छत्तीसगढ़
जेलरों का साम्राज्य, जेल में चलता है जेलर का राज
jantaserishta.com
14 July 2026 10:49 AM IST

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छत्तीसगढ़ के जेल सुधार गृह की जगह बन चुके है अपराधियों के एशगाह, लड़की को छोड़ कर सभी तरह के नशीले द्रव्य हो रहे मुहैया
रायपुर (जसेरि)। राजधानी सहित प्रदेश के तमाम जेलों में रसूखदार बंदियों की खिदमत में जेलर से लेकर नंबरदार पलक पावड़े बिछाए रहते है। रसूखदार बंदियों की जेल में एंट्री होते ही जेलर से लेकर नंबरदार कमाई में जुट जाते हैं। लड़की सप्लाई को छोड़कर उनके खाने पाने से लेकर उनके तमाम तरह की शौकों को पूरी संजीदगी से पूरी करते है। उनका बस चले तो वो भी कर सकते है। जिस तरह शहरों और गांव के गली मोहल्ले में शराब, गांजा, चरस, अफीम, डोडा, नशीली गोलियां आसानी से मिल जाती ठीक उसी तरह धनवान और पैसे वाले बंदियों को जेलों में नशीली गोलियों से लेकर शराब, गांजा, चरस, डोडा, बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाते है। जेल में जेलर का राज चलता है। उसके बाद नंबरदार कमाई का तड़का लगाता है। खाने में आम बंदियों से हटकर रसूखदारों को विशेष टिटमेंट दिया है।
सरकार गांव औऱ शहरों में नशीली गोलियों से लेकर अवैध शराब, तस्करी वाले गांजा पकड़ने के लिए जिस तरह अभियान चलाती है यदि उसी तरह जेलों में अभियान चलाए तो गांजा, शाराब, अफीम, डोडा के साथ नशीली गोलियों का जखीरा बरामद हो सकता है। छत्तीसगढ़ के जेलों में मिलने वाली सुविधा से प्ररित होकर अपराधी जेल से छूटते ही फिर अपराध को अंजाम देकर वापस जेल में पहुंच जौता है। जिसके कारण अपराध कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहे है।
दुर्ग के सेंट्रल जेल में वीआईपी सुविधा, दिया जा रहा काजू, बादाम और नशे का सामान
सेंट्रल जेल दुर्ग में बड़े अपराधियों को वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महादेव ऑनलाइन सट्टा से जुड़े अपराधियों के बैरक में काजू, बादाम सर्व किया जा रहा है। सेंट्रल जेल दुर्ग में बड़े अपराधियों को वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महादेव ऑनलाइन सट्टा से जुड़े अपराधियों के बैरक में काजू, बादाम सर्व किया जा रहा है। जेल के भीतर तक नशे का सामान भी पहुंच रहा है। यह भी शिकायतें मिलती रही है कि जेल में अपराधी मोबाइल से फोन करके समय-समय पर लोगों को धमकी देते हैं। जेल के बाथरूम में मोबाइल मिलने की बात से यह सच साबित होता है।
पिछले दिनों दुर्ग कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने सब कुछ अपनी आंखों से देखा जब वे छापामार कार्रवाई करने जेल पहुंचे। इस कार्रवाई में कई खुलासे हुए। जेल में छामापारी के दौरान पुलिस अधिकारियों ने देखा कि बड़े अपराधियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। इनको नवीन जेल परिसर में रखा गया है। एसपी ने देखा कि सभी आरोपी मोटे गद्दे पर सोए हुए हैं। इनके गद्दे के नीचे से काजू, बादाम और किशमिश जैसे ड्राई फूड मिले। इससे चक्कर अधिकारी और इंचार्ज की भूमिका संदिग्ध है।
सूत्रों के मुताबिक जेल के भीतर आला अधिकारियों के छापामार कार्रवाई होने की सूचना पहले ही पहुंच गई थी। यही वजह है कि प्रतिबंधित सामान मिला, लेकिन अधिक मात्रा में नहीं मिला। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी और एसपी जितेंद्र शुक्ला ने टीम के साथ सेंट्रल जेल में दबिश दी। इस दौरान उनके साथ एएसपी अभिषेक झा और 96 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। टीम ने जेल का चप्पा चप्पा छान मारा। जेल के बैरक में पहुंचे, तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जेल में मोबाइल फोन, चाकू जैसी पट्टी, चिलम, बीड़ी, सिगरेट, तंबाखू जैसी प्रतिबंधित सामान मिले। इस पर एसपी शुक्ला ने नाराजगी जाहिर करते हुए जेल के अफसरों को फटकार लगाई।
दुर्ग के सेंट्रल जेल में इस समय बंद बड़े अपराधियों में गैंगस्टर तपन सरकार, उपेंद्र सिंह उर्फ कबरा समेत उनके कई गुर्गे हैं। इनको नवीन जेल के सेक्टर बी के एक बैरक में रखा गया था। वहीं उपेंद्र भी इस जेल में है। जिसने जेल से पेशी जाते समय पूरी की पूरी ट्रेन हाईजैक कर ली थी। महादेव सट्टा ऐप का मास्टर माइंड में से एक दीपक नेपाली भी यहां बंद है। दुर्ग के एएसपी अभिषेक झा ने कहा की जेल की व्यवस्था प्रशासनिक होती है, कलेक्टर, दुर्ग के निर्देश पर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंधित सामान मिला है। इसको लेकर पुलिस अधीक्षक ने रिएक्ट जरूर किया है। मामले की जांच की जा रही है।
देश का अनोखा रायपुर सेंट्रल जेल
गत दिनों राजधानी की सेंट्रल जेल फिर से विवादों में घिर गई है. 13 से 15 अक्टूबर के बीच जेल के भीतर एक कैदी का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में एनडीपीएस एक्ट का आरोपी रशीद अली उर्फ राजा बैजड जिम करता नजर आ रहा है. वह अपने साथियों रोहित यादव और राहुल वाल्मिकी के साथ सेल्फी भी लेता दिखा. रोहित यादव और राहुल वाल्मिकी भी वीडियो में दिखाई दे रहे हैं. यह साफ़ दर्शाता है कि जेल के भीतर मोबाइल और इंटरनेट का खुला इस्तेमाल हो रहा है. पहले भी झारखंड के गैंगस्टर अमन साव का फोटोशूट वायरल हो चुका है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
यह घटना साफ़ करती है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन और इंटरनेट का खुला इस्तेमाल हो रहा है. जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर अब सवाल उठ रहे हैं. वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं. जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की गई है कि इतने कड़े सुरक्षा उपायों के बावजूद मोबाइल फोन जेल में कैसे पहुंचा? पहले भी रायपुर सेंट्रल जेल विवादों में आ चुकी है. झारखंड के गैंगस्टर अमन साव का फोटोशूट वायरल होना इसका उदाहरण है. तब भी जेल में सुरक्षा व्यवस्था और मोबाइल नियंत्रण पर सवाल उठे थे. सुरक्षा के नाम पर रोजाना तलाशी और लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद कैदी जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट का फायदा उठा रहे हैं।
कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
जेल प्रशासन को सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है. नहीं तो यह मामला भी फाइलों में ही दब सकता है. राज्य में सेंट्रल जेल की यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दिखाती है, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाती है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और फोटो ने जेल में कैदियों की वीआईपी ट्रीटमेंट की तस्वीर उजागर कर दी है. जेल अधिकारियों के लिए यह चुनौती है कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक कैसे लगाएं. इस मामले में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, यह भी देखा जाना बाकी है.
जगदलपुर जेल में कैदी पीते मिले गांजा, एसडीएम की रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे
केंद्रीय जेल में कैदी के भागने और मौतों के मामलों की जांच हुई। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे सामने आए हैं। इन खुलासों ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय जेल जगदलपुर में हाल ही में हुए कैदी के भागने और मौतों के मामलों की जांच करने पहुंचे उप जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बड़े खुलासे किए हैं। इन खुलासों ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान जेल के अंदर कैदी आराम से गांजा पीते हुए पाए गए। बीते कुछ दिनों से जेल की व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
इन्हीं सवालों के मद्देनजर उप जिलाधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जब जांच दल जेल पहुंचा, तो उप जिलाधिकारी भी वहां की स्थिति देखकर चकित रह गए। जांच दल ने पाया कि जेल की बैरकों में कैदी आराम से बैठकर गांजा फूंक रहे थे। वहां तैनात सिपाहियों के खड़े रहने के बावजूद किसी भी कैदी को कोई रोक-टोक नहीं की जा रही थी। बैरक सं या सात के पास गांजे की एक पुड़िया भी मिली। जब्त किए गए गांजे का वजन 14.1 ग्राम था। इस गांजे को जब्त करने के बाद कोतवाली में अज्ञात गांजा तस्कर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह घटना जेल में सुरक्षा के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य
उप जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जेल के भीतर कैदियों को आसानी से नशे का सामान उपलब्ध हो रहा है। यह स्थिति तब है जब जेल में निगरानी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। जांच दल ने स्पष्ट रूप से देखा कि कैदी बिना किसी डर के गांजा पी रहे थे। सिपाहियों की मौजूदगी में भी उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। यह दर्शाता है कि जेल प्रशासन की मिलीभगत या घोर लापरवाही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न
केंद्रीय जेल जगदलपुर से विगत माह पहले एक कैदी के भागने की घटना हुई थी। इसके अलावा जेल के अंदर कैदियों की मौत के मामले भी सामने आए थे। अब नशाखोरी का यह नया मामला सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। निगरानी कैमरों की निगरानी के बावजूद नशे का सामान अंदर पहुंचना चिंताजनक है। यह जेल की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली की विफलता को उजागर करता है। प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
गांजा तस्करी
जांच के दौरान बैरक सं या सात के पास से 14.1 ग्राम गांजा जब्त किया गया। इस बरामदगी के बाद कोतवाली में अज्ञात गांजा तस्कर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि जेल के भीतर से ही नशे के सामान की आपूर्ति की जा रही है। पुलिस अब इस मामले की गहनता से जांच करेगी। गांजा तस्करों और इसमें शामिल जेल कर्मचारियों की पहचान करना आवश्यक है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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