छत्तीसगढ़
जिले में नरेगा और ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से संवर रही ग्रामीण अंचलों की सूरत
Shantanu Roy
3 Jun 2026 10:37 PM IST

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Kanker. कांकेर। आगामी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिले के ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में हुए अभूतपूर्व कार्यों को रेखांकित किया जाएगा। राज्य शासन की मंशानुसार कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यापक वृक्षारोपण और ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत जल संरक्षण व वृक्षारोपण किया जा रहा है। इसके तहत विगत वर्ष जिले के शासकीय परिसरों, तालाबों के बंड (मेड़) और मुख्य सड़कों के किनारों पर व्यापक स्तर पर फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया था। इस बार प्रशासन द्वारा केवल पौधे लगाने पर ही नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की दर (survival Rate) को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। जिले में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों के महिलाओं के निजी भूमि पर आजीविका डबरी में फलदार पौधों (जैसे आम, अमरूद, जामुन) के रोपण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आमदनी में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।
जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर को सुधारने और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए चलाया जा रहा ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान जिले के लिए वरदान साबित हो रहा है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा और अन्य योजनाओं के सहयोग से कुल 11495 भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने के लिए संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसमें गौरव की बात यह है कि जिले में 2,597 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक (शीर्ष) है। इसके अलावा जल संरक्षण से संबंधित निर्मित संरचनाओं में मुख्य रूप से शामिल हैं, जिसमें मिनी परकोलेशन टैंक, नया तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, ब्रशवुड निर्माण, लूज बोल्डर, चेक डैम निर्माण, गैबियन स्ट्रक्चर, अर्दन डेम, सोक पिट, रिचार्ज पिट, परकोलेशन टैंक तथा जल संरक्षण से संबंधित अन्य कार्य शामिल हैं। ये सभी संरचनाएं स्थानीय किसानों को सुरक्षित सिंचाई प्रदान करके उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग कर रही हैं। इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने बताया कि मनरेगा और मोर गांव, मोर पानी अभियान केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये हमारे गांवों को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति सुरक्षित बनाने की नींव हैं। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के इस मौके पर लोगों से अधिक से अधिक पौधे रोपण किए जाने की अपील की है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-भागीदारी और मजबूत हो सके।
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