छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने मनरेगा तकनीकी सहायकों के तबादला आदेश पर रोक लगाई

Shantanu Roy
9 Jan 2026 9:04 PM IST
हाईकोर्ट ने मनरेगा तकनीकी सहायकों के तबादला आदेश पर रोक लगाई
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राज्य शासन को नोटिस जारी
Bilaspur. बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों के तबादले से जुड़े मामले में राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने संबंधित तबादला आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस निर्णय से मनरेगा कर्मचारियों के अधिकार और प्रशासनिक आदेशों की वैधता पर गंभीर संदेश गया है। मामले के अनुसार, टिकमचंद कौशिक एवं सूर्यबली सिंह, जो जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में मनरेगा तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत हैं, का तबादला कलेक्टर एवं कार्यक्रम समन्वयक द्वारा 4 दिसंबर 2025 को किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने उक्त आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पृथक-पृथक रिट याचिकाएं दायर की थीं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने यह दलील प्रस्तुत की कि राज्य शासन ने 16 मई 2023 को कलेक्टर और संभागायुक्त को तकनीकी सहायकों के स्थानांतरण का अधिकार वापस ले लिया था। इसके बावजूद 4 दिसंबर 2025 को जारी किए गए तबादला आदेश को वैधानिक अधिकार के अभाव में जारी किया गया, जो प्रथम दृष्टया अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर था। हाईकोर्ट की सुनवाई में न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया। राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता ने प्रतिवादियों क्रमांक 1 से 4 और अन्य अधिकारियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया, जबकि शेष प्रतिवादियों को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने सुनवाई के बाद निर्देश पारित किया कि याचिकाकर्ताओं से संबंधित 4 दिसंबर 2025 के तबादला आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन अगली सुनवाई तक रोका रहेगा। प्रकरण की अगली सुनवाई मार्च 2026 में सूचीबद्ध की गई है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों और अन्य कर्मचारियों के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे स्पष्ट होता है कि बिना वैधानिक अधिकार के पारित प्रशासनिक आदेशों पर न्यायालय सख्त रुख अपना सकता है। आदेश न केवल तकनीकी सहायकों के हितों की रक्षा करता है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वैधता को भी मजबूत करता है। इस निर्णय से राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को यह संदेश गया है कि किसी भी प्रशासनिक आदेश को जारी करने से पहले वैध अधिकार और नियमों की पुष्टि करना अनिवार्य है।
मनरेगा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारियों के तबादले से जुड़े विवादों में न्यायालय की यह निर्णय प्रक्रिया प्रशासनिक मामलों में न्यायिक नियंत्रण और निगरानी की भूमिका को रेखांकित करती है। हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश तकनीकी सहायकों के मनोबल को भी मजबूत करेगा। टिकमचंद कौशिक और सूर्यबली सिंह जैसे याचिकाकर्ता अब अपने तबादले आदेश के खिलाफ वैधानिक राहत पा सकेंगे और बिना वैध प्रक्रिया के किए गए प्रशासनिक आदेशों के क्रियान्वयन से बचेंगे। प्रशासनिक सूत्रों ने कहा कि इस आदेश के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभाग भविष्य में मनरेगा कर्मचारियों के तबादले में अधिक सतर्क और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाएंगे। यह आदेश राज्य शासन की योजना कार्यान्वयन प्रक्रिया और कर्मचारियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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