमगा उठी है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) वर्ष 2024-25 के तहत मिली 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता से रतनी ने अपनी जर्जर झोपड़ी को एक मजबूत पक्के मकान में बदल दिया है। यह केवल एक आवास की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला के संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है जिसने गरीबी और विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाई। रतनी अगरिया की यह सफलता छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जिन्होंने जीवनभर संघर्ष किया पर कभी हार नहीं मानी।

संघर्ष की छाया में बीता जीवन
रतनी अगरिया एक साधारण किसान परिवार से हैं। उनके पति भागीरथी अगरिया की असामयिक मृत्यु के बाद वह अकेले ही अपने दो बच्चों की परवरिश करने लगीं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण परिवार का जीवन अत्यंत कठिन हो गया। रतनी बताती हैं, “मेरी झोपड़ी इतनी कमजोर थी कि बारिश के दिनों में पानी अंदर तक टपकता था। हवा चलती तो दीवारें हिलने लगतीं। बच्चों को सर्दी-खांसी हो जाती, लेकिन इलाज कराने के पैसे नहीं होते।” गांव में मजदूरी का काम भी नियमित नहीं था। कभी-कभी मनरेगा के तहत कुछ दिनों का रोजगार मिलता, जिससे किसी तरह घर का खर्च चलता था। “कई बार दिन-रात खेतों में काम करने के बाद भी बच्चों का पेट भरना मुश्किल हो जाता था,” रतनी कहती हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली जिंदगी
वर्ष 2024 में जब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों की सूची जारी हुई, तो उसमें रतनी अगरिया का नाम भी शामिल था। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों को पक्का मकान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रायगढ़ जिले के तमनार जनपद पंचायत के अधिकारियों ने रतनी के आवेदन को प्राथमिकता दी और उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सहायता से दी गई। योजना के तहत लाभार्थियों को निर्माण सामग्री और मजदूरी के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि वे स्वयं या स्थानीय मजदूरों की मदद से घर का निर्माण कर सकें। रतनी बताती हैं, “मुझे मनरेगा के तहत 90 दिनों का काम भी मिला। इससे जो मजदूरी मिली, वह मैंने घर के निर्माण में लगाई। आज मेरा घर मजबूत और सुरक्षित है।”

सिर्फ छत नहीं, आत्मसम्मान और सुरक्षा भी मिली
प्रधानमंत्री आवास योजना ने रतनी अगरिया को केवल एक पक्का घर ही नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और आत्मसम्मान भी प्रदान किया है। अब उनके बच्चे बारिश और ठंड से सुरक्षित हैं और रतनी के चेहरे पर वर्षों बाद सुकून की मुस्कान लौटी है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024-25 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों नए आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत आवास विधवाओं और एकल महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। रतनी जैसी कहानियां यह साबित करती हैं कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन की मिसाल
रतनी अगरिया की कहानी इस बात का प्रतीक है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही और पारदर्शी क्रियान्वयन किया जाए, तो वे वास्तव में जन-जीवन को बदल सकती हैं। पंचायत और जनपद प्रशासन के प्रयासों से यह संभव हुआ कि रतनी जैसी जरूरतमंद महिला तक योजना का लाभ पहुंचा। तमनार जनपद के एक अधिकारी ने बताया, “हमारी प्राथमिकता हमेशा जरूरतमंद वर्ग तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को स्थायी आवास का सपना साकार किया है।”

रतनी अगरिया- प्रेरणा का प्रतीक
रतनी का नया घर आज सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उनके हौसले, आत्मनिर्भरता और सरकारी सहयोग का प्रतीक है। वे अब गांव की अन्य महिलाओं को भी योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करती हैं। रतनी मुस्कुराते हुए कहती हैं, “अब मेरे बच्चों के सिर पर मजबूत छत है। सरकार ने मुझे फिर से जीने की उम्मीद दी है। मैं चाहती हूं कि हर गरीब महिला को भी ऐसा मौका मिले।”
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