छत्तीसगढ़
शिक्षकों का पाँच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न में, नैतिक शिक्षा व बाल-केंद्रित शिक्षण पर दिया गया विशेष जोर
Shantanu Roy
22 Dec 2025 12:33 AM IST

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छग
Raigarh. रायगढ़। नई शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत विकासखंड रायगढ़ की प्राथमिक शालाओं में कक्षा पहली, दूसरी एवं तीसरी का अध्यापन करने वाले शिक्षकों हेतु नवीन पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षण योजना पर आधारित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 15 से 20 दिसंबर तक सफलतापूर्वक किया गया। यह प्रशिक्षण कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश तथा जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.के.वी.राव एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री संजय पटेल एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक श्री मनोज अग्रवाल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम विकासखंड के चार चयनित केंद्रों प्राथमिक शाला ननसिया, माध्यमिक शाला जुर्डा, प्राथमिक शाला कोतरा एवं माध्यमिक शाला उर्दना में सुचारु रूप से संचालित किया गया।
प्रशिक्षण का संचालन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाईट धर्मजयगढ़ से प्रशिक्षित एवं अनुभवी मास्टर ट्रेनर्स द्वारा किया गया। इनमें श्री रोहित सिदार, श्री पहलाद चौहान, श्रीमती शिव कुमारी कंवर, श्रीमती लता महंत, मीना मैडम सहित अन्य प्रशिक्षक शामिल रहे। मास्टर ट्रेनर्स द्वारा शिक्षकों को नवीन पाठ्यपुस्तकों की अवधारणा, आधुनिक अध्यापन विधियाँ, गतिविधि आधारित शिक्षण, सीखने के परिणाम तथा सहायक एवं पूरक सामग्री के प्रभावी उपयोग पर व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति क्यूआर कोड आधारित प्रणाली से दर्ज की गई, जिससे पारदर्शिता एवं अनुशासन सुनिश्चित हुआ।
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस विकासखंड स्त्रोत समन्वयक मनोज अग्रवाल ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रारंभिक कक्षाओं में नैतिक शिक्षा, जीवन मूल्य, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सांस्कृतिक चेतना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों में देश, समाज एवं संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है और इसमें शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के संचालन में सीएसी उर्दना श्री विकास पटेल, सीएसी कोतरा श्री विनोद सिंह, सीएसी लोइंग श्री मनोज गुप्ता सहित सभी केंद्र प्रभारियों, सहयोगी स्टाफ एवं प्रतिभागी शिक्षकों का योगदान रहा। प्रशिक्षण में सम्मिलित शिक्षकों ने इसे नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं बाल-केंद्रित अध्यापन हेतु अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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