छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

Shantanu Roy
8 Nov 2026 5:26 PM IST
छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
x
छग
New Delhi/Bastar. नई दिल्ली/बस्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाया। इस दौरान उन्होंने जवानों के साहस, बलिदान और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2026 की दिवाली ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि देश नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है। उन्होंने कहा कि बस्तर की जिस धरती पर कभी नक्सली हिंसा का प्रभाव था, वहां अब विकास की नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री ने
सुरक्षा बलों
को इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय देते हुए 140 करोड़ देशवासियों की ओर से उनका आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ दिवाली मना रहा है, तब वह भी अपने परिवार के बीच पहुंचे हैं। उन्होंने जवानों से कहा कि सीमा पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करने वाले सभी सुरक्षाकर्मी उनके परिवार का हिस्सा हैं। कारगिल से लेकर लेपचा, सरक्रीक और आईएनएस विक्रांत तक जवानों के साथ मनाई गई दिवाली को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हर वर्ष सुरक्षाकर्मियों के बीच त्योहार मनाना उनके लिए विशेष अनुभव रहा है।


40-50 साल बाद आई ऐसी दिवाली: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 की दिवाली इसलिए विशेष है, क्योंकि उनके अनुसार देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। उन्होंने इसे चार से पांच दशकों के संघर्ष के बाद मिली बड़ी उपलब्धि बताया। मोदी ने कहा कि करोड़ों देशवासियों ने नक्सलवाद के भय को परास्त किया है और इस सफलता के पीछे सुरक्षा बलों का त्याग और परिश्रम है। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स और महिला कमांडो सहित सभी सुरक्षाकर्मियों की सेवाओं को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने में इन जवानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दंतेवाड़ा के शहीद जवानों को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के पुराने दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में शाम होने के बाद सामान्य जनजीवन ठहर जाता था और लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले का उल्लेख किया, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। उन्होंने उसी वर्ष दंतेवाड़ा की एक अन्य घटना में 44 नागरिकों की हत्या का भी जिक्र किया। मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान एक हजार से अधिक जवानों ने बलिदान दिया। उन्होंने दावा किया कि 47 वर्षों में पहली बार पिछले एक वर्ष के दौरान सीआरपीएफ के किसी भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी।


2014 के बाद बदली रणनीति और हालात
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए। सुरक्षा बलों को आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई और नक्सली संगठनों की आर्थिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों और अलगाववादी संगठनों की फंडिंग पर प्रहार किया गया। नकली मुद्रा के नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने के साथ हथियारों की आपूर्ति, आवाजाही और नई भर्ती पर भी रोक लगाने के प्रयास किए गए। प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले नक्सलवाद को एक ऐसी समस्या मान लिया गया था, जिसका समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट रणनीति के साथ इस चुनौती का सामना किया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रभावित इलाकों में विकास को भी प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में 15 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया और साढ़े नौ हजार से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए करीब 175 एकलव्य विद्यालय खोले गए। युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए लगभग 50 आईटीआई तथा इतने ही कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए। इसके अलावा बैंक शाखाओं, एटीएम और डाकघरों की सुविधाओं का विस्तार किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से दूरस्थ आदिवासी गांवों में पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए भी योजनाएं बनाई गई।

पीएम नरेंद्र मोदी ने आज बस्तर के जवानों के साथ किया नृत्य

50 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। मोदी ने जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने गरीब परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
'दिमागी नक्सलियों' को लेकर भी दिया बयान
प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ सफलता के बावजूद देश के सामने चुनौतियां समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों में ऐसे लोग सक्रिय हैं, जिन्हें उन्होंने 'दिमागी नक्सली' कहा। मोदी ने दावा किया कि ऐसे तत्व संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए इन चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की बात कही।
विकसित भारत का संकल्प दोहराया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और नशामुक्त भारत के लक्ष्यों को दोहराया। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने, स्वच्छता अभियान और टीकाकरण के विस्तार को सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जवानों से कहा कि उनके त्याग और परिश्रम से विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार होगी। प्रधानमंत्री ने सभी सुरक्षाकर्मियों और उनके परिवारों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए देश की सुरक्षा में उनके योगदान के लिए आभार जताया।
Next Story