छत्तीसगढ़

घुटने की कटोरी अस्थिर थी, सिम्स के डॉक्टरों ने बच्चे को दिया नया जीवन

Nil dhankar
18 Jan 2026 12:30 PM IST
घुटने की कटोरी अस्थिर थी, सिम्स के डॉक्टरों ने बच्चे को दिया नया जीवन
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बिलासपुर। सिम्स अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग ने 5 साल के बच्चे के जन्मजात घुटने की कटोरी (हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन) का सफल ऑपरेशन किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है, जो लगभग एक लाख बच्चों में से केवल 5 से 6 बच्चों में पाई जाती है।

लोरमी निवासी गुलशन साहू को चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत के चलते सिम्स के आर्थोपेडिक ओपीडी में लाया गया था। बच्चे के घुटने की कटोरी चलते समय बार-बार अपनी जगह से खिसक जाती थी, जिससे उसे सामान्य गतिविधियों में परेशानी होती थी।

आर्थोपेडिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय घिल्ले ने बच्चे की जांच की। एक्स-रे और एमआरआई जांच के बाद ‘हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन’ की पुष्टि हुई। डॉ. के अनुसार, यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें घुटने की कटोरी को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां एक ओर से अधिक कसी हुई और दूसरी ओर से ढीली होती हैं, जिससे पटेला स्थिर नहीं रह पाती।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क की गई, जिससे परिजनों को आर्थिक राहत मिली। गंभीरता को देखते हुए आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन को प्रकरण की जानकारी दी गई। 29 दिसंबर को बच्चे का ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान घुटने की कटोरी के एक ओर की मांसपेशी को टाइट किया गया और दूसरी ओर की मांसपेशी को ढीला किया गया। मेडिकल पब्लिकेशन के अनुसार इसमें VMO प्लास्टी और क्वाड्रिसेप्स Z-लेंथनिंग तकनीक का उपयोग किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की घुटने की कटोरी पूरी तरह स्थिर हो गई है और अब वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम है। ऑपरेशन टीम में आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन, डॉ. संजय घिल्ले (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. अविनाश अग्रवाल और डॉ. प्रवीन द्विवेदी शामिल रहे। निश्चेतना विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन और डॉ. श्वेता कुजूर ने सेवाएं दीं।

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