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जाकिर घुरसेना/कैलाश यादव
छत्तीसगढ़ की धरती की महिमा किसान भले ही नहीं जान पाया पर बिल्डर और भूमाफिया सहित बड़े अधिकारी कर्मचारी अच्छे तरीके से समझ गए है। बहुत सारे बीच जो जलवायु परिवर्तन की वजह से उग नहीं पाते और यदि उग गए तो भरपूर फल दे नहीं पाते लेकिन अधिकारी कर्मचारी यहां के जलवायु में रच बस जाते है। और नोेट उगाना चालू कर देते है। बताय़ जा रहा है कि पिछले दिनों जेम पार्टल के जरिए की गई खरीदी में 400 रुपए किलो का भिंडी बीज 1300 रुपए में खरीदा गया। मजे की बात ये बीज छत्तीसगढ़ की जमीन में उगने लाय़क ही नहीं है। यह भी बताया जा रहा है कि एग्रीकल्चर विवि जिन राज्यों के लिए इस बीच को उपयुक्त बताया था उसमें छत्तीसगढ़ का नाम ही नहीं था। एसे में सिर्फ कमीशन के लिए आंख मूंदकर खरीदी कर लिए और किसानों के मत्थे मढ़ दिए । अब ऐसे में किसान आत्महत्या नहीं करे तो क्या करें। जबकि छत्तीसगढ़ में कृषि विवि है वहां इन बीजों की जांच भी होती है लेकिन अधिकारियों ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा उन्हंे तो सिर्फ अपने लिए नोट उगाना था सो उन्होंने खरीदी कर लिए. जिसे जो करना है करते रहे। इसी बात पर स्वर्गीय मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार का गाना याद आया जिसके बोल थे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती इसी को भ्रष्ट अधिकारी मूल मंत्र मानकरअपने तरीके से गुनगुना रहे है। और कह रहे है कि छत्तीसगढ़ की धरती रुपया उगले उगले हीरे मोती ।
टल गया, टल गया जो टलना था वो टल गया ...
पिछले डेढ़ साल से साय सरकार में विस्तार को लेकर कभी कयास तो कभी नामों की सूची वायरल होने के साथ विगत दिनों सरकार को कहना पड़ा कि बहुत जल्द मं6िमंडल का विस्तार होगा। और उसके लिए संगठन मंत्री से के सात प्रदेश प्रभारी की मैराथन बैठक हुई पर 12 घंटे की बैठक में कोई हल नहीं निकला। पूरे मीडिया यह खबर छपी की आज ही मंत्रिमंडल का विस्तार होना तय है। जिनके नाम पर चर्चा की गई उन सभी नामों पर बड़े नेताओ्ं और स्थानीय पदाधिकारियों की अापसी सहमति नहीं बन पाई । फिर सीएम को कहना पड़ा कि मंत्रिमंडल का विस्तार तो होगा पर केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में । जब कोई पत्रकार सीएम से यह सवाल रहता है कि इंतजार करिए । उस समय जिन नोताओ्ं को मंत्री के रूप में शपथ दिलाने की चर्चा होती है वहां उन नामों की चर्चा बढ़ जाती है और उनके ईर्दगिर्द भीड़ बढ़ जाती है और एक सप्ताह बाद भीड़ छट जाती है। मजे की बात अभी सरकार का ध्यान सुशासन तिहार पर है जो 31 मई तक चलेगा उसके बाद जून जुलाई में शिक्षा पर ध्यान रहेगा मतलब ये मौसम भी गया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जो लोग मंत्रिमंडल के लिस्ट में नहीं ते वो बार और होटलों में यह गाना गा रहे है कि टल गया टल गया टलने वाला टल गया ।
घर ही पाठशाला और माता पिता ही शिक्षक
एक युद्ध नशे के विरूद्ध अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, आबकारी विभाग, शिक्षा विभाग एवं नगरीय निकाय विभाग संयुक्त रूप से स्कूलों के आस-पास गुटखा, तम्बाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है । ऐसे बच्चे जो नशे के शिकंजे में फंस गये है, उनके पुनर्वास की जरूरत है। यह बहुत जरूरी है कि बच्चे नशे की ओर प्रवृत्त नहीं हो, इसके लिए टीम बनाकर कार्य कर रही है। तम्बाकू, गुटखा एवं अन्य मादक पदार्थों की बिक्री पर कोटपा अंतर्गत कड़ी कार्रवाई भी की है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि यह नशा अब अनुवांशिक श्रेणी में आ चुका है । इसके लिए घऱ से शुरूआत करनी होगी। तब कही जाकर गुटखा -तंबाखू से भावी पीढ़ी का पिंड छूट पाएगा। घऱ ही बच्चों का पहला स्कूल है और माता पिता ही शिक्षक हैं इसिलए जो घर में देखेंगे वो तो करेंगे ही इसलिए घऱ से इसकी शुरूआत हो माता पिता कभी भी बच्चों से पान-गुटखा तंबाखू नहीं मंगाए । आपका बच्चा कभी बिगडेगा ही नहीं । यही इसका मूल मंत्र है।
जो समझ गए वो समाधान है जो न समझे वे समस्या है
सरकार अच्छा खासा काम करते करते अधिकारियों के कहने पर भटक जाती है। इसका ताजा उदाहरण सुशासन तिहार है जहां समस्या का संमाधान करने से पहले सरकार को समाधान पेटी के लिए करोड़ों खर्च करने पड़े । रोज 33 जिलों से खबर आ रही है कि शिविरों में समाधान पेटी आवेदनों से भर गई है। सरकार को अधिकारियों ने बताया हुजुर और पेटी मंगवाने पड़ेंगे ,सरकार ने भी तुरंत आदेश दे दिए । अब पूरे प्रदेश में समस्या औऱ शिकायत को भी अधिकारी त्योहार के रूप में मनवा रहे है। इस चक्कर में कई अधिकारियों की लाइन बड़ी हो गई अब वो अवर और प्रमुख सचिव के रूप में पदोन्नत हो गए है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि महासमुंद में एक शिक्षाकर्मी नेे तैश में आकर अपनी समस्या को रखने के बजाय वित्तमंत्री ओ्पी चौधरी से इस्तीफा मांग कर आ बैल मुझे नार वाली कहावत को चरितार्थ कर लिया है।
समझ में आए वो सुशासन
पिछले डेढ़ साल से विष्णुदेव सरकार ने बहुत से जनोपयोगी कार्य किए है। जिसका सीधा लाभ हितग्राहियों को मिला है। अब जो सुशासन तिहार मनाया जा रहा है जिनकी समस्या डेढ़ साल से यथावत पड़ी थी, जिस पर सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए सुशासन तिहार के बहाने लोगों की समस्या का समाधान करने के बहाने आमजनता की खुशहाली का पता लगाना है। सुशासनितहार को लोकर लोगों में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। इस पहल के माध्यम से आम जनता की समस्या एवं शिकायतों का निर्धारित समयावधि में निराकरण किया जाएगा। जिससे शासकीय कामकाज में पारदर्शिता भी आएगी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि इसी पारदर्शिता के चक्कर में साय मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है। जिन लोगों ने पारदर्शिता तरीके से लाबिंग की थी उनके अरमान ठंडे हो गए है। जनता में खुसुर-फसुर है कि सरकार हमने बनाया है हम ही संवारेंगे के तर्ज पर काम कर रही है। निगम -मंडलों -आयोगों में जगह नहीं मिल पाने वाले नेता अब टकटकी लगाए मंत्रिमंडल विस्तार की खबर सुनने कभी हाई कमान तो कभी पार्टी अध्यक्ष तो कभी सुशासन के घर तक पहुंच जा रहे है ताकि यदि वहां समस्या या शिकाय़त की पेटी लगी हो तो अपनी बला वहां टांगकर आ जाते है। संवरना नहीं संवरना अलग बात है, हम को तो संवरना ही पड़ेगा।क्योंकि साढ़े तीन साल बाद चुनाव मैदान में उतरने के लिए कोई नया नारा का इजाद करना पड़ेगा। क्योंकि ये नारा नाम के अनुरूप काम नहीं कर पाया है। जिससे लोगों में कन्क्यूजन है कि कौन किसे बनाया और कौन किसे
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