छत्तीसगढ़
‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान बनेगा जल क्रांति का आधार, सूखे से जूझते गांवों को मिलेगा स्थायी समाधान
Shantanu Roy
1 April 2026 11:48 PM IST

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MCB. एमसीबी। जिले में जल संकट और सूखे की चुनौती से निपटने के लिए अब प्रशासन ने एक व्यापक और दूरदर्शी पहल शुरू की है। “नवा तरिया आय के जरिया” थीम के साथ ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में खड़गवां विकासखंड स्तर पर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब जल संरक्षण केवल योजना नहीं, बल्कि प्राथमिकता और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव उपाय कर जल संचयन और संवर्धन के कार्यों को तेज किया जाए, ताकि गांवों को स्थायी रूप से जल संकट से राहत मिल सके।
बैठक में निर्देश दिए गए कि मनरेगा, कृषि, मत्स्य पालन और वन विभाग मिलकर नए तालाब (तरिया) निर्माण, अमृत सरोवर विकास और जल संरचनाओं के निर्माण को गति दें। इससे न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि खेती और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। जल स्तर सुधारने के लिए कंटूर ट्रेंच, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), मिट्टी के बांध और परकोलेशन टैंक जैसे कार्यों को प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। भूमि संरक्षण विभाग को माइनर टैंक निर्माण और जल संसाधन विभाग को लिफ्ट इरिगेशन व नहरों के मरम्मत कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।
कलेक्टर ने दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए नई जल संरचनाओं के निर्माण पर जोर दिया। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही इस अभियान को तेज गति देने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक सभी प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की समय सीमा तय करते हुए कहा कि इसमें किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि “मोर गांव मोर पानी” अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी से जोड़ना होगा। मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और बीआरएलएफ (BRLF) के अभिसरण से इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जाएगा। यह पहल न केवल जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि आने वाले समय में सूखे से जूझते गांवों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है। “नवा तरिया आय के जरिया” अब जिले में जल समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनने जा रहा है।
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