छत्तीसगढ़
कलम बंद–काम बंद आंदोलन का ज़बरदस्त असर, पूरे प्रदेश में सरकारी कामकाज ठप
Shantanu Roy
30 Dec 2025 6:59 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन द्वारा प्रदेशभर में कर्मचारियों के हितों से जुड़ी मांगों को लेकर किए गए आंदोलन का आज व्यापक असर देखने को मिला। फेडरेशन की कलम बंद–काम बंद हड़ताल के चलते इंद्रावती भवन सहित अनेक शासकीय कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा और अधिकांश स्कूलों में ताले लटके दिखाई दिए। नगरीय निकायों के कर्मचारियों ने अवकाश लेकर प्रदर्शन में भाग लिया, वहीं विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारियों ने भी अवकाश लेकर आंदोलन का समर्थन किया। नवा रायपुर स्थित विभागाध्यक्ष, निगम, बोर्ड आदि कार्यालयों में भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कलम बंद रखकर आंदोलन का समर्थन किया, जिसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नवा रायपुर स्थित शासकीय कार्यालयों तक पहुंचना भी कठिन हो गया।
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा एवं संभाग प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी के मार्गदर्शन में रायपुर में आयोजित आंदोलन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। जिला संयोजक पीतांबर पटेल, नवा रायपुर विभागाध्यक्ष कार्यालय के अध्यक्ष जयकुमार साहू एवं नवा रायपुर संयोजक संतोष कुमार वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में नारा लगाया। महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और बलौदाबाजार में भी संबंधित जिला संयोजकों टेकराम सेन, चंदूलाल चंद्राकर, एम. आर. खान और एल. एस. ध्रुव के नेतृत्व में “अब नई सहिबो, मोदी के गारंटी लेकर रहीबो” जैसे नारों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया गया। आंदोलन में सभी जिलों के कर्मचारियों और शिक्षकों ने अवकाश लेकर सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया। इसी तरह दुर्ग संभाग में संभाग प्रभारी राजेश चटर्जी के मार्गदर्शन में और जिला संयोजक विजय लहरे के नेतृत्व में कलम बंद–काम बंद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला। राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम और मानपुर–मोहला में क्रमशः जिला संयोजक सतीश व्यौहारे, लोकेश साहू, अश्वनी बनर्जी, अर्जुन चंद्रवंशी और ओ. पी. माहला के नेतृत्व में रैलियां निकाली गईं और कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
बिलासपुर संभाग में संभाग प्रभारी जी. आर. चंद्रा और रोहित तिवारी के मार्गदर्शन में तथा जिला संयोजक डॉ. बी. पी. सोनी के नेतृत्व में हुए आंदोलन में कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। जांजगीर–चांपा, कोरबा, मुंगेली, गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, रायगढ़ और सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिलों में भी जिला संयोजकों विश्वनाथ परिहार, के. आर. डहरिया, जे. एस. ध्रुव, डॉ. संजय शर्मा, आशीष रंगारी और फकीरा यादव के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन हुए और बड़ी संख्या में कर्मचारियों एवं शिक्षकों ने अवकाश लेकर भागीदारी की। बस्तर संभाग में संभाग प्रभारी कैलाश चौहान और टार्जन गुप्ता के मार्गदर्शन में तथा जिला संयोजक गजेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में जगदलपुर में जबरदस्त उत्साह के साथ आंदोलन हुआ। कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में भी जिला संयोजकों प्रमोद तिवारी, शिवराज सिंह ठाकुर, डॉ. दीपेश रावतें, के. डी. राव, अरविंद यादव और विनायक साहू के नेतृत्व में रैलियां और धरने आयोजित किए गए।
इसी प्रकार सरगुजा संभाग में संभाग प्रभारी ओंकार सिंह और नृपेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में अंबिकापुर के जिला संयोजक कमलेश सोनी के नेतृत्व में कर्मचारियों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिलों में भी संबंधित जिला संयोजकों डॉ. आर. एस. सिंह, डॉ. आर. एस. चांदे, डॉ. दीपेश रावटे, संतोष कुमार तांडे और गोपाल सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपे और नारे लगाए। फेडरेशन द्वारा घोषित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की जमीन तैयार हो चुकी है। 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक घोषित काम बंद–कलम बंद आंदोलन को प्रदेशभर में व्यापक समर्थन मिल रहा है। फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार शीघ्र ही सार्थक संवाद प्रारंभ नहीं करती, तो फेडरेशन अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान करने के लिए बाध्य होगा।
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान कर्मचारियों एवं पेंशनरों को देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना, डीए एरियर्स की राशि को कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में समायोजित करना, सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान प्रदान करना, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने हेतु पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, शिक्षकों की सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से मानकर समस्त सेवा लाभ देना, सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान देना, अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण, प्रदेश में कैशलेस उपचार सुविधा लागू करना, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, अर्जित अवकाश के नगदीकरण की सीमा 300 दिवस करना, दैनिक, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की ठोस नीति बनाना तथा सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने जैसी मांगें शामिल हैं। प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी जिला संयोजकों एवं कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा है और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन संवाद और समाधान चाहता है, लेकिन यदि सरकार चुप्पी साधे रहती है, तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा।
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