छत्तीसगढ़

बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने मांगा जवाब

Shantanu Roy
2 Aug 2026 11:24 PM IST
बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने मांगा जवाब
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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित फोन बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। सांसद की शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों के व्यवहार को लेकर निशाना साधा।
दरअसल, बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने 20 मई को फोन पर बातचीत के दौरान उनके साथ कथित रूप से रूखा और अपमानजनक व्यवहार किया। सांसद का आरोप है कि अधिकारी ने बातचीत के दौरान ऐसा रवैया अपनाया जो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के सम्मान के अनुरूप नहीं था। शिकायत में सांसद ने कथित बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा है कि स्वास्थ्य सचिव की ओर से उन्हें “जो करना है कर लो” जैसे शब्द कहे गए। बृजमोहन अग्रवाल ने इसे संसदीय मर्यादा, संवैधानिक मूल्यों और अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के खिलाफ बताया है।
सांसद के अनुसार, उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर स्वास्थ्य सचिव को पत्र और रिमाइंडर भेजे थे, लेकिन लंबे समय तक उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जनहित से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर जवाब नहीं मिलने से क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। शिकायत के मुताबिक, 20 मई को सांसद ने शाम करीब 5:43 बजे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को फोन कर स्वास्थ्य विभाग की कथित निष्क्रियता की जानकारी दी थी। इसके बाद प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से चर्चा कर उन्हें सांसद से बातचीत कर लंबित मामलों के समाधान के निर्देश दिए।
इसके बाद शाम करीब 7:44 बजे अमित कटारिया की ओर से सांसद को फोन किया गया। उस समय बृजमोहन अग्रवाल कॉल रिसीव नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने खुद स्वास्थ्य सचिव को फोन कर क्षेत्र से जुड़े लंबित मामलों की जानकारी मांगी। इसी बातचीत के दौरान विवाद की स्थिति बनने का आरोप लगाया गया है। बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव का व्यवहार कथित रूप से अहंकारपूर्ण और अमर्यादित था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए इसे विशेषाधिकार समिति को भेजने का अनुरोध किया है।
इसके अलावा सांसद ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से भी अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी निर्वाचित सांसद के साथ अधिकारी इस तरह व्यवहार कर सकता है तो आम नागरिकों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने DoPT से इस पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। अब विभाग की रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सांसद के समर्थन में बयान देते हुए राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं इस मामले में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर DoPT की रिपोर्ट और लोकसभा स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह मामला केवल एक अधिकारी और सांसद के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़े मुद्दे के रूप में भी देखा जा रहा है।
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